वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने दिया उद्बोधन।

पीएम मोदी गुरुवार को राजधानी दिल्ली स्थित अशोक होटल में प्रथम वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में शामिल हुए। इस दौरान दुनियाभर से आए बौद्ध धर्मावलंबियों का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि हमने भगवान बुद्ध के मूल्यों का निरंतर प्रसार किया है। भारत विश्व के हर मानव के दुख को अपना दुख समझता है।

‘विश्व को सुखी बनाने के लिए ‘स्व’ से ऊपर उठकर काम करना होगा’

पीएम मोदी ने सम्मेलन के दौरान दुनिया के सामने खड़ी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उसके समाधान के लिए बौद्ध दर्शन को प्रेरणा स्रोत बताया। उन्होंने कहा कि विश्व को सुखी बनाने के लिए ‘स्व’ से ऊपर उठकर काम करना होगा। समस्याओं से समाधान की यात्रा ही बुद्ध की यात्रा है।

‘बुद्ध व्यक्ति से आगे बढ़कर एक बोध हैं’

उन्होंने कहा कि बुद्ध व्यक्ति से आगे बढ़कर एक बोध हैं। बुद्ध स्वरूप से आगे बढ़कर एक सोच हैं। बुद्ध चित्रण से आगे बढ़कर एक चेतना हैं। उन्होंने कहा कि बुद्ध की चेतना चिरंतर और निरंतर है। गौतम बुद्ध की महान शिक्षाओं ने सदियों से अनगिनत लोगों को प्रभावित किया है।

‘भारत और नेपाल में बुद्ध सर्किट में किया सुधार’

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने भगवान बुद्ध के मूल्यों का लगातार प्रसार किया है। पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने भारत और नेपाल में बुद्ध सर्किट में सुधार किया है। उन्होंने कहा कि कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा हो या लुम्बिनी, जहां भारत अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संस्कृति केंद्र स्थापित किया जा रहा है, भारत उन्हें हासिल करने के लिए समग्र रूप से काम कर रहा है।

‘भारत ने दुनिया को बुद्ध दिए हैं, युद्ध नहीं’

प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि इस अमृत काल में भारत ने कई विषयों पर नई पहल की है और इसके सबसे बड़े प्रेरणास्रोत भगवान बुद्ध हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया को बुद्ध दिए हैं, युद्ध नहीं। उन्होंने आगे कहा कि बुद्ध ने सदियों पहले युद्ध और अशांति का समाधान दिया था जिससे दुनिया आज पीड़ित है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध का मार्ग भविष्य का मार्ग है।

सम्मेलन का उद्देश्य ?

ज्ञात हो, अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (IBC) 20-21 अप्रैल को दिल्ली में प्रथम वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। इस सम्मेलन का उद्देश्य वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में मानवता के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों पर विचार करना और इसी परिप्रेक्ष्य में उसका समाधान है। शिखर सम्मेलन का प्राथमिक लक्ष्य शाक्यमुनि बुद्ध की शिक्षाओं की जांच करना है, जिन्हें बुद्ध धम्म के अभ्यास के माध्यम से समय के साथ लगातार बढ़ाया गया है। इसका उद्देश्य बौद्ध विद्वानों और धर्म गुरुओं के लिए एक मंच तैयार करना है जो संघ के सदस्य नहीं हैं। इसके अतिरिक्त, शिखर धर्म के मूलभूत मूल्यों को ध्यान में रखते हुए, सार्वभौमिक शांति और सद्भाव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, शांति, करुणा और सद्भाव के बारे में बुद्ध के संदेश पर ध्यान केंद्रित करेगा। शिखर सम्मेलन एक दस्तावेज के रूप में परिणत है जिसे वैश्विक स्तर पर अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए एक उपकरण के रूप में इसकी उपयोगिता का आकलन करने के लिए आगे अकादमिक शोध के अधीन किया जा सकता है।

विषय

शिखर सम्मेलन का विषय ‘रिस्पांस टू कांटेंपरी चैलेंजेस फ्राम फिलॉसफी टू प्रैक्सिस’ है। इसमें दुनियाभर के प्रख्यात विद्वान, संघ नेता और धर्म के अनुयायी वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे और बुद्ध धर्म के दृष्टिकोण से सार्वभौमिक मूल्यों को बढ़ावा देने का प्रयास करेंगे।

इन मुद्दों पर होगा विचार

इसमें बुद्ध धर्म और शांति, पर्यावरणीय संकट, स्वास्थ्य और स्थिरता, नालंदा बौद्ध परंपरा का संरक्षण तथा बुद्ध धर्म तीर्थयात्रा, जीवित विरासत और बुद्ध अवशेष जैसे विषयों पर विचार किया जाएगा।

30 देशों के प्रतिनिधि शामिल

सम्मेलन में लगभग 30 देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। करीब 173 अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागी सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं, जिनमें 84 संघ सदस्य हैं। इसके अतिरिक्त, सम्मेलन में विदेशी दूतावासों का प्रतिनिधित्व करने वाले 30 से अधिक राजदूतों सहित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लगभग 200 व्यक्ति हैं।(एएमएपी)