अब हिंदी-अंग्रेजी में होगा काम
सरल शब्दों का किया जाना चाहिए प्रयोग

याचिका में दिल्ली पुलिस से प्राथमिकी दर्ज करते समय उर्दू / फारसी शब्दों के इस्तेमाल को चुनौती दी गयी थी। माननीय दिल्ली हाई कोर्ट ने दिनांक 07.08.2019 को उपरोक्त मामले में आदेश पारित करते हुए कहा कि प्राथमिकी शिकायतकर्ता के शब्दों में होनी चाहिए। इसके अलावा कहा गया कि बहुत ज्यादा जटिल भाषा या जिसका अर्थ शब्दकोशों की मदद से खोजा जाता है इन शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा कहा गया कि पुलिस अधिकारी बड़े पैमाने पर आम जनता के लिए काम कर रहे हैं और उन लोगों के लिए नहीं जो उर्दू, हिंदी या फारसी भाषाओं में डॉक्टरेट की पदवी धारक हैं। ऐसे में जहां तक संभव हो, प्राथमिकी में सरल शब्दों का प्रयोग किया जाना चाहिए।
उर्दू और फारसी शब्दों का होता रहा है इस्तेमाल
सर्कुलर के तहत ये निर्देश जारी किए गए हैं कि पुलिस कर्मी/अधिकारी दैनिकी(डेली डायरी) लिखते समय, सूची और आरोप-पत्र जैसी चीजें तैयार करते समय अधिक से अधिक सरल शब्दों का उपयोग करें, जिन्हें शिकायतकर्ता आसानी से समझ सकें। जानकारी के मुताबिक अंग्रेजों के जमाने से दिल्ली पुलिस की कामकाज में उर्दू/फारसी के शब्द का हिस्सा रहे हैं। आजादी के पहले से पुलिस व अदालती कामकाज में उर्दू और फारसी शब्दों का इस्तेमाल होता रहा है। 1947 से पहले अंग्रेजी शासन के दौरान पुलिस, अदालत और राजस्व महकमे में जो भी कामकाज होता था, उसमें हिंदी की बजाए उर्दू या फारसी के शब्दों का इस्तेमाल ज्यादा किया जाता था।(एएमएपी)


