इसका मतलब यह हुआ कि वह भारतीय उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप और मान्य होगा। सूत्रों ने कहा कि प्रत्येक अग्निवीर के कौशल विकास प्रमाण पत्र से लैस होने से उसके लिए चार साल बाद दूसरा करियर आरंभ करने का ठोस आधार होगा।

कई और विकल्प भी
अग्निवीरों में से 25 फीसदी के नियमित सैनिक बनने के आसार होंगे। शेष 75 फीसदी कौशल प्रमाण पत्र लेकर निकलेंगे लेकिन इसके अलावा उनके लिए कई और विकल्प भी होंगे। जैसे गृह, रेलवे, रक्षा, इस्पात, नागरिक उड्डयन, पोत, शिपिंग की विभिन्न रिक्तियों में उनके लिए 10 फीसदी तक पद आरक्षित होंगे। इसके अलावा यदि कोई अग्निवीर अपना रोजगार करना चाहेगा तो मध्यम और लघु उद्योग मंत्रालय उन्हें प्रशिक्षण प्रदान करेगा व मुद्रा योजना के तहत बैंक उन्हें कम ब्याज पर ऋण प्रदान करेंगे। यही तैयारियां वायुसेना और नौसेना में भी अग्निवीरों के दूसरे करियर के लिए आरंभ की जाएंगे।
अब तक 40 हजार भर्ती
अब तक सेना में 40 हजार अग्निवीरों की भर्ती हो चुकी है। वायुसेना और नौसेना में करीब आठ हजार अग्निवीर भर्ती किए गए हैं और उनका प्रशिक्षण आरंभ हो चुका है। सेना ने यह भी तय किया है कि अगले साल से मई और नवंबर में दो बार अग्निवीरों को सेना में शामिल किया जाएगा। भर्ती रैली से पूर्व अग्निवीरों को एक आनलाइन टेस्ट पास करना होगा। सेना ने अग्निवीरों के रिकॉर्ड रखने के लिए एक अलग से शाखा सेंट्रलाइज्ड अग्निवीर मैनेजमेंट ऑफिस (सीएएमओ) तैयार किया है।(एएमएपी)



