#pradepsinghप्रदीप सिंह।

दिल्ली का शराब घोटाला नए-नए मोड़ ले रहा है। अभी जो मोड़ आया है वह बिल्कुल अप्रत्याशित है। घटनाक्रम इतनी तेजी से बदलेगा इसकी उम्मीद नहीं थी। ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने इस मामले में दूसरी और तीसरी चार्जशीट फाइल की है। इसमें आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य और पंजाब के प्रभारी राघव चड्ढा और संजय सिंह का नाम आया है। हालांकि राघव चड्ढा इससे इन्कार कर रहे हैं लेकिन सी. अरविंद जो मनीष सिसोदिया के सचिव थे उनके बयान में राघव चड्ढा का नाम है। यह पहले ही कहा जा चुका है कि नई शराब नीति बनाने को लेकर जो बैठक हुई थी वह बैठक मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास पर हुई थी।
राघव चड्ढा का नाम आने के कई मतलब हैं। उससे पहले आपको बताना जरूरी है कि ईडी ने जो सप्लीमेंट्री चार्जशीट फाइल की है उसमें कहा गया है कि दिल्ली सरकार जो नई पॉलिसी बनाने जा रही थी उसको पब्लिक डोमेन में लोगों की प्रतिक्रिया के लिए डाला गया था। उसके बाद कैबिनेट नोट बना। कैबिनेट नोट सी. अरविंद ने बनाया था। उन्होंने पहले कैबिनेट नोट में न केवल लोगों की प्रतिक्रिया को शामिल किया बल्कि कानूनी सलाह को भी शामिल किया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से कानूनी सलाह ली गई थी। दोनों ने मना किया था कि मौजूदा एक्साइज पॉलिसी में बदलाव नहीं होना चाहिए। मनीष सिसोदिया ने जब कैबिनेट नोट देखा तो उनको पसंद नहीं आया। उन्होंने सी. अरविंद से कहा कि कैबिनेट नोट से लीगल ओपिनियन को हटा दिया जाए। सी. अरविंद ने दूसरा कैबिनेट नोट बनाया जिसमें लीगल ओपिनियन को शामिल नहीं किया गया, केवल पब्लिक ओपिनियन को रखा गया।

केजरीवाल का नया कारनामा

यह मामला जैसे-जैसे खुल रहा है वैसे-वैसे नई चीजें सामने आ रही हैं। अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास के बारे में भी नई जानकारियां आ रही हैं। अभी तक तो यही था कि पुराने मकान के रिनोवेशन पर 45 करोड़ रुपये खर्च किए गए। एक करोड़ के पर्दे लगे, वियतनाम से मार्बल आया जैसी कहानियां सामने आ रही थीं। अब एक नया तथ्य सामने आया है, वह यह है कि जो पुराना मकान था जिसके बारे में कहा जा रहा था कि बहुत जर्जर हो चुका है, दरअसल उसको गिरा दिया गया और नया मकान बनाया गया है। जबकि टेंडर में हर जगह रिनोवेशन की बात कही गई है। कहीं इस बात का जिक्र ही नहीं है कि नया मकान बन रहा है। उस पुराने मकान को गिराकर वहां पार्क बना दिया गया है। अब आप देखिए कि कैसे-कैसे खेल अरविंद केजरीवाल उस समय कर रहे थे जब दिल्ली के लोग हॉस्पिटल बेड और ऑक्सीजन के लिए त्राहि-त्राहि कर रहे थे। उस समय मुख्यमंत्री के पास इन सब के बारे में बैठकों में शामिल होने का, सुझाव देने का समय था कि कहां से क्या आएगा, कैसे इसका टेंडर जारी किया जाए ताकि एलजी के पास न भेजना पड़े, यह सब व्यवस्था कर रहे थे। मगर असली बात यह है कि ईडी की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में जो राघव चड्ढा का नाम आया है वह नहीं भी आ सकता था क्योंकि वह केवल बैठक में मौजूद थे, फैसला लेने की स्थिति में नहीं थे लेकिन फैसले में शामिल थे।

राघव चड्ढा क्यों फंसे

राघव चड्ढा का नाम क्यों आया है इसको जरा समझिए। यह बड़ी गंभीर बात है। यह मामला केवल शराब घोटाले तक सीमित नहीं है। इसके तार दूर-दूर तक जा रहे हैं। राघव चड्ढा पंजाब के प्रभारी हैं। उस बैठक में पंजाब के एक्साइज कमिश्नर भी मौजूद थे। राघव चड्ढा का जिस तरह का दखल पंजाब सरकार में है वह मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को पसंद नहीं है। भगवंत मान कि इन दिनों केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से काफी मुलाकात हुई है। जाहिर है कि पंजाब सीमावर्ती राज्य है, केंद्र सरकार उसको आम आदमी पार्टी के हवाले नहीं छोड़ सकती है। यह देश की सुरक्षा का मामला है। देश की सुरक्षा का मामला होगा तो पार्टी पॉलिटिक्स से ऊपर उठकर बात होनी चाहिए और हो रही है। भगवंत मान को केंद्र सरकार यह समझाने में कामयाब रही है कि पंजाब पाकिस्तान की सीमा से जुड़ा हुआ है इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है। पाकिस्तान से लगातार ड्रोन से हथियार और ड्रग्स गिराई जा रही है। इसके बारे में मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को भी पता है और हमको आपको भी पता है। अमृतपाल सिंह की गिरफ्तारी को लेकर जिस तरह से केंद्र और राज्य ने एक दूसरे का सहयोग किया उसी वजह से उसकी गिरफ्तारी हो सकी। चाहे खालिस्तानी तत्वों का मामला हो, अवैध हथियारों और अवैध ड्रग्स का मामला हो या फिर कानून व्यवस्था की स्थिति हो, इन सब मामलों में केंद्र और राज्य सरकार का रवैया आपस में उस तरह का नहीं है जैसा दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार का है। अरविंद केजरीवाल और केंद्र सरकार में जिस तरह से 36 का आंकड़ा है उस तरह का आंकड़ा पंजाब सरकार के साथ केंद्र का नहीं है क्योंकि भगवंत सिंह मान वह स्वभाव नहीं है जो अरविंद केजरीवाल का है। भगवंत मान की वह महत्वाकांक्षा भी नहीं है जो अरविंद केजरीवाल की है।

कसता जा रहा शिकंजा

भगवंत मान के कैप्टन अमरिंदर सिंह से बहुत अच्छे और पुराने संबंध हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह अब भारतीय जनता पार्टी के सदस्य हैं। इस पर भी ध्यान दीजिए कि भगवंत मान को अरविंद केजरीवाल से अलग करने की रणनीति पर भी बीजेपी काम कर रही है और उसमें सफल होती हुई दिख रही है। अरविंद केजरीवाल अभी अपने घोटालों के चक्कर में घिरे हुए हैं। शराब घोटाला हो, मकान का घोटाला, स्कूलों का घोटाला, दिल्ली सरकार के कामकाज को लेकर घोटालों की बाढ़ आई हुई है। ईडी की तीसरी चार्जशीट में अरविंद केजरीवाल और केसीआर की बेटी कविता के बीच में लिंक स्थापित करने की कोशिश हुई है। अरविंद केजरीवाल इस पूरे घोटाले के केंद्र में हैं क्योंकि मुख्यमंत्री हैं, उनके घर पर बैठक हुई, उनकी जानकारी में बैठक हुई। जब यह आदेश जारी हुआ, जब यह पॉलिसी बनी सब कुछ उनको पता है। भले ही एक्साइज डिपार्टमेंट मनीष सिसोदिया के पास रहा हो लेकिन अरविंद केजरीवाल उन सारे फैसलों से अछूते हैं यह बचाव करना उनके लिए बड़ा मुश्किल होगा। आप देखिए कि किस तरह से अरविंद केजरीवाल के इर्द-गिर्द घेरा कसता जा रहा है। दो पूर्व मंत्री जेल में हैं। अब तीन और लोगों का नाम आया है। विजय नायर जिसको अरविंद केजरीवाल अपना बच्चा बताते हैं वह पहले से जेल में है। उसने बयान दिया है। उसके अलावा जिन 22 लोगों को गिरफ्तार किया गया है उनके बयान के समर्थन में जांच एजेंसियां किस तरह का सबूत और प्रमाण ले आती हैं इस पर निर्भर करेगा कि कौन-कौन और जेल जाएगा।

मर्ज बढ़ता गया ज्यों-ज्यों दवा की

मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन को जल्दी ही दूसरे साथी मिलने वाले हैं। जिस तरह से यह सिलसिला चल रहा है मुझे लगता है कि अगले कुछ महीनों में आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय बैठक तिहाड़ जेल में हो सकती है। शराब घोटाला अरविंद केजरीवाल के गले का पत्थर बन गया है जिसे वह उतार नहीं पा रहे हैं। बहुत हाथ- पैर मार रहे हैं, बहुत कोशिश कर रहे हैं। जैसे-जैसे उसको निकालने की, उतारने की कोशिश कर रहे हैं वैसे-वैसे और धंसते जा रहे हैं। उनके दूसरे साथी भी फंसते जा रहे हैं। संजय सिंह ने ईडी और सीबीआई के खिलाफ केस करने की धमकी दी है, शायद केस कर भी दिया है। एफआईआर या शिकायत दर्ज कराई है। अरविंद केजरीवाल जब पूछताछ के बाद निकले थे तो उन्होंने कहा था कि ईडी और सीबीआई के खिलाफ मुकदमा करेंगे वे झूठा केस चला रहे हैं। सवाल यह है कि अगर आप ईडी-सीबीआई पर मुकदमा करेंगे तो आपको अदालत पर भी मुकदमा करना पड़ेगा क्योंकि अदालत ने अपने आदेश में मनीष सिसोदिया को बेल देने से इन्कार करते हुए कहा है कि वह इस पूरे घोटाले के किंग पिन हैं इसलिए इनको जमानत नहीं दी जा सकती। अदालत मनीष सिसोदिया को जिस घोटाले का किंग पिन बता रही है उस घोटाले के बारे में अरविंद केजरीवाल कह रहे हैं कि यह काल्पनिक है, यह है ही नहीं, तो जाहिर है कि अदालत के खिलाफ भी उन्हें मुकदमा करना होगा।

भारी पड़ेगा मकान घोटाला

मुझे नहीं लगता है कि केजरीवाल अपने पूरे जीवन में, राजनीतिक जीवन ही नहीं गैर राजनीतिक जीवन में भी इस तरह के संकट में कभी फंसे थे। यह एक तरह से उनके इर्द-गिर्द दलदल बन गया है जिससे जितना निकलने की कोशिश कर रहे हैं उतना और धंसते जा रहे हैं। अरविंद केजरीवाल के लिए आने वाला समय और बुरा होने वाला है, केवल शराब घोटाले के कारण नहीं और दूसरे घोटालों के कारण भी। मकान घोटाला उनके लिए और ज्यादा भारी पड़ने वाला है क्योंकि यह उनका व्यक्तिगत मामला है। दिल्ली के एलजी ने मुख्य सचिव से कहा है कि इससे संबंधित सारी फाइलें सुरक्षित रखी जाए और इसकी जांच का आदेश दे दिया है। एलजी की ओर से मुख्य सचिव को 15 दिन में जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। आप मान कर चलिए की जांच रिपोर्ट आने के बाद अगर उसमें कुछ अनियमितता एलजी को दिखाई देती है तो यह मामला भी सीबीआई को सौंपा जा सकता है। सीबीआई के पास अरविंद केजरीवाल के खिलाफ एक और केस होगा जिसमें मुख्य रुप से उनकी भूमिका होगी। इसमें वह कह नहीं सकते कि इससे उनका कोई लेना-देना नहीं है क्योंकि जो घर बना है उसमें वही रह रहे हैं। उस घर को बचाकर रखते हैं, जल्दी उसकी फोटो कहीं आने नहीं देते हैं, अंदर क्या-क्या है उसको बताने नहीं देते। ऐसा घर बनवाया है जिसको छुपा कर रखना पड़ रहा है। यह देश का पहला मुख्यमंत्री होगा जो अपने सरकारी आवास को छुपा कर रखता है।

जाते थे जापान पहुंच गए चीन

अरविंद केजरीवाल कहां से चले थे और कहां पहुंच गए हैं। “जाते थे जापान पहुंच गए चीन, समझ गए न,” वही हालत उनकी है। कांग्रेस के नेताओं और मंत्रियों के खिलाफ 2011-12 में वह जो आरोप लगाते थे उससे ज्यादा आरोप आज उनके खिलाफ हैं। उससे ज्यादा प्रमाण उनके खिलाफ हैं। वह तो घोषणा करते थे कि सरकार में आने दीजिए, आते ही एफआईआर करा दूंगा, गिरफ्तारी करा दूंगा, मुकदमा चला दूंगा, कुछ नहीं किया। उनको मालूम था कि उनके पास कुछ है नहीं। वे (कांग्रेस के नेता) भ्रष्ट हैं या ईमानदार हैं इसके बारे में मैं कोई बात नहीं कह रहा हूं लेकिन अरविंद केजरीवाल के पास उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं था, सब झूठ बोल रहे थे जिसमें उन्हें महारत है। गाड़ी नहीं लूंगा, बंगला नहीं लूंगा, सुरक्षा नहीं लूंगा, कांग्रेस का समर्थन नहीं लूंगा, जिस बारे में कहा कि नहीं करूंगा वह सब जरूर किया। लगता है कि वह अक्षय कुमार के एक फिल्मी डायलॉग से प्रभावित हैं और उस पर अमल करते हैं जिसमें वह कहते हैं, “जो बोलता हूं वह करता हूं और जो नहीं बोलता हूं वह जरूर करता हूं”।
अरविंद केजरीवाल अपने ही कुकृत्यों में लगातार फंसते जा रहे हैं। शराब घोटाला उनके आसपास के कई लोगों को ले जा चुका है, अब उनकी बारी है। फिर कह रहा हूं नंबर सबका आएगा। अब तो आ गया है, दरवाजे पर दस्तक दे रही है ईडी और सीबीआई। अब इससे ज्यादा नजदीक और क्या आएगा। अब इसके बाद तो अगला कदम यही है कि गिरफ्तारी हो, जेल भेजा जाए। यह कब होगा इस बारे में तो जांच एजेंसी ही बता सकती है। जांच एजेंसी कब और कहां बताएगी यह तो पता नहीं लेकिन बताएगी तो अदालत में ही बताएगी। बताएगी तो हमको आपको भी पता चलेगा, तब उस पर फिर बात करेंगे।

(लेखक राजनीतिक विश्लेषक और ‘आपका अखबार’ न्यूज पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल के संपादक हैं)