एसबीआई की रिपोर्ट : 2047 तक पांच गुना बढ़ेगी देश की प्रति व्यक्ति आय

वित्त वर्ष 47 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय डॉलर के संदर्भ में लगभग पांच गुना बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि देश के मध्यम आय वर्ग का आकार लगातार बढ़ रहा है। एसबीआई रिसर्च के अनुसार, देश की प्रति व्यक्ति आय वित्त वर्ष 2023 के $2,500 डॉलर (2 लाख रुपये) से बढ़कर वित्त वर्ष 2047 तक  $12,400 डॉलर (14.9 लाख रुपये) होने की उम्मीद है। एसबीआई रिसर्च ने एक नोट में कहा कि यह वृद्धि “ग्रेट इंडियन मिडिल इनकम क्लास” से प्रेरित होगा, जिसमें 2047 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष तक 25% करदाताओं के निम्नतम आय वर्ग से मध्यम और उच्च आय वर्ग में जाने की उम्मीद है।

कामगारों की संख्या 53 करोड़ से बढ़कर 72.5 करोड़ होने का अनुमान

नोट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 47 तक आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या 588 प्रतिशत बढ़कर 48.2 करोड़ होने की उम्मीद है, जिससे कर योग्य आधार वाले कार्यबल में इसकी हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2023 के 22.4% प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 47 में 85.3% प्रतिशत हो जाएगी। वित्त वर्ष 47 में कामगारों की संख्या 53 करोड़ से बढ़कर 72.5 करोड़ होने का अनुमान है।

एसबीआई रिसर्च के अनुसार मध्यम वर्ग की भारित औसत आय आकलन वर्ष 2014 (वित्त वर्ष 2013) की तुलना में 4.4 लाख रुपये से बढ़कर 13 लाख रुपये हो गई है। एसबीआई ने कहा कि 2047 में यह बढ़कर 49.7 लाख रुपये होने की उम्मीद है। यह  विशेष रूप से करदाताओं की संख्या में वृद्धि के कारण संभव होगा क्योंकि अधिक करदाता निम्न आय वर्ग से ऊपर की ओर जा रहे हैं।

64 फीसदी आबादी अब भी 5 लाख रुपये तक की आय वर्ग में

आकलन वर्ष 23 (वित्त वर्ष 2022) में 6.85 करोड़ लोगों ने आयकर रिटर्न दाखिल किया, जिसमें 64 फीसदी आबादी अब भी 5 लाख रुपये तक की आय वर्ग में है, जबकि आकलन वर्ष 2012 में यह आंकड़ा 84 फीसदी था। वित्त वर्ष 47 तक 25 फीसदी आयकर रिटर्न भरने वालों के सबसे कम आय वर्ग छोड़ने की उम्मीद है, जबकि आकलन वर्ष 2012 से 2023 की अवधि में 13.6% फीसदी लोगों ने नौकरी छोड़ी है।(एएमएपी)

बिना वसुंधरा के राजस्‍थान भाजपा के लिए आसान नहीं

राजे को उम्मीदवारों के चयन की मिल सकती है जिम्‍मेदारी।

राजस्थान में भाजपा सत्तारूढ़ कांग्रेस के खिलाफ सत्ता विरोधी माहौल को तो भुनाने में जुटी है, साथ ही वह अपनी राज्य की सबसे बड़ी नेता वसुंधरा राजे को भी साध कर चलेगी। राज्य में अभी तक के चुनाव अभियान संबंधी महत्वपूर्ण फैसलों में पार्टी ने सामूहिक नेतृत्व पर जोर दिया है, लेकिन अब उम्मीदवारों के चयन में राजे को खासी अहमियत मिलने की संभावना है। पार्टी सबसे पहले हारी हुई सीटों के लिए उम्मीदवार तय करेगी।

कांग्रेस का अतर्कलह भाजपा के लिए अवसर

राजस्थान में भाजपा के लिए अन्य राज्यों के मुकाबले ज्यादा अनुकूल स्थितियां हैं। बीचे पांच साल में कांग्रेस अपने अंतर्कलह से जूझती रही है और एक बार तो सरकार गिरने की नौबत तक आ गई थी। इसके अलावा राज्य में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिससे कांग्रेस सरकार की छवि काफी प्रभावित हुई है। वैसे भी राज्य में बीते दो दशकों से हर पांच साल में सरकार बदलती रही है।

नेतृत्व को लेकर उहापोह की स्थिति

हालांकि भाजपा के लिए राज्य में सबसे बड़ी समस्या नेतृत्व को लेकर है। राज्य में सबसे बड़ी और प्रभावी नेता होने के बावजूद वसुंधरा राजे को केंद्रीय नेतृत्व ने चुनावी कमान नहीं सौंपी है। अंदरूनी तौर पर पार्टी में खेमेबाजी बार बार उभर कर सामने आती रही है। अभी भी विभिन्न चुनावी समितियों में वसुंधरा राजे को शामिल नहीं किया गया है और भावी परिवर्तन यात्राओं में भी कमान उनको नहीं दी गई है। केंद्रीय नेतृत्व खुद इन यात्राओं को हरी झंडी दिखा रहा है। इससे राज्य में पार्टी कार्यकर्ताओं में उहापोह की स्थिति है।

वसुंधरा राजे की हर क्षेत्र तक पहुंच

हालांकि पार्टी सूत्रों का कहना है कि चुनाव में वसुंधरा राजे को पूरी तरह और खासकर उम्मीदवारों के चयन में दरकिनार कर पाना संभव नहीं है। राज्य में केवल वसुंधरा राजे ही ऐसी नेता है जिनको हर क्षेत्र की नब्ज पता है और उन क्षेत्रों तक पहुंच भी है। पार्टी राज्य में सबसे पहले हारी हुई सीटों के लिए उम्मीदवार तय करेगी। ऐसी लगभग सवा सौ सीटों में पहले लगभग पचास सीटों की घोषणा हो सकती है। इनमें लगभग आधे राजे के करीबी पुराने और वरिष्ठ नेताओं को जगह दी जा सकती है। सूत्रों के अनुसार पार्टी को इस बात की भी आशंका है कि वसुंधरा राजे की पंसद के टिकट न देने पर कांग्रेस को लाभ मिल सकता है।

जीती हुई सीटों पर पेंच

राज्य में असली पेंच जीती हुई सीटों को लेकर रहेगा। इन सीटों पर विधायकों के टिकट काटना मुश्किल होगा। हालांकि विभिन्न एजेंसियों के जो आकलन आए हैं उनमें लगभग आधे विधायकों का रिपोर्ट कार्ड खराब हैं। कुछ सांसदों को भी चुनाव मैदान में उतारने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, किसी बड़े केंद्रीय नेता को चुनाव नही लड़ाया जाएगा। (एएमएपी)

विश्‍वकप 2023 के लिए टीम इंडिया का ऐलान, रोहित शर्मा के हाथ में बागडोर

विश्व कप 2023 के लिए भारतीय क्रिकेट टीम का ऐलान हो गया है। रोहित शर्मा की कप्तानी में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के चयनकर्ताओं ने 15 सदस्यीय टीम का चयन किया है। इसमें आठ खिलाड़ी ऐसे हैं, जिनके पास विश्व कप में पहले से खेलने का अनुभव है। वहीं, सात क्रिकेटर पहली बार इस बड़े टूर्नामेंट का हिस्सा होंगे। भारत में पांच अक्‍टूबर से 19 नवंबर तक यह टूर्नामेंट खेला जाएगा। टीम इंडिया अपना पहला मुकाबला चेन्नई में आठ अक्तूबर को ऑस्ट्रेलिया से खेलेगी।

पहली बार विश्‍व कप में टीम की कमान संभालेंगे रोहित शर्मा

टीम में विराट कोहली सबसे अनुभवी खिलाड़ी हैं। उनके पास तीन विश्व कप में खेलने का अनुभव है। वहीं, रोहित शर्मा, रवींद्र जडेजा और मोहम्मद शमी ने दो-दो बार वनडे क्रिकेट के इस सबसे बड़े आयोजन में हिस्सा लिया है। 2019 और 2023 के बीच भारतीय टीम में काफी बदलाव हो चुके हैं। पिछली बार टीम की कप्तानी करने वाले विराट कोहली इस बार बतौर खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। रोहित शर्मा के हाथ में बागडोर है। वह पहली बार विश्व कप में टीम की कमान संभालेंगे। चार साल में सिर्फ कप्तान ही नहीं बदले बल्कि कोच भी अब नए हैं। पिछली बार पूर्व क्रिकेटर रवि शास्त्री टीम के कोच थे। इस बार पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ के कंधे पर यह जिम्मेदारी है। संयोग कि बात है कि उनकी कप्तानी में भारत 2007 विश्व कप खेला था। हालांकि, वह टूर्नामेंट उनके लिए यादगार नहीं रहा। भारत पहले ही दौर में बाहर हो गया था।

ये खिलाड़ी पहली बार विश्व कप में खेलेंगे

15 सदस्यीय टीम में चुने गए सात खिलाड़ी पहली बार इस टूर्नामेंट में खेलेंगे। युवा ओपनर शुभमन गिल के साथ श्रेयस अय्यर, सूर्यकुमार यादव, विकेटकीपर ईशान किशन, ऑलराउंडर अक्षर पटेल और शार्दुल ठाकुर के अलावा तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज भी पहली बार विश्व कप में खेलेंगे।

आइए जानते हैं किस खिलाड़ी के पास कितना अनुभव हैं 

रोहित शर्मा
आईपीएल के सबसे सफल कप्तानों में एक रोहित शर्मा की असली परीक्षा विश्व कप में होनी है। वह पहली बार इस बड़े टूर्नामेंट में टीम की कमान संभालेंगे। रोहित 2015 और 2019 विश्व कप में खेल चुके हैं। उन्होंने पिछली बार टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा 648 रन बनाए थे। उनके बल्ले से रिकॉर्ड पांच शतक भी निकले थे।

विराट कोहली
भारतीय टीम में विश्व कप के लिए चुने गए खिलाड़ियों में सबसे ज्यादा अनुभव विराट कोहली के पास ही है। वह 2011, 2015 और 2019 के संस्करण में खेल चुके हैं। कोहली टीम में इकलौते ऐसे खिलाड़ी हैं जिनके खाते में एक विश्व कप भी है। वह 2011 में विश्व कप जीतने वाली टीम के सदस्य थे। कोहली ने तीन विश्व कप के 26 मैचों में 1030 रन बनाए हैं।

केएल राहुल
राहुल दूसरी बार विश्व कप में हिस्सा लेंगे। वह 2019 में बतौर बल्लेबाज खेले थे, लेकिन इस बार विकेटकीपर के रूप में टीम में शामिल किए गए हैं। ऋषभ पंत की अनुपस्थिति में उनके ऊपर विकेटकीपिंग की अतिरिक्त जिम्मेदारी होगी। राहुल का रिकॉर्ड विश्व कप में बतौर बल्लेबाज अच्छा है। उन्होंने नौ मैचों में 45.12 की औसत से 361 रन बनाए। अब देखना है कि वह विकेटकीपर और बल्लेबाज की दोहरी भूमिका के साथ किस तरह न्याय करते हैं।

हार्दिक पांड्या
भारत के अनुभवी ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या पर इस बार सबकी नजरें रहेंगी। वह न सिर्फ टीम के महत्वपूर्ण ऑलराउंडर हैं, बल्कि उपकप्तान भी हैं। टीम के कई फैसलों में उनके विचार लिए जाएंगे। इसका असर मैच पर दिख सकता है। हार्दिक लगातार दूसरा विश्व कप खेलेंगे। वह पहले से ज्यादा अनुभवी हैं। उन्होंने पिछली बार विश्व कप में 226 रन बनाने के साथ-साथ 10 विकेट भी हासिल किए थे।

रवींद्र जडेजा
भारतीय टीम में शामिल उन चार खिलाड़ियों में जडेजा शामिल हैं, जिनके पास दो या उससे अधिक विश्व कप खेलने का अनुभव है। वह महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में 2015 और विराट कोहली की कप्तानी में 2019 विश्व कप में खेले थे। अब रोहित शर्मा की कप्तानी में अपना तीसरा विश्व कप खेलेंगे। जडेजा ने दो विश्व कप के 10 मैच में सिर्फ 134 रन बनाए हैं। गेंदबाजी में उन्हें उम्मीद के अनुसार सफलता नहीं मिली है। जडेजा के खाते में सिर्फ 11 विकेट है। वह इस बार टूर्नामेंट में अपनी छाप छोड़ना चाहेंगे।

मोहम्मद शमी
भारतीय टीम में शामिल तेज गेंदबाजों में सबसे ज्यादा अनुभव किसी के पास है तो वह मोहम्मद शमी हैं। वह दो विश्व कप खेल चुके हैं। शमी 2015 और 2019 में टीम के सदस्य थे। उनकी गेंदबाजी भी इस टूर्नामेंट शानदार रही है। शमी ने 11 मैच में 31 विकेट झटके हैं और वह एक बार फिर से कमाल दिखाना चाहेंगे।

जसप्रीत बुमराह
टीम के स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह लंबे समय तक चोट के कारण नहीं खेल पाए हैं। उन्होंने आयरलैंड सीरीज से वापसी की और अब वह विश्व कप में खेलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। बुमराह लगातार दूसरा विश्व कप खेलेंगे। पिछली बार नौ मैच में उन्होंने 18 विकेट लिए थे। वह इस बार भी प्रभाव छोड़ना चाहेंगे।

कुलदीप यादव
विश्व कप के लिए चुनी गई टीम में कुलदीप यादव इकलौते विशेषज्ञ स्पिनर हैं। जडेजा और अक्षर पटेल को बतौर ऑलराउंडर चुना गया है। अगर अक्षर बल्लेबाजी करने में सक्षम नहीं होते तो उनके स्थान पर युजवेंद्र चहल खेल सकते थे। कुलदीप की बात करें तो उनका यह दूसरा विश्व कप होगा। 2019 में उन्हें सात मैचों में खेलने का मौका मिला था और वह सिर्फ छह विकेट ही ले पाए थे। इस बार घरेलू मैदान पर कुलदीप अपने रिकॉर्ड में सुधार करना चाहेंगे।(एएमएपी)

2026 में जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा अमेरिका

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अमेरिका ने 2026 में जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने की पुष्टि की है। उसने कहा कि ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था जलवायु संकट और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी कई समस्याओं से जूझ रही है भारत की अध्यक्षता में हुए इस साल के नई दिल्ली शिखर सम्मेलन ने यह साबित कर दिया कि अभी भी जी-20 सबसे गंभीर मामलों का हल निकाल सकता है। 2026 में यह सम्मेलन राजधानी वाशिंगटन में होगा। मीडिया रिपोर्ट्स में व्हाइट हाउस के हवाले से शनिवार को जारी उसके बयान के आधार पर यह जानकारी दी गई है।

माडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक व्हाइट हाउस ने कहा कि भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन सबसे गंभीर मुद्दों का हल निकालने की दिशा में एक बड़ा कदम है। व्हाइट हाउस का यह बयान दिल्ली की घोषणा के तुरंत बाद आया है। व्हाइट हाउस ने कहा है कि अमेरिका भारत की जी-20 अध्यक्षता में हुई प्रगति को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसकी शुरुआत 2024 में ब्राजील और 2025 में दक्षिण अफ्रीका की प्रेसीडेंसी से होगी।

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अमेरिका ने अफ्रीकी यूनियन के जी-20 के स्थायी सदस्य के रूप में शामिल होने पर स्वागत किया। वैश्विक अर्थव्यवस्था में अफ्रीका की महत्वपूर्ण भूमिका है। उल्लेखनीय है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को अफ्रीकी यूनियन के जी-20 के 21वें सदस्य के रूप में शामिल होने की घोषणा की थी।(एएमएपी)

जब राजकुमार पर भारी पड़े रामानंद सागर

(बॉलीवुड के अनकहे किस्से)
अजय कुमार शर्मा ।

रामानंद सागर को आज की पीढ़ी जन-जन में लोकप्रिय धारावाहिक रामायण के निर्माता निर्देशक एवं लेखक के रूप में जानती है। कम ही लोगों को ही ज्ञात होगा कि उन्होंने अपना करियर लाहौर में एक पत्रकार के रूप में शुरू किया और फिल्म लेखक, संवाद लेखन के बाद निर्माता-निर्देशक बने और अपने बैनर सागर फिल्म्स द्वारा निर्देशित घूंघट, जिंदगी,आरजू, आंखें, गीत और ललकार जैसी सुपरहिट फिल्में हिंदी सिनेमा को दी। अपने शुरुआती दिनों में वे विभाजन के दौरान लाहौर से श्रीनगर और वहां से दिल्ली पहुंचे थे। दिल्ली में 13 सदस्यों का यह पूरा परिवार बिरला मंदिर के शरणार्थी कैंप में ठहरा था।
यहां वे सबसे पहले कनॉट प्लेस स्थित डेली मिलाप के ऑफिस गए, क्योंकि लाहौर में वे इसी अखबार के लिए काम किया करते थे। वहां के संपादक ने उन्हें मौलाना अबुल कलाम से मिलाया और उनके सहयोग से जहां उन्हें दरियागंज में दो मकान आवंटित हुए । वहीं ऑल इंडिया रेडियो में लेखक के रूप में नौकरी भी मिल गई। लेकिन रेडियो में तमाम बंदिशों के कारण यह नौकरी उन्हें रास नहीं आ रही थी और एक दिन वह नौकरी छोड़ कर अपनी किस्मत आजमाने बंबई (अब मुंबई) के लिए निकल पड़े। वहां वे माहिम में संघर्ष कर रहे दो अन्य युवा कलाकारों देवानंद और संगीतकार मदन मोहन के साथ ठहरे।

एक दिन यहां वे पूर्व परिचित पृथ्वीराज कपूर से मिले जिन्होंने तुरंत ही उन्हें नाटक लिखने के लिए एडवांस के तौर पर सौ रुपये दे दिए। उन्होंने उनके लिए कलाकार और गौरा नाम के दो नाटक लिखकर दिए। फिर पृथ्वीराज कपूर के कहने पर राजकपूर ने उनसे बरसात फिल्म लिखवाई और इतिहास बन गया। वे सबसे लोकप्रिय और सफल फिल्म लेखक बन गए । दक्षिण की प्रसिद्ध फिल्म निर्माण कंपनी जैमिनी ने अपनी हिंदी फिल्म उनसे लिखाना शुरू किया। यहीं की फिल्म पैगाम की कहानी और संवाद रामानंद सागर ने ही लिखे थे जिसमें राजकुमार और दिलीप कुमार की एक महत्वपूर्ण भूमिका थी ।

दोनों उस फिल्म में भाई थे। ‘पैगाम’ के निर्माण के दौरान यह दोनों ही स्टार अभिनेता हमेशा अपने अपने संवादों को लेकर बेहद सजग रहते थे जिसके चलते अनेक बार दोनों के अहं में टकराव हो जाता था। इसी का एक रोचक किस्सा सागर साहब के पुत्र आनंद सागर ने उन पर लिखी किताब में साझा किया है। रामानंद सागर ने फिल्म ‘संगदिल’ से ‘इंसानियत’ तक दिलीप कुमार के साथ काम किया था। दोनों में एक-दूसरे की कला के प्रति आदर का भाव था। यह बात प्रसिद्ध थी कि यदि फिल्म की मुख्य भूमिका में दिलीप कुमार और संवाद लेखक रामानंद सागर होते थे और यदि किसी दृश्य के संवाद में परिवर्तन किया जाता था तो दिलीप कुमार किसी भी हालत में तब तक शॉट नहीं देते थे, जब तक रामानंद सागर को सेट पर बुलाकर उनसे उनकी सहमति न ले ली जाती।

राजकुमार यह बात जानते थे। एक दिन जैमिनी स्टूडियो में सेट पर दो भाइयों के बीच अत्यधिक नाटकीय अहं के टकराव के दृश्य के लिए राजकुमार ने कहा- “जानी, इस सीन के संवाद मेरे जोशीले चरित्र के अनुरूप नहीं हैं। इसमें मेरे छोटे मृदुभाषी भाई दिलीप कुमार के संवादों की तुलना में और अधिक नाटकीयता लेकर आओ। सेट पर सन्नाटा छा गया। रामानंद सागर से इस प्रकार की रौबदार भाषा में कोई भी कभी नहीं बोला था। रामानंद सागर और दिलीप कुमार ने एक-दूसरे को देखा। रामानंद सागर ने लाइट्स बंद करने के लिए कहा और अपने सहायक को बुलाकर इतने जोर से कहा कि सब सुन सकें, राज से कहो कि फिल्म का चरित्र अभिनेता से अधिक महत्वपूर्ण है, मैं चाहूं तो भी मैं यह संवाद बदल नहीं सकता। ऐसा करने से दो भाइयों के बीच आदर्शवादी टकराव का दर्शन फीका पड़ जाएगा; विषय-वस्तु पर अभिनेता हावी हो जाएगा।

और निर्देशक एसएस वासन की कुर्सी पर बैठ गए। बहुत कम रोशनी थी, लगभग अंधेरा ही था, कोई कुछ नहीं बोला या फुसफुसाया समय चलता रहा। दोनों अभिनेता गहन शांति के साथ अपनी कुर्सियों पर बैठे थे। कई घंटे बीत गए। आखिर राजकुमार आहिस्ता से उठे, सबने उनकी प्रसिद्ध पदचाप सुनी, वे सागर जी के पास आए और बोले- क्या शॉट है, जानी ? और तनावपूर्ण वातावरण में शूटिंग फिर आरंभ हो गई।

चलते-चलते

रामानंद सागर को इस फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखन का फिल्मफेयर अवार्ड मिला। दिलीप कुमार और राजकुमार ने दोबारा एक साथ काम नहीं किया, जब तक कि एक व्यावसायिक ताने-बाने से बुनी फिल्म ‘सौदागर’ में सुभाष घई उन्हें साथ लेकर नहीं आए थे। रामानंद सागर के संघर्ष और दिन-रात के परिश्रम ने उन्हें जैमिनी स्टूडियो का अहम हिस्सा बना दिया । उन्होंने इसके मालिक एसएस वासन से बॉक्स ऑफिस पर सफलता का फॉर्मूला फिल्म शिल्प सीखा और बड़ी बहू, जान-पहचान, पूनम, शिन शिना बूबला बू, संगदिल, शगूफा, इल्जाम, दीदी, रुखसाना, इंसानियत, राज तिलक, घूंघट, जिंदगी जैसी फिल्मों के साथ नया इतिहास रचा।

(लेखक- राष्ट्रीय साहित्य संस्थान के सहायक संपादक हैं। वे साहित्य, संस्कृति और सिनेमा पर पैनी नजर रखते हैं।)

पीएम मोदी गुरुवार को मप्र में पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स और औद्योगिक परिसरों का करेंगे शिलान्यास

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कल यानि गुरुवार 14 सितंबर को मध्य प्रदेश के एक दिवसीय प्रवास पर सागर जिले के बीना आ रहे हैं। वे यहां बीपीसीएल रिफाइनरी के विस्तारीकरण एवं पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स निर्माण के भूमिपूजन के साथ ही विभिन्न औद्योगिक परिसरों का शिलान्यास करेंगे। बीना रिफाइनरी परिसर में आयोजित कार्यक्रम स्थल पर प्रधानमंत्री मोदी नर्मदापुरम के ऊर्जा एवं नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन प्रक्षेत्र, इंदौर के आईटी पार्क-3 और 4, रतलाम के मेगा इंडस्ट्रियल पार्क, तथा छह अन्य इंडस्ट्रियल पार्क क्रमशः नर्मदापुरम, गुना, शाजापुर, मऊगंज, आगर मालवा और मक्सी की शिलान्यास पट्टिका का रिमोट द्वारा अनावरण करेंगे।

ये रहेंगे कार्यक्रम में मौजूद

कार्यक्रम में केन्द्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित राज्य के मंत्रीगण लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव, नगरीय विकास मंत्री भूपेन्द्र सिंह, राजस्व एवं परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, सहकारिता एवं लोक प्रबंधन मंत्री डॉ. अरविंद सिंह भदौरिया, उद्योग नीति और निवेश प्रोत्साहन मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव, सांसद राजबहादुर सिंह, विधायकगण शैलेन्द्र जैन, प्रदीप लारिया एवं महेश राय भी उपस्थित रहेंगे।

दो लाख लोगों को मिलेगा रोजगार

उल्लेखनीय है कि बीना रिफाइनरी में 50 हजार करोड़ रुपये की लागत से पेट्रोकेमिकल काम्पलेक्स के बन जाने से 15 हजार को प्रत्यक्ष तथा दो लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। अभी बीपीसीएल बीना 7.8 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष (एमएमटीपीए) क्षमता की रिफाइनरी संचालित करता है। जो उत्तरी और मध्य भारत की बढ़ती ईंधन की मांगों को पूरा करने के लिए सक्षम है। देश की बेहतरीन रिफाइनरियों में से एक होने का गौरव प्राप्त बीपीसीएल बीना गुणवत्तापूर्ण उत्पाद प्रदान करने की अपेक्षाओं पर अब तक खरा उतरा है।

पांच साल में बनकर तैयार होगा पेट्रोकेमिकल काम्पलेक्स

अब 50 हजार करोड़ की लागत से जो पेट्रोकेमिकल काम्पलेक्स बनेगा, वह पांच साल की अवधि में बनकर तैयार होगा। इसके पूर्ण होने से बीपीसीएल बीना की क्षमता 7.8 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटीपीए) प्रतिवर्ष से बढ़कर 11 एमएमटीपीए हो जाएगी। बीना रिफाइनरी पेट्रोकेमिकल काम्पलेक्स की नवीन इकाई में उत्कृष्ट तकनीक वाले 1.2 एमएमटीपीए क्षमता के एथलीन क्रैकर काम्पलेक्स की स्थापना भी होगी। साथ ही डाउन स्ट्रीम पेट्रोकेमिकल संयंत्र भी स्थापित होगा।

बीना क्षेत्र में ड्रोन, पैराग्लाईडर, हॉट बैलून पर प्रतिबंध रहेगा

कलेक्टर दीपक आर्य ने 14 सितंबर को सागर जिले के बीपीसीएल बीना रिफायनरी सिक्यूरिटी कैम्पस क्षेत्र में प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम में कानून एवं सुरक्षा व्यवस्था के लिए दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के अंतर्गत ड्रोन, पैराग्लाईडर, हॉट बैलून, एवं अन्य फ्लाइंग ऑब्जेक्ट पर प्रतिबंध लगाया है। जिला दंडाधिकारी द्वारा कानून व्यवस्था एवं विशिष्ट अतिथियों की सुरक्षा को देखते हुए यह आदेश दिया गया है। उक्त आदेश बुधवार से प्रभावशील हो गया है, जो 14 सितंबर को शाम तक जारी रहेगा। धारा 144 के अंतर्गत इस क्षेत्र को रेड जोन-नो फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है।(एएमएपी)

राज्यों के गृह मंत्रियों के चिंतन शिविर में विचार-विमर्श करेंगे प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को राज्यों के गृह मंत्रियों के दो दिवसीय चिंतन शिविर को संबोधित करेंगे। यह शिविर हरियाणा के सूरजकुंड में आयोजित किया गया है।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने बुधवार को बताया कि प्रधानमंत्री मोदी 28 अक्टूबर को सुबह करीब साढ़े दस बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्यों के गृह मंत्रियों के चिंतन शिविर को संबोधित करेंगे। यह चिंतन शिविर 27 और 28 अक्टूबर को हरियाणा के सूरजकुंड में आयोजित किया गया है। इस चिंतन शिविर में विभिन्न राज्यों के गृह सचिव एवं पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) व केन्द्रीय पुलिस संगठनों (सीपीओ) के महानिदेशक भी शामिल होंगे।

गृह मंत्रियों का यह चिंतन शिविर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री के भाषण में घोषित पंच प्रण के अनुरूप आंतरिक सुरक्षा से संबंधित मामलों पर नीति निर्माण को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य प्रदान करने का एक प्रयास है। सहकारी संघवाद की भावना के अनुरूप यह शिविर, केन्द्र और राज्य स्तर पर विभिन्न हितधारकों के बीच योजना एवं समन्वय के मामले में अधिक तालमेल सुनिश्चित करेगा।

इस शिविर में पुलिस बलों के आधुनिकीकरण, साइबर अपराध प्रबंधन, आपराधिक न्याय प्रणाली में आईटी के बढ़ते उपयोग, भूमि सीमा प्रबंधन, तटीय सुरक्षा, महिला सुरक्षा, मादक पदार्थों की तस्करी जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।(एएमएपी)