रामानंद सागर को ‘रामायण’ से मिली थी एक अलग पहचान

(29 दिसंबर विशेष)

रामानंद सागर उर्फ चंद्रमौली चोपड़ा ने `रामायण’ बनाकर टेलीविजन की लोकप्रियता का नया व्याकरण गढ़ दिया। नतीजतन, रामानंद सागर ने कई फिल्में और टेलीविजन धारावाहिक किए हों लेकिन धारावाहिक `रामायण’ उनकी इकलौती पहचान बन गई। इस धारावाहिक ने रामानंद सागर को जैसे अमर कर दिया। शुरू में `रामायण’ सीरियल को 45 मिनट के 52 एपिसोड तक चलाने की योजना थी लेकिन जब देखा गया कि इसके प्रसारण के समय गलियां सूनी और सड़कों पर पर कर्फ्यू जैसी शांति हो जाती है तो इसकी लोकप्रियता के कारण इसके एपिसोड की संख्या तीन बार बढ़ाई गई। आखिरकार यह 78 एपिसोड पर समाप्त हुआ।

29 दिसंबर 1917 को लाहौर के पास असल गुरुके में पैदा हुए रामानंद सागर के परदादा लाला शंकर दास चोपड़ा, देश के बंटवारे से पहले लाहौर से कश्मीर चले आए थे। हालांकि देश की आजादी के बाद कश्मीर पर जब पाकिस्तानी कबीलाइयों का हमला हुआ तो उनका परिवार एकबार फिर कश्मीर छोड़ने को विवश हो गया। कश्मीर पर कबाइली हमले के दौरान उड़ीसा के दो बार के मुख्यमंत्री और साहसी पायलट रहे बीजू पटनायक बचाव दल का जहाज उड़ा कर कश्मीर पहुंचे थे और रामानंद सागर परिवार सहित काफी संख्या में दूसरे लोगों को सकुशल वहां से निकाल लाए।

रामानंद को उनकी नानी ने गोद लिया था, जिनके कोई बेटा नहीं था, उस समय उनका नाम ‘चंद्रमौली चोपड़ा’ से बदल कर ‘रामानंद सागर’ कर दिया गया था। सागर ने दिन में चपरासी, ट्रक क्लीनर, साबुन विक्रेता, सुनार प्रशिक्षु आदि के रूप में काम किया और रात में पढ़ाई जारी रखी। वह 1942 में पंजाब विश्वविद्यालय से संस्कृत और फारसी में स्वर्ण पदक विजेता थे।

1985 में सागर ने दादा दादी की कहानियां के साथ टेलीविजन की ओर रुख किया। उनके निर्देशन में बनी फिल्म रामायण का पहला एपिसोड 25 जनवरी 1987 को प्रसारित हुआ। उनके अगले टेली-धारावाहिक कृष्णा और लव कुश थे, जो उनके द्वारा निर्मित और निर्देशित दोनों थे। बाद में उन्होंने साईं बाबा का निर्देशन भी किया। सागर ने विक्रम और बेताल और अलिफ़ लैला जैसे फंतासी धारावाहिक भी बनाए। इससे पहले उन्होंने कई फिल्मों का निर्देशन किया। रामानंद सागर ने घूंघट, आरजू, प्रेम बंधन जैसी कई सुपरहिट फिल्मों का निर्देशन किया। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत पृथ्वी थिएटर में स्टेज मैनेजर के रूप में की थी। भारत सरकार ने रामानंद को 2000 में कला और सिनेमा में उनके योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया था। 12 दिसंबर 2005 को 87 वर्ष की अवस्था में उनका निधन हो गया।(एएमएपी)

भू वैज्ञानिकों का दावा, जोशीमठ संकट के लिए भूस्खलन की घटनाएं है जिम्मेदार

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उत्तराखंड के जोशीमठ में घरों में दरारें और अजीब तरीके से सड़क से पानी का निकलने की वजह भूधंसाव मानी जा रही है। यहां के स्थानीय लोगों के अलावा सरकार की टीम ने भी यही कहा था कि जोशीमठ धंस रहा है। हालांकि अब भू वैज्ञानिकों ने कहा है कि वहां भूधंसाव नहीं है रहा है बल्कि बढ़ी हुई भूस्खलन की घटनाएं इसके लिए जिम्मेदार हैं।यूके की यूनिवर्सिटी ऑफ हल के वाइस चांसलर दावे पीटली ने अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन ब्लॉग में 23 जनवरी को लिखा, ‘गूगल अर्थ इमेजरी से स्पष्ट हो रहा है कि यह शहर पुराने भूस्खलन के मलबे पर ही बना था।’ इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि कितना बड़ा इलाका भूस्खलन की चपेट में आ सकता है। उन्होंने कहा कि पहले भूधंसाव की बात कही जा रही थी। भूधंसाव से ज्यादा एरिया भूस्खलन की वजह से खतरे में आ सकता है।

उनके विचार से भारत के भी बड़े भूवैज्ञानिक सहमत दिखे। वाडिया इंस्टिट्यूट ऑफ हमिलाय जियोलॉजी के डायरेक्टर कलाचंद सेन ने कहा, स्लोप वाले इलाके में भूस्खलन हुआ है। इसमें वर्टिकल और हॉरिजॉन्टल दोनों तरह का मूवमेंट है। हालांकि भूधंसाव में केवल वर्टिकल मूवमेंट होता है। इसलिए कहा जा सकता है कि पुरा इलाका स्लाइड कर रहा है। 14 जनवरी को भी सेन ने कहा था कि जोशीमठ के संकट को भूधंसाव का नाम दिया जाना गलत है।

सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ द बायोस्फेयर स्पेस के अध्ययन पर पीटली की रिपोर्ट भी आधारित है। उन्होंन कहा, अक्टूबर 2021 में भी डिफॉर्मेशन रेट बढ़ी थी। अनुमान है कि पहले जहां जमीन खिसकी थी वह क्षेत्र नदी के पास था। इससे कहा जा सकता है कि टो इरोजन की वजह से ही यह संकट खड़ा हुआ है। वहीं सेन के मुताबिक इस स्लाइडिंग के पीछे कई जहें हो सकती हैं।

उन्होंने कहा, फरवरी 2021 की बाढ़ के बाद टो इरोजन इसमें प्रमुख कारण है। इसके अलावा डेटा कलेक्शन में सामने आया है कि बर्फबारी और खराब मौसम भी इसके पीछे कारण हो सकता है। स्लोप रीजन में भूस्खलन की वजहों में ज्यादा बारिश, टेक्टोनिक मूवमेंट और मानवीय गतिविधियां कारण हो सकती हैं। वहीं जोशीमठ जाकर अध्ययन करने वाले भूवैज्ञानिक एसपी सती और नवीन जुयाल का कहना है कि यहां भूधंसाव और भूस्खलन दोनों ही हो रहा है। (एएमएपी)

जीवन के उत्सव को पल प्रतिपल में मनाएं

जयराम शुक्ल।

समय की गति के हिसाब से हर नया विहान ही नया वर्ष है। हर क्षण अगले क्षण की पृष्ठभूमि बनता जाता है। सृष्टि के अस्तित्व में आने के बाद से समय की गति ऐसी ही है… ऐसी ही चलती रहेगी महाप्रलय तक। महाभारत का एक दृष्टान्त है- राजसूय यज्ञ के उपरान्त महाराज युधिष्ठिर ने प्रजा को दान देने के लिए राजसी खजाने को खोल दिया। जो भी याचक आया उसे धन धान्य देकर सम्पन्न किया। दान का सिलसिला देर रात्रि तक चलता रहा।महाराज युधिष्ठिर दान देते-देते थक गए व विश्राम गृह में चले गए इस निर्देश के साथ कि उनके शयन विश्राम में कोई बाधा न बने। रात के तीसरे पहर एक याचक आया दान प्राप्त करने की अभिलाषा के साथ। द्वारपाल बने भीम ने युधिष्ठिर के निर्देश की अवज्ञा करते हुए उनके शयन कक्ष में दस्तक दी व अनुनय किया- महाराज बाहर एक याचक खड़ा है, आपसे दान प्राप्त करने की प्रतीक्षा में।  विघ्न से क्लान्त युधिष्ठिर बोले- याचक को कह दिया जाए कि वह प्रात:काल आए उसे उसकी अपेक्षा के अनुरूप धनधान्य दिया जाएगा। महाबली भीम बाहर आए और ढोल-नगाड़े वालों को बुलाकर जश्न मनाने लगे- महाराज युधिष्ठिर की जय हो..! उन्होंने काल को जीत लिया है..! काल अब उनके अधीन है..! उनकी प्रज्ञा को यह भान हो गया है कि अगले क्षण क्या होने वाला है।

ढोल-ढमाकों शंखनाद को सुनकर युधिष्ठिर बाहर आए व भीम से पूछा क्या हुआ? इस उल्लास का कारण? भीम ने उत्तर दिया- कारण तो आप हैं महाराज। आपने काल पर भी विजय प्राप्त कर ली। आप त्रिकालदर्शी हो गए महाराज इसीलिए याचक को कल प्रात:काल आने का संदेश भिजवाया। युधिष्ठिर को अपनी भूल का भान हुआ। ठीक कहते हो भीम अगले क्षण क्या होगा… कौन जान सकता है? उन्होंने उसी क्षण याचक को दान देकर धन-धान्य से सम्पन्न किया और अनुज भीम से अपनी भूल के लिए क्षमा मांगी।

अगले क्षण क्या होने वाला है। कोई कैसे जान सकता है, पर दुनिया का हर व्यक्ति इसी भुलावे में जिन्दगी जीता है और अगले क्षण की परिकल्पना करते हुए भविष्य के जतन में जुटा रहता है। मृत्यु के ध्रुवसत्य को जानते हुए भी जिन्दगी भर खुद को भुलावे में रखता है। यही जिजीविषा उसे अन्य प्राणियों से भिन्न बनाती है। दुनिया भर के सभी प्रपंच इसीलिए जिजीविषा के इर्द-गिर्द रचे जाते है। बाजार और उपभोक्तावाद भी इसी जिजीविषा का सहउत् पाद है और युद्ध व साम्राज्यवाद के विस्तार की आंकाक्षा भी।

‘नया वर्ष’ जैसे कर्मकाण्डी उपक्रम भी बाजार की देन है वरना देखा जाए तो नए वर्ष में नया क्या..? समय की वही गति-लय और समाज के वहीं सब प्रपंच। पर मिथ्याचारियों ने कैलेण्डर के एक पन्ने के पलटने को भी भौतिकवादी अर्थशास्त्र से जोड़ दिया। हर व्यवस्थाएं भुलावे के मायाजाल का वितान तानकर मनुष्य को ‘मूर्खों के स्वर्ग’ (फूल्स पैराडाइज) में जीने का प्रलोभन देने में जुटी हैं।

सृष्टि में, समाज में जो कुछ भी बनता बिगड़ता है वह विधि के तयशुदा विधान के ही मुताबिक होता है। प्राय: हम यह मानकर चलते है कि परिवर्तन अग्रगामी ही होता है। जैसे पिछले नए वर्ष में हमने उम्मीदें पाली थीं कि दुनिया खुशहाल और विषमता से मुक्त होगी। हर क्षेत्र में ऐसे नवाचार होंगे जो मनुष्य की मुश्किलों का नया हल देंगे। मार-काट, युद्ध, आतंक, शोषण इन सबके अन्त की ठोस शुरूआत होगी।

पर पाया क्या… दुनिया फिर बर्बर युग की ओर मुड़ चली है। तीन चौथाई दुनिया युद्ध और आतंकवाद की विभीषिका में फँसी है। बड़े, बूढ़े, जवान बच्चे-मासूम,मजलूम सभी  गाजर-मूली की तरह काटे  जा रहे हैं।   युद्ध और आतंक की ज्वालाएं अखण्ड हो चली हैं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि तीसरे और अंतिम विश्व युद्ध का ताना-बाना बुना जा रहा है।  वसुधैव कुटुम्बकम् के जिस नए नारे के साथ नई सदी का आगाज किया गया था सब कुछ उसके उलट हो रहा है। हर क्षेत्र में एक विचित्र किस्म का  ध्रुवीकरण होता हुआ दिख रहा है। पीडक और पीड़ित, शोषक और शोषित, धनी और गरीब, कुलीन और असभ्य। ध्रुवीकरण की प्रक्रिया तेज और तेज होती जा रही है।

अपने देश में भी यही सब कुछ होता हुआ दिख रहा है। अमीरी का सूचकांक तय करने वाली एजेन्सियां प्रतिवर्ष भारतीय धनकुबेरों की सम्पत्ति एवरेस्ट की ओर बढ़ती हुई दर्शाती हैं। उसी के मुकाबले गरीबी की सीमा भी रसातल की ओर चली जाती है। सूची में चार नए अमीर शामिल होते हैं तो चार लाख लोग गरीबी की ओर खिसक जाते हैं। संसाधनों का अन्यायपूर्ण बंटवारा इस विषमता की खाई को हर नए वर्ष में और गहरा कर देता है।

सृष्टि के सनातनी नियम के अनुसार न कुछ पैदा होता है और न ही कुछ नष्ट होता है। बस रूप बदलता है। हिस्सेदारी बनती-बिगड़ती व कम ज्यादा होती है। हर साम्राज्य शोषण की बुनियाद पर खड़ा होता है। हर धनी की अर्जित सम्पत्ति किसी न किसी के हिस्से की होती है। फिल्म गीतकार शैलेन्द्र ने बड़े सहज शब्दों में इसकी अभिव्यक्ति दी है- तुम अमीर इसलिए कि हम गरीब हो गए। लोकतंत्र, संविधान, कानून, विधि-विधान, धर्म व पंथ की संहिताओं के बावजूद समूची दुनिया में ‘मत्स्य- न्याय’ ही चल रहा है। पिछले वर्ष भी ऐसा चला। इस नए वर्ष में भी इस चलन को रोकने वाली कोई व्यवस्था नहीं दिखती।

एक खयाली दुनिया रची जा रही है विकल्प के रूप में भी वहीं सामने प्रस्तुत है। रिश्ते-नाते-सम्बन्ध सबके मायने बदल रहे हैं। समाज की सनातनी वर्जनाएं टूटती सी जा रही है विकृतियां सैलाब सी बनकर उमड़ रही है। हम सब आंखें फाडकर देख रहे हैं, नि:सहाय। शायद सृष्टि के नियम और विधि के विधान यही हैं। इन तमाम, विकृतियों-विरोधाभाषों, विषमताओं के बाद भी हममें जीने की जो जीजिविषा है वही हमारे मनुषत्व का उद्घोष है। वही हमें मनुष्य बनाती है। यह जीजिविषा बनी रहे लेकिन शर्त है कि उम्मीदों से भरी हुई। हम हर पल में सम्पूर्ण जीवन जिएं। हर क्षण उत्सवी रहे। मनुष्यता की जो भी परिभाषा या विशेषता है, उसे हम यथार्थ में उतारें।

सैलानियों से गुलजार हुआ हिमाचल, नए साल का जश्न मनाने उमड़े सैलानी

यदि हम वास्तव में मनुष्य बनकर जिएं तो दुनिया में कोई समस्या हो ही नहीं। आज के दौर का सबसे बड़ा संघर्ष मनुषत्व को बचाए रखने का है। हर समाज के मूल में एक तत्व है। इन तत्वों का आधार संवेदना है। यही संवेदना अच्छे-बुरे को चीन्ह पाती है। इस संवेदना की तीव्रता को सतत् बनाए रखना जरूरी है। संवेदना गई तो, तो समझो मनुष्य पशुवत् हुआ। नए वर्ष के बाजारू कर्मकाण्ड से हटकर हर विहान को नए वर्ष की भांति स्वागत् करें। काल गति-समय के विधान को जानते हुए। अगले पल क्या होने वाला है, युधिष्ठिर की भांति हम भी नहीं जानते सो इसलिए कल के लिए कुछ न छोड़ें।

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जिन्दगी के कल के एजेन्डे को आज ही निपटाएं, आज हीं क्यों… इसी क्षण। कवि ने कहा है- काल करे सो आज कर, आज करे सो अब। पल में परलय होइगी बहुरि करेगा कब।। जिन्दगी के सफर की गाड़ी में रिवर्स गेयर का प्रावधान नहीं है। हम जिधर चल पड़े हैं वहां से लौटकर आने वाले नहीं। इस अनंत यात्रा में हम सब शामिल हैं। विश्व के जन-जन शामिल हैं।  इसलिए जिन्दगी का उत्सव मनाने के लिए अगले नव वर्ष का इन्तजार करने की आदत छोड़ दें। यह उत्सव जीवन के पल प्रतिपल में मनाएं। गीतकार नीरज की नसीहत का स्मरण करते हुए – मित्रो, हर पल को जियो अंतिम पल ही मान। अंतिम पल है कौन सा कौन सका है जान।।(एएमएपी)

पाकिस्तान को सऊदी अरब की सलाह, कश्मीर भूलकर भारत से कर लो दोस्ती

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बड़े आर्थिक संकट का सामना कर रहे पड़ोसी देश को अब झटके पर झटका मिल रहा है। आईएमएफ के बाद अब उसके करीबी देशों ने भी उसे दो टूक जवाब दिया है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने पाकिस्तान से कहा है कि वह कश्मीर मुद्दे पर दिमाग ना खपाए और भारत से दोस्ती करके इस विवाद को खत्म कर दे। यूएई और सऊदी अरब दोनों ने ही पाकिस्तान को सलाह दी है कि अब वह कश्मीर के मुद्दे पर शांत हो जाए। बता दें कि कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा था कि वह पीएम मोदी को संदेश देना चाहते हैं कि दोनों देशों के बीच शांति स्थापित हो। लेकिन बाद में पीएमओ की तरफ से फिर से कहा गया कि कश्मीर मे अनुच्छेद 370 बहाल होने के बाद ही बातचीत की गुंजाइश है।सऊदी अरब इस बात को समझ गया है कि पाकिस्तान अपनी माली हालत को सुधारने के बजाय सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए कश्मीर राग अलापता रहता है। वह दुनिया के हर मंच पर विकास की बात करने की जगह इसी मुद्दे को रखता है। ऐसे में सऊदी अरब ने अपने हाथ खींच लिए हैं। वहीं यूएई ने पाक की आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए कश्मीर में निवेश का फैसला कर लिया है। बात करें ओआईसी की तो वह सऊदी अरब के इशारे पर ही चलता है। ऐसे में ओआईसी के सदस्य देश भी शांत हैं।

पाकिस्तानी मीडिया में भी इस बात को लेकर काफी चर्चा है। पाकिस्तानी मीडिया का भी कहना है कि भारत के साथ साऊदी अरब और यूएई के आर्थिक संबंध काफी मजबूत हो गए हैं। वहीं सऊदी अरब और यूएई भी तेल के अतिरिक्त साधन से अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में लगे हैं। भारत एक बड़ा बाजार है ऐसे में अगर भारत के द्वारा उनके लिए खुलते हैं तो वे फायदे में रहेंगे। दावा यह भी किया गया कि इमरान खान के कार्यकाल में भारत के साथ पाकिस्तान की बात होने ही वाली थी। पूर्व सेना प्रमुख बाजवा इसके लिए तैयार भी हो गए थे लेकिन फिर इमरान खान ने ही अपने कदम पीछे खींच लिए। (एएमएपी)

अदालतों में करोड़ों केस सालों से लंबित, देश के 25 हाईकोर्ट में जजों के 333 पद खाली

हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के तबादले की सिफारिश को मंजूरी में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से नाराजगी जताई है। वहीं अदालतों में करोड़ों केस सालों से लंबित हैं। इन सबके बीच आंकड़े यह भी बताते हैं कि अदालतों में बड़ी संख्या में न्यायाधीशों के पद खाली हैं। देश के 25 हाईकोर्टों में कुल 333 पद खाली हैं।विधि और न्याय मंत्रालय के अनुसार हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के कुल स्वीकृत पदों की संख्या 1108 है। इनमें से 775 पद भरे हैं जबकि 333 पद खाली हैं। सरकार ने कहा है कि सरकार और सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम के बीच न्यायाधीशों की नियुक्ति के 142 प्रस्ताव प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में हैं।

सबसे अधिक इलाहाबाद हाईकोर्ट में 64 पद खाली

देश में सबसे अधिक 64 पद इलाहाबाद हाईकोर्ट में खाली हैं। यहां स्वीकृत पदों की संख्या 160 है इनमें 96 पदों पर ही न्यायधीश कार्यरत हैं। दूसरे स्थान पर बंबई हाईकोर्ट है जहां 29 पद खाली हैं। सिक्किम में एक भी पद खाली नहीं है जबकि मेघालय, गुवाहाटी में 1-1 पद, त्रिपुरा में 3 तथा उत्तराखंड, झारखंड तथाआंध्रप्रदेश में 5-5 पद खाली हैं।

विधि एवं न्याय मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इलाहाबाद हाइकोर्ट में जजों के कुल 160 पद स्वीकृत हैं। उनमें से 96 पर जज कार्यरत हैं। वहीं 64 खाली हैं। ठीक इसी तरह बंबई हाईकोर्ट में 94 पदों में से 666 कार्यरत हैं और 29 खाली हैं। गुजारत हाईकोर्ट में कुल 52 पद हैं। इनमें से 26 पद खाली हैं। मद्रास हाईकोर्ट को भी 23 जजों की आवश्यक्ता है। यहां कुल 75 पद हैं, जिनमें से 52 पदों पर जज कार्यरत हैं। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की बात करें तो यहां कुल पद 53 हैं, जिनमें से 31 खाली हैं।

पटना हाईकोर्ट में फिलहाल 34 जज हैं। यहां 19 पद खाली पड़े हैं। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में 19 पद खाली हैं। दिल्ली हाईकोर्ट में भी जजों को 15 पद खाली हैं। यहां जजों के कुल स्वीकृत पद 60 हैं। राजस्थान हाईकोर्ट में 15 पद खाली पड़े हैं।

इस साल 80 जज हो जाएंगे रिटायर

विधि एवं न्याय मंत्रालय के अनुसार इस साल यानी वर्ष 2023 में सुप्रीम कोर्ट तथा हाईकोर्ट से 80 न्यायाधीश सेवानिवृत्त हो जाएंगे। सबसे अधिक इलाहाबाद तथा पंजाब और हरियाणा से 9-9 न्यायधीश रिटायर होंगे जबकि सुप्रीम कोर्ट से 8 न्यायाधीश इस साल सेवानिवृत्त होंगे। अन्य में हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और लद्दाख तथा मेघालय से 1-1 न्यायधीश, कलकत्ता से 4,दिल्ली से 6, मध्य प्रदेश से 7 न्यायाधीश रिटायर होंगे। (एएमएपी)

सशस्त्र बलों के लिए स्वदेशी असॉल्ट राइफल ‘उग्रम’ लॉन्च, डीआरडीओ ने की विकसित

चार किलोग्राम से कम वजन वाली असॉल्ट राइफल आधा किमी. तक कर सकती है फायर
ऊंचाई, रेगिस्तान सहित विभिन्न मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों में किया जाएगा परीक्षण

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने सशस्त्र बलों के लिए 7.62×51 मिमी. कैलिबर की स्वदेशी असॉल्ट राइफल ‘उग्रम’ लॉन्च कर दी है, जिसकी प्रभावी रेंज 500 मीटर और इसका वजन चार किलोग्राम से कम है। इसे स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित किया गया है। इन असॉल्ट राइफल को सशस्त्र बलों, अर्धसैनिक बलों और राज्य पुलिस इकाइयों की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।डीआरडीओ की पुणे स्थित लैब आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (एआरडीई) ने हैदराबाद की द्विपा आर्मर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से 7.62 x 51 मिमी. कैलिबर की एक अत्याधुनिक असॉल्ट राइफल विकसित की है। राइफल की प्रभावी रेंज 500 मीटर और इसका वजन चार किलोग्राम से कम है। राइफल का पहला ऑपरेशनल प्रोटोटाइप नाम ‘उग्रम’ दिया गया है, जिसका अर्थ है क्रूर। इस असॉल्ट राइफल का अनावरण सोमवार को पुणे में डीआरडीओ के आर्मामेंट और कॉम्बैट इंजीनियरिंग सिस्टम के महानिदेशक डॉ. शैलेन्द्र वी गाडे के हाथों किया गया।

इस परियोजना पर काम करने वाले एआरडीई के वैज्ञानिकों ने बताया कि राइफल को भारतीय सेना के जनरल स्टाफ क्वालिटेटिव रिक्वायरमेंट्स (जीएसक्यूआर) के आधार पर डिजाइन किया गया है। राइफल में 20 राउंड मैगजीन होती हैं और यह सिंगल और फुल ऑटो दोनों मोड में फायर करती है। इससे पहले दिसंबर में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने भारतीय सशस्त्र बलों के लिए 7.62 x 51 मिमी. कैलिबर की 70 हजार यूएस-निर्मित सिग सॉयर असॉल्ट राइफल की खरीद को मंजूरी दी थी। इससे पहले 2020 की शुरुआत में 800 करोड़ रुपये से अधिक कीमत पर 72 हजार अमेरिकी सिग सॉयर असॉल्ट राइफलें खरीदी गईं थी।

एआरडीई के निदेशक अंकथी राजू ने बताया कि यह दो साल पहले शुरू किया गया एक मिशन मोड प्रोजेक्ट था। राइफल की डिजाइन तैयार करने के बाद इसके विकास और निर्माण के लिए एक निजी उद्योग भागीदार की तलाश शुरू की। इसके लिए हैदराबाद स्थित द्विपा आर्मर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को चुना गया, जिसने इसके हार्डवेयर पर काम करना शुरू कर दिया। स्वदेशी असॉल्ट राइफल ‘उग्रम’ को सशस्त्र बलों में शामिल करने से पहले कई आंतरिक, स्वीकृति और उपयोगकर्ता परीक्षणों से गुजरना होगा।

झारखंड में शिक्षा के साथ अपने कौशल को भी निखार रहे बच्‍चे, रच रहे कीर्तिमान

निदेशक राजू के मुताबिक राइफल को जल्द ही परीक्षण के लिए भेजा जायेगा। परीक्षण के दौरान ‘उग्रम’ से बिना रुके निर्धारित संख्या में राउंड फायर करके इसकी सटीकता और स्थिरता की जांच की जाएगी। हथियार का परीक्षण ऊंचाई, रेगिस्तान आदि सहित विभिन्न मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों में किया जाएगा। स्वीकृति प्रक्रिया के लिए सेना अधिकारियों का एक बोर्ड गठित किया जाएगा।

द्विपा आर्मर इंडिया के निदेशक जी राम चैतन्य रेड्डी ने बताया कि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण भारत में एके-203 परियोजना शुरू न हो पाने की वजह से भारत में असॉल्ट राइफलों की बड़ी कमी है। तीन महीने पहले अक्टूबर 2023 में ऑर्डर मिलने के बाद हमने सफलतापूर्वक पांच प्रोटोटाइप असॉल्ट राइफल दी हैं। यह दुनिया में किसी भी हथियार का सबसे तेज़ विकास है। प्रोटोटाइप के विकास और उनके परीक्षणों के बाद हम और परीक्षण करेंगे, जिसके लिए हम एआरडीई को 15 और राइफल देंगे। इसके बाद आगे की मंजूरी की प्रक्रिया शुरू होगी।(एएमएपी)

तुर्की-सीरिया में भूकंप के बाद भय, भूख और ठंड ने बढ़ायी पीड़ितों की समस्याएं

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मृतकों की संख्या 21 हजार के पार।

तुर्की-सीरिया में आए भयंकर भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर अब 21,000 को पार कर गई है। तुर्की के उप राष्ट्रपति फुआत ओकटे के अनुसार, तुर्की में कम से कम 17,674 लोग मारे गए हैं, जबकि सीरिया में कम से कम 3,377 लोग मारे गए हैं। इस बीच, विश्व बैंक ने राहत और बचाव कार्य के लिए सहायता के तौर पर तुर्की को 1.78 अरब डॉलर देने का वादा किया है।चार दिन पहले तुर्की और सीरिया में आए भूकंप के बाद सैकड़ों हजारों लोगों को ठंड, भूख और निराशा ने बेघर कर दिया है। कड़ाके की ठंड ने भूकंप पीड़ितों की समस्याएं बढ़ा दी हैं। भय, भूख से परेशान भूकंप प्रभावित बेघर लोगों को कंपकपाती ठंड का सामना करना पड़ रहा है। हजारों बच्चे और बूढ़े कंपकपाती ठंड में गर्म कपड़े, भोजन और दवा की आस लगाए बैठे हैं। इससे राहत कार्य भी प्रभावित हुआ है।

अलजजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूनाइटेड किंगडम स्थित चिल्ड्रन्स चैरिटी का कहना है कि उसने क्षेत्र में आपातकालीन भोजन राशन और टेंट उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है। मशहूर इंटरनेशनल एनजीओ सेव द चिल्ड्रेन सीरिया के एडवोकेसी, मीडिया और संचार निदेशक कैथरीन अकिलिस ने एक बयान में कहा, “उत्तर पश्चिमी सीरिया में स्थिति बहुत विकट है। परिवार के सदस्यों को खोने से लेकर बेघर होने और भोजन एवं साफ पानी की कमी तक इस आपदा ने हर एक बच्चे को प्रभावित किया है।”

बचावकर्मियों ने गुरुवार को ढही इमारतों के नीचे से और लोगों को जिंदा निकाला,जिनके बचने की उम्मीद लगभग खत्म हो गई थी। सोमवार को आया भूकंप एक दशक से भी अधिक समय में दुनिया भर में आए सबसे घातक भूकंपों में से एक है। इसकी विभीषिका बढ़ती ही जा रही है।

तुर्की और सीरिया में मौत के आंकड़ों ने जापान के फुकुशिमा में 2011 में आए भूकंप से मरने वालों की संख्या को पार कर लिया है। उस भूकंप से सूनामी आई थी, जिसमें 18,400 से अधिक लोग मारे गए थे। 2015 में नेपाल में भी 7.8 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें 8,800 से अधिक लोग मारे गए थे। (एएमएपी)

रामलला को भक्‍तों ने भेजे कई उपहार, गुजरात से नगाड़ा तो कन्नौज से स्पेशल इत्र पहुंचा अयोध्‍या

22 जनवरी को अयोध्या में नव निर्मित भव्य राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होनी है। इसकी तैयारियां जोरों पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद उस दिन समारोह में शामिल होंगे। इस समारोह को लेकर देश से लेकर विदेशों में भी धूम है। भक्त अपने आराध्य राम के लिए उपहार और भेंट भेज रहे हैं। नेपाल से 1100 उपहार अयोध्या भेजे गए हैं। इसी तरह गुजरात से 500 किलो का नगाड़ा आया है। कन्नौज से  गुलाब जल, केवड़ा, पंचजल समेत कई तरह के इत्र पहुंच गए हैं। चलिए जानते हैं अयोध्या पहुंचे उपहारों के बारे में…

नेपाल से 1100 उपहार भेजे गए अयोध्या

माता जानकी के मायके नेपाल से भी 1100 उपहार भेजे अयोध्या भेजे गए हैं। मान्यता है कि शुभ मौके पर बेटी के घर उपहार भेजे जाते हैं। इसी के चलते नेपाल से 1100 उपहार अयोध्या पहुंच चुके हैं। इन उपहारों में माता जानकी के जेवर, चांदी की चरण पादुकाएं और पकवान आदि शामिल है। नेपाल में राम मंदिर के आयोजन को लेकर खास उत्साह है। इसके अलावा देश के विभिन्न हिस्सों से अलग-अलग उपहार पहुंचने का सिलसिला जारी है।

गुजरात से भेजी गई 108 फीट लंबी अगरबत्ती

गुजरात से 108 फीट लंबी अगरबत्ती भेजी गई है। ये अगरबत्ती वडोदरा में छह महीने में तैयार की गई है और इसका वजन 3,610 किलोग्राम है। लगभग 3।5 फीट चौड़ी है। लखनऊ के सब्जी विक्रेता ने अनूठा घड़ी डिजाइन करवाई है और अयोध्या भेजी है। ये घड़ी एक ही समय में आठ देशों का समय बताती है। मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान 200 किलोग्राम लड्डू अयोध्या भेजने की तैयारी कर रहा है। तिरुपति में श्री वेंकटेश्वर मंदिर ने भी घोषणा की है कि वो भक्तों को वितरण के लिए एक लाख लड्डू भेजेगा।

सोने-चांदी की परत से तैयार नगाड़ा पहुंचा अयोध्‍या

इसी तरह, गुजरात से 500 किलोग्राम वजन का एक ‘नगाड़ा’ (ड्रम) विशेष रथ में अयोध्या पहुंच गया है। गुरुवार को राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बताया कि गुजरात के कर्णावती के दरियापुर विस्तार में डबगर समुदाय ने ‘नगाड़ा’ बनाया है। प्राण-प्रतिष्ठा वाले दिन डगबर समाज के चार लोग नगाड़े को मंदिर के अंदर बजाएंगे। इस नगाड़े पर सोने और चांदी की परत चढ़ाई गई है। इसे तैयार करने में लोहे और तांबे का इस्तेमाल हुआ है। इसके हजारों वर्षों तक चलने की उम्मीद है।

लोहे और तांबे की प्लेटों से तैयार किया नगाड़ा

ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि ड्रम को राम मंदिर परिसर में रखा जाएगा। ड्रम को यहां लाने वाले समूह के सदस्य चिराग पटेल ने कहा, इसे सोने और चांदी की परतों से सजाया गया है। ड्रम का स्ट्रक्चर लोहे और तांबे की प्लेटों से तैयार किया है। इसके अलावा, एटा से 2400 किलो का एक घंटा अयोध्या पहुंचा है। इस घंटे की आवाज 10 किलोमीटर तक जाएगी। 51 किलोग्राम वजन वाली सात और घंटियां भी मंदिर के लिए ट्रस्ट को भेंट की गईं हैं।

कन्नौज से आया स्पेशल इत्र

अपने सुगंध उद्योग के लिए प्रसिद्ध यूपी के कन्नौज से कुछ कारोबारियों ने राम लला के लिए विशेष इत्र तैयार करवाए हैं। ये इत्र अयोध्या पहुंच गए हैं। इत्र को रथ के जरिए अयोध्या भेजा गया। गुलाब से गुलाब जल तैयार किया गया है जिसका उपयोग रामलला को स्नान कराने में किया जाएगा। उसके बाद भगवान के चारों ओर सुगंधित वातावरण बनाने के लिए कन्नौज के प्रसिद्ध इत्र ‘अतर मिट्टी’, ‘अत्तर मोतिया’, ‘रूह गुलाब’, चंदन का तेल और मेंहदी का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा सर्दी को ध्यान में रखते हुए कन्नौज के इत्र निर्माताओं ने रामलला के लिए ‘अत्तर शमामा’ भी तैयार किया है जो ठंड से बचाने में मदद करता है। इस विशेष इत्र को बनाने में जड़ी-बूटियों के मिश्रण का भी इस्तेमाल किया गया है।

विहिप नेता भेंट करेंगे वाद्य यंत्र

अयोध्या के कारसेवकपुरम में आदित्य मित्तल, मनोज, रिशांक, प्रशांत मित्तल और करीब 500 भक्तों ने ट्रस्ट के सचिव चंपत राय को घंटियां सौंपीं। गुजरात विश्व हिंदू परिषद के नेता अशोक रावल ने मंदिर ट्रस्ट को एक पत्र भेजा है और म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट स्वीकार करने का अनुरोध किया है।(एएमएपी)

चलो अब उठ लिया जाए तमाशा खत्म होता है

स्मरण: मुनव्वर राना (26 नवम्बर 1952 – 14 जनवरी 2024)

डॉ. ओम निश्चल।

‘तो अब इस गांव से रिश्ता हमारा खत्म होता है,
फिर आंखें खोल ली जाएं कि सपना खत्म होता है।
बहुत दिन रह लिए दुनिया के सर्कस में तुम ऐ राना,
चलो अब उठ लिया जाए तमाशा खत्म होता है।’

लंबे अरसे से बीमार चल रहे जाने-माने शायर मुनव्वर राणा साहब इस दुनिया मे नहीं रहे। इन दिनों वे डायलिसिस पर थे और कुछ अन्य परेशानियां भी थीं जो उन्हें हमसे छीन कर ले गईं। उनसे आखिरी मुलाकात 10 दिसंबर 2023 को हुई थी। लखनऊ पुस्तक मेले के सिलसिले में लखनऊ जाना हुआ तो फुर्सत के कुछ पल निकाल कर उनसे मिलने हम ढींगरा अपार्टमेंट पहुंचे थे। उस दिन शायद वह डायलिसिस का दिन नहीं था तो थोड़ी राहत थी। उनके साथ बैठे। बातें कीं। उनकी शायरी की किताब `गजल में आप बीती` की प्रतियां भेंट की। कुछ कॉपीज पर उनके सिग्नेचर लिए उनके पाठकों के लिए और बीच-बीच में उनके किस्से, उनके संस्मरण और अशआर भी सुनते रहे। ऐसा लग रहा था कि पता नहीं फिर मुलाकात हो न हो, इसलिए हम बड़े चाव से उनकी बातें सुन रहे थे।

इस गुफ्तगू में कभी नासिर काजमी, कभी वाली आसी उनके परिवार की बातें, भारत भूषण पंत, इंदु प्रभात श्रीवास्तव आदि लोगों के बारे में वह रह रह कर बताते जाते थे। उर्दू शायरी क्या है। उसकी क्या विशेषता है और जहां-जहां से उन्हे चीजें याद आ रही थीं, वे उन्हें खोल कर रख देना चाहते थे।

उन्होंने हमारे मित्र डॉ आनंदवर्धन द्विवेदी, केशव मोहन पांडे और मेरे लिए और अपने लिए भी बेहतरीन चाय बनवाई और बीच-बीच में चुस्कियां लेते रहे और गुफ्तगू करते रहे। अब ऐसे लम्हे उनके साथ संभव नहीं कि हम फिर लखनऊ जाएं, उनके साथ बैठें , गुफ्तगू करें और चाय पीकर लौटें।

इसी दौरान एक शेर उन्होंने सुनाया जिसे सुनकर आंखें नम हो आयीं:

‘एक बार फिर से मिट्टी की सूरत करो मुझे/ इज्जत के साथ दुनिया से रुखसत करो मुझे। तुमने तो खुद कहानी को रंगीन कर दिया/ पानी ने कब कहा था कि शरबत करो मुझे!’

और सचमुच वे इस दुनिया से रुखसत हो चुके हैं अपनी यादें अपने संस्मरण अपने अंदाज ए बयां अपनी शायरी को यही अजर अमर छोड़कर।

इससे पूर्व जागरण संवादी के दौरान लखनऊ जाने पर भी उनसे मिला था। पर पता न था कि वे इतनी जल्दी आंखों से ओझल हो जाएंगे और हम अब उनसे कभी न मिल पाएंगे।

राणा साहब से एक लंबे अरसे से मिलना जुलना होता रहा है। जब पटना में तैनात था तो उनसे तब मुलाकात हुई थी जब उनका संग्रह `मुहाजिरनामा’ आने वाला था। उस पर आधारित एक लंबी बातचीत भी हमने दैनिक जागरण के लिए की थी। इससे पूर्व वाणी प्रकाशन से आए उनके कई संग्रहों पर इंडिया टुडे में एक साथ आलेख लिखा था तथा बाद में `मौसम के फूल` और `मुहाजिरनामा` पर भी क्रमशः इंडिया टुडे और शुक्रवार में रिव्यू लिखी थी। `मीर आ के लौट गया` उनकी बेहतरीन आत्मकथा की पुस्तक थी जिस पर हिंदुस्तान में लिखा और बाद में एक लंबी समीक्षा गंभीर समाचार में भी।

मेरा जब-जब लखनऊ जाना होता ,उनसे बिना मिले नहीं आता था । इस बार गत दो महीने में तीन बार जाना हुआ जिसमें से एक बार इसलिए नहीं मिल पाए कि वह डायलिसिस के लिए हॉस्पिटल के बिस्तर पर लेटे हुए थे। सोचा अब घर लौटेंगे तो कितना थके हुए होंगे। अगली बार मिलते हैं।

इस बार भी मिल के आए तो मन में यही अहसास था पता नहीं अब फिर मुलाकात हो न हो। `गजल में आपबीती` का नया संस्करण उन्होंने हाथो में उठाया, फोटो खिंचाई। बातें करते रहे। उम्दा चाय बनवा कर पिलवाई। हम फिर मिलने का वादा कर विदा हुए।

उनके घर से लौटते हुए यही लग रहा था कि गए एक दशक से उन्हें घुटने की बीमारी ने परेशान कर रखा था। फिर बीच में किडनी की समस्या भी आन पड़ी। अब हफ्ते में तीन-तीन दिन डायलिसिस, जिसमें शरीर लगातार निचुड रहा था। फिर भी वे बहुत जिंदादिल थे कि उन्होंने अंत तक हार नहीं मानी।  लेकिन जिस तरह वह कमजोर होते जा रहे थे उससे लगता था कि पता नहीं वह कैसे संभाल पाएंगे इस बीमारी को। हाल ही में पढ़ा राशिद अनवर `राशिद` का ताजातरीन शेर मेरे जेहन में घूम रहा था: ‘तो यह हुआ कि हवाओं की जद में आ ही गया/ संभलता कैसे कि कमजोर हो गया था दरख़्त।’ आज एक बड़ा दरख़्त नहीं रहा।

(लेखक सुपरिचित साहित्यकार एवं कवि हैं)

शनिदेव 6 मार्च को कुंभ में करेंगे प्रवेश, इन राशि के जातकों का चमकेगा भाग्‍य

शनि उदय 6 मार्च 2023 को 23:36 बजे कुंभ राशि में होगा। ऐसे में शनि के अस्त होने से लोगों को जो परेशानी हो रही थी वो खत्म हो जाएगी। शनि की दो राशियों मकर और कुंभ का स्वामी है। यह राशिचक्र में सबसे धीमी गति से चलने वाला ग्रह है। यह एक राशि में ढाई वर्ष तक रहता है। शनि को दृष्टिकोण, तर्क, अनुशासन, कानून और व्यवस्था, धैर्य, देरी, कड़ी मेहनत, श्रम और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना गया है। जानें शनि उदय से किन राशियों को होगा लाभ-मेष राशि- मेष राशि के जातकों के लिए शनि दसवें और ग्यारहवें भाव का स्वामी है। और अब यह अपनी ही राशि कुंभ राशि में आय, आर्थिक लाभ और इच्छा के एकादश भाव में अस्त होकर निकल रहा है। ऐसे में मेष राशि के जातकों, कुंभ राशि में शनि उदय के दौरान आपके पेशेवर जीवन में कुछ छिपे हुए शत्रुओं या अनिश्चितताओं के कारण जो समस्याएं आ रही थीं, वे समाप्त हो जाएंगी। मेष राशि के जातकों की आर्थिक स्थिति में भी वृद्धि होगी और उन्हें अपने वित्तीय लाभ, या पदोन्नति और वेतन वृद्धि की प्रतीक्षा में आ रही समस्या का अंत होगा। जो लोग अपने करियर की शुरुआत करना चाहते हैं उन्हें एक अच्छा अवसर मिलेगा। मेष राशि के छात्रों के लिए भी अच्छा समय है जो पेशेवर नौकरी पाने की तैयारी कर रहे हैं।

वृषभ राशि- शनि नवम और दशम भाव का स्वामी है और यह वृषभ राशि के जातकों के लिए एक योग कारक ग्रह है। वृषभ राशि के जातकों, जैसे ही शनि का उदय कुम्भ राशि में होगा, आपका भाग्य फिर से आपका साथ देना शुरू कर देगा, आपके द्वारा सामना की जा रही घरेलू समस्याएं समाप्त हो जाएंगी और आपके पेशेवर जीवन के लिए एक बहुत ही फलदायी अवधि शुरू होगी। यह आपको प्रसिद्धि और स्थिति प्रदान करेगा। व्यापार में उन्नति होगी और इस अवधि में आपके मान-सम्मान में वृद्धि होगी। अगर आप अपने विकास के लिए जगह या कंपनी में कुछ बदलाव की तलाश कर रहे थे तो आप इसके बारे में अभी सोच सकते हैं।

तुला राशि- तुला राशि के जातकों के लिए शनि एक योगकारक ग्रह है जिसका चतुर्थ और पंचम भाव का स्वामी है। और अब शनि पंचम भाव में अस्त होकर निकल रहा है जो शिक्षा, प्रेम संबंध, संतान का प्रतिनिधित्व करता है। तुला राशि के जातकों के लिए शनि एक योग कारक ग्रह भी है इसलिए कुंभ राशि में शनि का उदय निश्चित रूप से तुला राशि के जातकों के लिए बहुत सारी खुशियां और शुभ परिणाम लेकर आएगा। आप अपने परिवार और बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम बिता पाएंगे और उनसे खुशी प्राप्त कर पाएंगे। तुला राशि की महिलाएं जो अपने परिवार को बढ़ाने और संतान पैदा करने की इच्छुक हैं लेकिन चिकित्सा कारणों या किसी अन्य समस्या के कारण सक्षम नहीं थीं, अब गर्भधारण की प्रबल संभावनाएं हैं। तुला राशि के जिन छात्रों को पढ़ाई में दिक्कत आ रही थी, उनकी सारी समस्या का समाधान होगा और वे अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे पाएंगे।(एएमएपी)