केंद्र सरकार ने फार्मास्यूटिकल्स के लिए की है पीएलआई योजना शुरू
सरकार की आत्मनिर्भर पहल के तहत, फार्मास्यूटिकल्स विभाग ने 2021 में फार्मास्यूटिकल्स के लिए पीएलआई योजना शुरू की है। इस पीएलआई योजना के तहत वित्तीय परिव्यय छह साल की अवधि में 15,000 करोड़ रुपए है। योजना के तहत अब तक 55 आवेदकों का चयन किया गया है, जिनमें 20 सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) शामिल हैं। 2022-2023 का वित्तीय वर्ष पीएलआई योजना के लिए उत्पादन का पहला वर्ष है, डीओपी ने बजट परिव्यय के रूप में 690 करोड़ रुपए निर्धारित किए हैं।
उत्पादों की 3 अलग-अलग श्रेणियों को किया जाएगा सपोर्ट
उल्लेखनीय है कि इस योजना के तहत उत्पादों की 3 अलग-अलग श्रेणियों का समर्थन किया जा रहा है। इनमें बायोफार्मास्यूटिकल्स; जटिल जेनेरिक दवाएं; पेटेंट वाली दवाएं या पेटेंट की समाप्ति के करीब आने वाली दवाएं, सेल आधारित या जीन थेरेपी दवाएं, बल्क दवाएं, ऑटो इम्यून ड्रग्स, एंटी-कैंसर ड्रग्स, एंटी-डायबिटिक ड्रग्स, एंटी-इंफेक्टिव ड्रग्स, कार्डियोवस्कुलर ड्रग्स, साइकोट्रोपिक ड्रग्स और एंटी-रेट्रोवायरल ड्रग्स, इन विट्रो डायग्नोस्टिक डिवाइस शामिल हैं।
भारत को आत्मनिर्भर बनाना के लिए जरूरी है कि आयात कम हो और देश में ही सामानों का उत्पादन बढ़ाया जाए। इसलिए देश में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और वर्क फोर्स को रोजगार से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार ने कई अलग-अलग सेक्टर में PLI स्कीम यानि प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम की शुरुआत की है।(एएमएपी)



