2021 में एसिड अटैक के 176 मामले सामने आए, लेकिन इनमें से मात्र 20 फीसदी मामलों में ही आरोपी पर दोष साबित हुआ। पिछले 6 सालों का रिकॉर्ड देखें तो औसतन 53 फीसदी मामलों में तेजाब फेंकने वाले पर दोष साबित ही नहीं हो और वो बरी हो गया।

पिछले साल पूरे देश में एसिड अटैक के सबसे ज्यादा मामले पश्चिम बंगाल में सामने आए। इसके बाद उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा और राजस्थान है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में भर में एसिड अटैक के 60 फीसदी मामले दर्ज ही नहीं कराए जाते।
दुनियाभर में 80 फीसदी एसिड अटैक महिलाओं पर हो रहे। ऐसे 76 फीसदी मामलों में आरोपी पीड़िता की जान-पहचान का ही होता है। इतना ही नहीं, कुछ मामले ऐसे भी सामने गाए हैं जब पति ने पत्नी पर तेजाब फेंका। भारत में एसिड अटैक के मामलों को लेकर कानून भी है। ऐसे मामलों में धारा 326A के मुताबिक, दोषी को 7 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। वहीं, अटैक की कोशिश करने वालों पर धारा 326B के तहत 5 से 7 साल तक की कैद और जुर्माना लगाया जा सकता है। कानून के बावजूद गाइडलाइन को नजरअंदाज करते हुए एसिड की हो रही खुलेआम बिक्री के कारण मामले नहीं थम रहे। (एएमएपी)



