#pradepsinghप्रदीप सिंह।

अरविंद केजरीवाल क्या स्थितप्रज्ञ हो गए हैं? यह सवाल इसलिए कि उनके सबसे करीबी, उनके डिप्टी सीएम, उनके सखा और आंदोलन के समय से लेकर पार्टी और सरकार बनने तक की पूरी यात्रा में उनके साथ रहे मनीष सिसोदिया को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है। उसके बाद अरविंद केजरीवाल मनीष सिसोदिया के घर के बाहर मीडिया के सामने आए और उनसे बात कर रहे थे। टीवी चैनल्स पर अगर आपने उनकी भाव भंगिमा देखी हो तो बिल्कुल ऐसे व्यक्ति की नजर आ रही थी जिसको किसी परिस्थिति, किसी बात, दुर्घटना या घटना से कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि हम सिसोदिया के परिवार से मिलकर आ रहे हैं और उनके परिवार का ख्याल रखेंगे। मुझे बहुत सारी हिंदी फिल्में याद आ गई। हिंदी फिल्मों में विलेन के जो आदमी होते हैं जब वे कोई इस तरह का काम करते हैं, कोई अपराध करते हैं और उनके जेल जाने की संभावना होती है तो बॉस का एक आदमी जाता है, परिवार को पैसा देता है और कहता है कि आपका ख्याल रखा जाएगा। उस आदमी को जेल में यह संदेश भिजवाया जाता है कि तुम्हारे परिवार का ख्याल रखेंगे। कुछ उसी तरह का दृश्य था।

सिसौदिया के घर के बाहर अरविंद केजरीवाल जिस तरह की बात कर रहे थे उससे लगता ही नहीं था कि उनके मन में कोई दुख है या कोई आक्रोश है। जबकि उनकी पार्टी का दावा है कि मनीष सिसोदिया को झूठे आरोपों में और राजनीतिक बदले की भावना से गिरफ्तार किया गया है। उनके खिलाफ कोई केस बनता नहीं है, झूठा केस बनाया गया। अरविंद केजरीवाल अच्छी तरह से जानते हैं कि मामला बनता है। क्या गड़बड़ हुई, कैसे गड़बड़ी की गई, कैसे उसमें बदलाव किया गया और उसका फायदा कैसे उठाया गया, उन्हें सब पता है। अब बात यह है कि वह साबित होगा या नहीं। साबित होने के लिए जरूरी है कि जितने भी किरदार थे उनमें से एक सरकारी गवाह बन जाए, जो बन गया है। उसने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दे दिया है। ऐसे मामलों में जब कोई सरकारी गवाह बन जाता है और मजिस्ट्रेट के सामने शपथपूर्वक बयान देता है तो वह जिन लोगों का नाम लेता है उनका बचना मुश्किल होता है। वह शपथ-पत्र सार्वजनिक नहीं किया गया है लेकिन सीबीआई के सूत्रों से जो खबर आ रही है उसमें मनीष सिसोदिया का भी नाम है। वैसे भी सीबीआई की चार्जशीट में आरोपी नंबर एक मनीष सिसोदिया हैं। वह उस विभाग के मंत्री थे, शराब नीति बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी।

केजरीवाल को चुनौती देने वाला अब कोई नहीं

जरा इस यात्रा पर नजर डालिए, पहले सत्येंद्र जैन और अब मनीष सिसोदिया। बात इन दोनों की ही नहीं है। बात यह है कि अन्ना आंदोलन के दौरान और उसके बाद राजनीतिक दल बनने और सरकार बनने तक जो लोग साथ थे, जो महत्वपूर्ण थे, जो आपको हर फोटो फ्रेम में अरविंद केजरीवाल के साथ दिखते थे, उनमें से एक-एक करके लोग गायब होते जा रहे हैं। सब मिस्टर इंडिया बनते जा रहे हैं। अरविंद केजरीवाल आम आदमी पार्टी के वह सूरज बन गए हैं जिनके नजदीक जो जाता है वह मरता है, जो बहुत दूर चला जाता है वह भी मरता है। उन्होंने पहले उन लोगों को बाहर किया जो उनका नाम लेकर उनसे बात कर सकते थे, सवाल उठा सकते थे, उनके फैसलों पर सवाल उठा सकते थे, उनका विरोध कर सकते थे और उस पर बहस कर सकते थे। उनमें से चुन-चुन कर अरविंद केजरीवाल ने एक-एक को बाहर किया और उन लोगों को भी बाहर किया जिनका इस पार्टी को बनाने और आंदोलन को चलाने में सबसे ज्यादा महत्व था। वह चाहे प्रशांत भूषण हों, कुमार विश्वास हों या और दूसरे लोग हों, उन सबको एक-एक करके बाहर कर दिया। जो बचे हुए लोग थे उनमें सबसे बड़ा कद मनीष सिसोदिया का था। अब आप अंदाजा लगाइए कि दिल्ली की सरकार में कुल 35 विभाग हैं और उनमें से 18 मनीष सिसोदिया के पास थे। सारे महत्वपूर्ण विभाग मनीष सिसोदिया के पास थे। चाहे शिक्षा हो, स्वास्थ्य और पीडब्ल्यूडी हो, तमाम मंत्रालय क्योंकि सत्येंद्र जैन के जेल जाने के बाद वह बिना विभाग के मंत्री बन गए हैं और उनके विभाग भी इनके पास ही थे।

मंत्री दोषी तो मुख्यमंत्री क्यों नहीं

एक चीज आप ध्यान दीजिए कि अरविंद केजरीवाल शुरू से बड़ी प्लानिंग से चले, किसी को इसका अंदाजा नहीं था। जो लोग उनको छोड़कर गए हैं सब यह बात मानते हैं कि वे अरविंद केजरीवाल को समझ नहीं पाए, जो साथ हैं वह भी समझ नहीं पा रहे हैं। इसमें मनीष सिसोदिया भी शामिल हैं। मनीष सिसोदिया का कैसे इस्तेमाल किया केजरीवाल ने। सवाल यह है कि अगर मनीष सिसोदिया दोषी हैं तो मुख्यमंत्री कैसे नहीं हैं क्योंकि हमारा जो संविधान है और उसमें सरकार की जो व्यवस्था है उस व्यवस्था में कैबिनेट का सामूहिक  दायित्व होता है लेकिन आरोपियों में मुख्यमंत्री का नाम नहीं है। अरविंद केजरीवाल को पता था कि हम क्या करने वाले हैं, क्या-क्या कहां गड़बड़ करने वाले हैं। उन्हें मालूम था कि एक न एक दिन तो फसेंगे, एक न एक दिन तो इसकी जांच होगी और जांच होगी तो दोषी पाए जाएंगे, दोषी पाए जाएंगे तो जेल जाएंगे, सजा मिलेगी। इसलिए उन्होंने सरकार बनने के पहले दिन से खुद को अलग रखा और अपने पास कोई विभाग नहीं रखा। ऐसा मुख्यमंत्री पूरे देश में आपको कोई नहीं मिलेगा जिसके पास कोई विभाग हो ही नहीं। जो लोग अरविंद केजरीवाल के करीब रहे और सत्ता का मजा लिया उनको आखिर में सजा भुगतनी पड़ी, चाहे निर्वासन की हो या चाहे जेल की। सत्येंद्र जैन की हालत देख लीजिए, उनके परिवार के बारे में कहा जा रहा है कि वे दर-दर भटक रहे हैं। अरविंद केजरीवाल को कोई फर्क नहीं पड़ता है कि कौन किस स्थिति में है जब तक उनकी अपनी कुर्सी सुरक्षित है।

ईडी की भी चल रही जांच

कोर्ट ने सीबीआई को मनीष सिसोदिया की पांच दिन की रिमांड दी है। अभी इंतजार कीजिए, इसके बाद इस मामले में ईडी आने वाली है। ईडी की भी जांच चल रही है और वह पूछताछ कर चुकी है। ईडी के मामले में जब गिरफ्तारी होगी तब जेल से निकलना और ज्यादा मुश्किल हो जाएगा जैसा कि सत्येंद्र जैन के साथ हो रहा है। जून 2022 से सत्येंद्र जैन जेल में हैं। जनता को दिखाने के लिए आम आदमी पार्टी आंदोलन कर रही है, उसके कार्यकर्ता सड़क पर उतरे हुए हैं, मनीष सिसोदिया महात्मा गांधी की समाधि पर गए। इससे पहले भी अरविंद केजरीवाल उनकी तुलना शाहिद भगत सिंह से कर चुके हैं और उनको राष्ट्रवादी बता चुके हैं। भ्रष्टाचार के आरोप में आप की गिरफ्तारी हुई है, आपने वह भ्रष्टाचार किया है या नहीं उस जांच एजेंसी को अदालत में साबित करना पड़ेगा। साबित होगा तो आप जेल जाएंगे, नहीं तो बरी हो जाएंगे लेकिन उसका गांधी जी से क्या मतलब, गांधी जी की समाधि पर जाने से क्या मतलब और इस हंगामे और इस प्रदर्शन का क्या मतलब। आप कोई आजादी के आंदोलन के लिए या किसी के हक की लड़ाई के लिए तो जेल जा नहीं रहे हैं। यह जो प्रदर्शन हो रहा है वह आप को भ्रष्टाचार के आरोप से बचाने के लिए हो रहा है और यह दिखाने के लिए कि वास्तविकता कुछ और है। यह जो नया ट्रेंड शुरू हुआ है वह कांग्रेस की देन है। देश में जितनी भी बुरी परीपाटी है वह सब कांग्रेस पार्टी ने शुरू की है। इसकी शुरुआत कांग्रेस पार्टी ने ही की है जब हाल में नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कांग्रेस के बाकी नेताओं की कोर्ट में पेशी होनी थी। इसी तरह से कांग्रेस सड़क पर उतरी थी। वही हथकंडा आम आदमी पार्टी अपना रही है। यह बताने की कोशिश हो रही है कि भ्रष्टाचार कोई बुरी बात नहीं है, हमने भ्रष्टाचार किया है तो ऐसा कोई पाप नहीं किया है।

क्या केजरीवाल की पोल खोलेंगे सिसौदिया

यह कौन सी नई राजनीति की बात कर रही है आम आदमी पार्टी जिसका वादा करके यह पार्टी बनी थी और सत्ता में आई थी। मुझे तो पता नहीं क्यों लगता है कि सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद अरविंद केजरीवाल ने कमरा बंद करके अट्टाहास लगाया होगा कि इससे भी मुक्ति मिली। आम आदमी पार्टी में मनीष सिसोदिया ही एकमात्र ऐसे नेता बचे थे जो अरविंद केजरीवाल से बराबरी के स्तर पर बात करते थे। केजरीवाल के जितने कुकर्म हैं उन सब में वह शामिल रहे हैं और उनके सूत्रधार के रूप में जनता के सामने आए हैं। असली सूत्रधार कौन है यह तो बाद में पता चलेगा। अब सवाल यह है कि मनीष सिसोदिया चुप रहेंगे या वह सब कुछ खुल कर अदालत में बताएंगे। यह सवाल बहुत से लोगों के सामने है। आम आदमी पार्टी के साथ खड़े बहुत से लोग ऐसे हैं जिनको बहुत कुछ मालूम है, उनकी चुप्पी ही अरविंद केजरीवाल का सबसे बड़ा रक्षा कवच है। जब तक मनीष सिसोदिया का मुंह बंद रहता है तब तक केजरीवाल बचे हुए हैं। अगर आपने शतरंज का खेल खेला हो तो आपको पता होगा कि प्यादा बहुत छोटा होता है लेकिन प्यादे जब मर जाते हैं तो राजा की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है। आम आदमी पार्टी का जो राजा है वह आज नंगा हो गया है यानी वह असुरक्षित हो गया है। अब  उसको कोई बचाने वाला नहीं है। प्यादे पहले चले गए, अब राजा का मंत्री शहीद हुआ है। हाथी, ऊंट, घोड़े को तो राजा ने निकाल दिया या वे निकल गए। अब सीधा निशाना जिसको भी लगाना है राजा पर लगाना है।  अब अगला कदम होगा शह और मात का। मात में कितना समय लगेगा यह पता नहीं लेकिन उसका रास्ता खुल गया है। अब राजा को सिर्फ भागना है कि कैसे बचें, उससे ज्यादा कब तक बचें। केजरीवाल कब तक बचेंगे सवाल इसी बात का है। बचे रहेंगे इसकी उम्मीद अब मुझे लगता है कि खत्म हो गई है क्योंकि भ्रष्टाचार के इतने मामले हैं, अभी एक जासूसी कांड भी आ गया है। स्कूलों का घोटाला सामने था ही, उसके अलावा अलग-अलग विभागों के घोटाले हैं।

घर में कॉकरोच मारने की दवा डालते ही अलग-अलग जगहों से जैसे कॉकरोच बिलबिला कर बाहर निकलते हैं उसी तरह से भ्रष्टाचार के मामले बाहर आ रहे हैं। अब यह हथकंडा नहीं चलेगा कि जांच एजेंसियों का दुरुपयोग हो रहा है, राजनीतिक बदला लिया जा रहा है, मोदी आम आदमी पार्टी से डर गए हैं, मोदी केजरीवाल से डर गए हैं, मोदी के लिए सबसे बड़ी चुनौती केजरीवाल हैं। जिस पार्टी का लोकसभा में एक सांसद नहीं है वह 303 सांसदों वाली पार्टी के नेता के लिए चुनौती बन गया है, इससे हास्यास्पद बात और क्या हो सकती है। हालांकि, कहने के लिए आप कुछ भी कह सकते हैं। अब मुझे लगता है कि मुद्दा मनीष सिसोदिया नहीं हैं, मनीष सिसोदिया अब पृष्ठभूमि में गए, उनको तिहाड़ जाना है। अब सवाल यह है कि अरविंद केजरीवाल कब तक बाहर रहेंगे, उसी सवाल के जवाब का इंतजार करिए, हम भी कर रहे हैं।

(लेखक राजनीतिक विश्लेषक और ‘आपका अखबार’ न्यूज पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल के संपादक हैं)