सूत्रों ने बताया कि युद्धक समूहों में इंफेट्री, आर्टलरी तथा आर्मर्ड ब्रिगेड की यूनिटों को मिलाया गया है। इनमें मूलत पैदल सैनिक, तोप वाले दस्ते तथा शस्त्र वाहन दस्ते शामिल किए जा रहे हैं। समूह में सैनिकों की संख्या करीब चार हजार रखी गई है। अभी तक बटालियन के रूप में सेना की तैनाती होती थी जिसमें दस हजार से ज्यादा जवान होते थे। लेकिन एकीकृत युद्धक समूहों का आकार छोटा बनाया गया है। इन्हें 10-12 घंटे के भीतर बड़े से बड़े युद्ध के लिए तैयार कर लिया जाता है। जबकि बटालियन को तैयार करने में दो-दिन तक का समय लगता है।

जानकारी के अनुसार, माउंटेन स्ट्राइक कोर युद्धक समूहों के चलते चीन से लगती समूची एलएसी पर नजर रख रही है। यह सतर्कता इसलिए भी बढ़ाई गई क्योंकि चीन का नया सीमा कानून लागू होने के बाद एलएसी पर चीन की गतिविधियां तेज होने की आशंका व्यक्त की जा रही थी। इसलिए 09 दिसंबर को भी जब चीनी सैनिकों ने घुसपैठ की तो पहले से सतर्क भारतीय सेना ने उसका मुहतोड़ जवाब दिया।
सूत्रों के अनुसार युद्धक समूहों को वायुसेना के सपोर्ट से भी जोड़ने की तैयारी की जा रही है। थियेटर कमान बनने से यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इस बीच एलएसी पर भारत की तरफ से ड्रोन निगरानी भी शुरू की गई है। ड्रोन के जरिये चीन सेना की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। दूसरे, खुफिया तंत्र को भी मजबूत बनाया गया है।
चीन की तैयारियां
सूत्रों के अनुसार चीन की तरफ से एलएसी के निकट सैन्य ढांचा खड़ा किए जाने और सैनिकों की तैनाती में लगातार इजाफे की सूचनाएं मिली हैं। ऐसा उपग्रह की तस्वीरों के जरिये पता चल रहा है। भारतीय सेना उसी अनुरूप अपनी जवाबी तैयारी कर चुकी है। (एएमएपी)



