पंजाब पुलिस ने शनिवार को करीब पांच घंटे तक विशेष ऑपरेशन चलाकर खालिस्तान समर्थक कट्टरपंथी अमृतपाल सिंह को नकोदर के निकट से हिरासत में ले लिया। अमृतपाल के पांच समर्थकों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया गया है। हालांकि पंजाब पुलिस या किसी सरकारी प्रवक्ता ने आधिकारिक तौर पर अमृतपाल की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है लेकिन सूत्रों के मुताबिक उसे गिरफ्तार कर अज्ञात स्थान पर ले जाया गया है। बताया जा रहा है कि पंजाब पुलिस महानिदेशक गौरव यादव इस पूरे घटनाक्रम पर शाम तक मीडिया से बातचीत करेंगे।
पंजाब सरकार ने किसी प्रकार की अप्रिय घटना की आशंका के चलते राज्य में रविवार दोपहर 12 बजे तक इंटरनेट और सामान्य सेवाओं को निलंबित कर दिया है। पंजाब के 12 जिलों में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। पंजाब पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने प्रदेशवासियों से सूबे में शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने की अपील की है। पुलिस ने यह कार्रवाई ऐसे समय में की है, जब अमृतपाल ने रविवार से मुक्तसर साहिब में खालसा मार्च निकालने का ऐलान कर रखा था।
अमृतपाल सिंह पिछले कुछ दिनों से पंजाब में काफी सक्रिय था। वह पंजाब में खालिस्तानी गतिविधियों को बढ़ा रहा था। खालिस्तान समर्थक संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ के प्रमुख अमृतपाल के खिलाफ पंजाब में तीन केस दर्ज हैं, जिनमें से दो मामले अमृतसर जिले के अजनाला थाने में हैं। अपने एक करीबी की गिरफ्तारी से नाराज होकर अमृतपाल ने बीती 23 फरवरी को समर्थकों के साथ मिलकर अजनाला थाने पर हमला कर दिया था। इसके बाद अमृतपाल खुलेआम पंजाब सरकार तथा पंजाब पुलिस को चुनौती दे रहा था।
शनिवार को पंजाब पुलिस महानिदेशक गौरव यादव के निर्देश पर फिरोजपुर, संगरूर, मोगा, एसएएस नगर (मोहाली) और पटियाला समेत आठ जिलों की पुलिस को अमृतपाल की गिरफ्तारी के लिए विशेष ऑपरेशन चलाने के निर्देश दिए। इस ऑपरेशन को शुरू करने से पहले पुलिस ने रविवार दोपहर 12 बजे तक पंजाब में इंटरनेट और सामान्य एसएमएस सेवाओं को निलंबित कर दिया।
पुलिस ने अर्ध सैनिक बलों के साथ मिलकर आज अमृतसर जिले में स्थित अमृतपाल के पैतृक गांव जल्लूपुर खेड़ा की भी घेराबंदी की।
पुलिस ने जालंधर के पास नाकाबंदी करके अमृतपाल के काफिले के वाहनों को रोका लेकिन वह पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। पुलिस ने यहां अमृतपाल के पांच समर्थकों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद पुलिस के 70 वाहनों ने अमृतपाल का पीछा करना शुरू किया। अमृतपाल ने पुलिस को कई बार चकमा दिया लेकिन करीब पांच घंटे की जद्दोजहद के बाद पुलिस ने अमृतपाल को नकोदर के पास काबू कर लिया। पुलिस ने अमृतपाल व उसके समर्थकों को कहां रखा है, समाचार लिखे जाने तक कोई खुलासा नहीं किया गया है।
गृह मंत्री अमित शाह से मिले थे सीएम भगवंत मान

पंजाब में खालिस्तान समर्थकों की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कोई बड़ा कदम उठाए जाने की खबरें आईं। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर मुलाकात की। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर पंजाब में सीआरपीएफ/आरएएफ की 18 कम्पनी तैनात की गईं।
कौन है अमृतपाल सिंह:
– अमृतपाल सिंह अमृतसर जिले के जल्लूपुर खेड़ा का निवासी है।
– साल 2012 में काम के सिलसिले में दुबई गया था।
– करीब दस साल बाद 2022 में दुबई से स्वदेश लौटा।
– साल 2022 में उसे ‘वारिस पंजाब दे’ का मुखी बनाया गया।
– पिछले साल 9 दिसंबर को उसने गुरुद्वारा बिहारीपुर में तोड़फोड़ की।
– पिछले साल 13 दिसंबर को जालंधर के गुरुद्वारे में तोड़फोड़ की।
– इस साल 15 फरवरी को अमृतपाल सिंह के खिलाफ अजनाला थाने में केस दर्ज किया गया।
– इससे चिढ़कर अमृतपाल सिंह ने 23 फरवरी को अजनाला थाने पर अपने समर्थकों के साथ कब्जा किया।

पंजाब में खालिस्तानी ताकतों को एकजुट कर रहा था अमृतपाल
अचानक पंजाब की धरती पर आकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से लेकर सीएम भगवंत मान को चुनौती देने वाले अमृतपाल सिंह ने पंजाब के युवाओं को अपने साथ जोड़ने के लिए मास्टर प्लान तैयार कर रखा था। युवाओं को अमृतपान व नशा छुड़ाने के नाम पर अपने साथ जोड़ रहा था लेकिन साथ ही पंजाब में खालिस्तान लहर को खड़ा भी कर रहा था।
12वीं पास है अमृतपाल
अमृतपाल सिंह का जन्म अमृतसर के जल्लूपुर खेड़ा गांव में 1993 में हुआ था। महज 12वीं पास अमृतपाल अचानक से दुबई चला गया। बताते हैं कि वहां पर अमृतपाल ट्रांसपोर्ट के व्यवसाय से जुड़ा था। पंजाबी एक्टर और ऐक्टिविस्ट दीप सिद्धू ने 30 सितंबर 2021 में वारिस पंजाब दे संगठन की स्थापना की थी। दीप सिद्धू ने इसका मकसद युवाओं को सिख पंथ के रास्ते पर लाना और पंजाब को जगाना बताया था। किसान आंदोलन और उसके बाद 26 जनवरी 2021 को लाल किला हिंसा मामले में दीप सिद्धू का नाम आया। 15 फरवरी 2022 को दिल्ली से पंजाब लौटते वक्त सोनीपत के पास एक सड़क हादसे में दीप सिद्धू की मौत हो जाती है।
मार्च में दावा किया जाता है कि अमृतपाल अब वारिस पंजाब दे संगठन का नया सर्वेसर्वा है। इसके बाद 29 सितंबर 2022 को अमृतपाल मोगा के रोडे गांव पहुंचता है। वही रोडे गांव जहां से खालिस्तानी जरनैल सिंह भिंडरावाले की जड़ें जुड़ी हुई थीं। 29 सितंबर को ही रोडे गांव में बतौर वारिस पंजाब दे प्रमुख अमृतपाल सिंह की दस्तारबंदी होती है। इसके बाद अमृतपाल सीधे देश की सरकार और सिस्टम को चैलेंज देने लगता है। अमृतपाल सिंह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को ललकारते हुए कहा था कि इंदिरा गांधी ने भी कुचलने की कोशिश की थी, अब अमित शाह भी अपना चाव पूरा कर देख लें।
थाने पर किया था हमला…
पिछले महीने ही अमृतपाल और उसके साथियों ने पंजाब के अजनाला में हथियारों से लैस होकर थाने पर हमला कर दिया था। अमृतपाल के समर्थकों ने अपहरण और दंगों के आरोपियों में से एक तूफान की रिहाई को लेकर पुलिस स्टेशन पर यह धावा बोला था। इस दौरान छह पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। अमृतपाल के खिलाफ उसके ही एक पूर्व सहयोगी ने शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि इन सभी ने कथित तौर पर बरिंदर सिंह नाम के व्यक्ति को अजनाला से अगवा कर लिया और फिर मारपीट की।
भिंडरांवाला का परिवार कर चुका है किनारा
दमदमी टकसाल के मुखी रहे संत जरनैल सिंह भिंडरांवाला के भतीजे जसबीर सिंह रोडे ने वारिस पंजाब दे जत्थेबंदी के मुखी अमृतपाल सिंह से किनारा कर चुका है। जसबीर सिंह ने कहा कि अमृतपाल सिंह की विचारधारा से उनका कोई लेना देना नहीं है। अमृतपाल भिंडरांवाला की जगह नहीं ले सकता। वो एक अलग शख्सियत थे। उन्होंने कभी भी खालिस्तान बनाने की मांग नहीं की थी।
श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार भाई जरनैल सिंह रोडे ने कहा कि खालिस्तान अमृतपाल का अपना और उसकी जत्थेबंदी का एजेंडा हो सकता है। भिंडरांवाला परिवार इससे इत्तफाक नहीं रखता। उन्होंने कहा कि अमृतपाल यदि सिख धर्म के प्रचार प्रसार या अमृतपान की मुहिम चलाता है तो हम उसका साथ देंगे, लेकिन अलग खालिस्तान या राज्य की मांग का वह समर्थन नहीं करते। उन्होंने कहा कि संत जरनैल सिंह भिंडरांवाला ने भी कभी खालिस्तान की मांग नहीं की थी। वे हमेशा ही आनंदपुर साहिब मत्ते को लागू करने की मांग करते थे। इसके तहत राज्यों को अधिकार दिए जाने की वकालत थी, उसमें खालिस्तान की कोई बात नहीं थी। (एएमएपी)



