
कॉलेजियम ने सरकार से अपील की थी कि वह दिसंबर में भेजी गई सिफारिशों को इन ताजा सिफारिशों के साथ ना मिलाएं। पहले भेजी गई सिफारिशों को ऊपर रखें और पहले उनकी ही अधिसूचना जारी करें। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को आश्वस्त भी किया है कि कॉलेजियम द्वारा भेजे गए पांच जजों के नामों को जल्द मंजूरी दे दी जाएगी। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमानी ने जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एएस ओका की बेंच को बताया कि इन जजों की नियुक्ति का वारंट ऑफ अपॉइंटमेंट जल्द जारी हो जाएगा। गौरतलब है कि बेंच ने नामों की मंजूरी में हो रही देरी पर नाराजगी जाहिर की और पीठ ने कहा कि ‘यह बहुत, बहुत गंभीर मामला है। हमें कदम उठाने के लिए मजबूर ना करें क्योंकि उससे बहुत परेशानी होगी।’
कॉलेजियम की एक अन्य सिफारिश पर विवाद हो गया है। दरअसल कॉलेजियम ने मद्रास हाईकोर्ट की वकील लक्ष्मण चंद्र विक्टोरिया गौरी को मद्रास हाईकोर्ट में जज के रूप में नामित किया है। हालांकि बार काउंसिल में इसे लेकर विरोध शुरू हो गया है। बार काउंसिल के कुछ वकीलों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को पत्र लिखकर गौरी की पदोन्नति का विरोध किया है। बार काउंसिल का कहना है कि गौरी भाजपा से जुड़ी हुई हैं। पत्र में लिखा गया है कि इस तरह के नियुक्ति से न्यायपालिका की स्वतंत्रता कमजोर हो सकती है। (एएमएपी)



