द केरल स्टोरी केरल में कथित रूप से गायब हुईं लड़कियों का धर्म परिवर्तन कर उनके इस्लामिक स्टेट में शामिल होने की कहानी है। फिल्म को लेकर विवाद इसका ट्रेलर रिलीज होने के बाद शुरू हुआ था।
ट्रेलर के मुताबिक, फिल्म ‘हिंदू लड़कियों को प्यार के जाल में बहला फुसलाकर इस्लाम धर्म अपनाने और फिर उन्हें ISIS से जोड़ने’ की कहानी है। इसमें दावा किया गया कि केरल की 32,000 हिंदू लड़कियों को बहलाकर उन्हें ISIS से जोड़ा गया।
हालांकि, केरल हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ट्रेलर से 32,000 लड़कियों का आंकड़ा हटा लिया गया और उसकी जगह पर तीन लड़कियों की सच्ची कहानी कर दिया गया। फिल्म को लेकर मुस्लिम देशों में भी काफी चर्चा है और वहां की मीडिया भी इसे लेकर बहस छिड़ी हुई है।
पाकिस्तान
पाकिस्तान के प्रमुख अखबार, डॉन ने पश्चिम बंगाल की सरकार की तरफ से फिल्म पर प्रतिबंध लगाए जाने को लेकर लिखा है, ‘पश्चिम बंगाल की सरकार ने मुसलमानों के खिलाफ सांप्रदायिक घृणा और प्रोपेगेंडा फैलाने के आरोप में एक फिल्म पर प्रतिबंध लगा दिया लेकिन दक्षिणपंथी सत्तारूढ़ गठबंधन ने इसका जोरदार बचाव किया है।’
डॉन ने आगे लिखा, ‘फिल्म, द केरल स्टोरी का दावा है कि केरल से 32,000 हिंदू और ईसाई महिलाओं ने इस्लाम कबूल कर लिया और कुछ को आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट में भर्ती किया गया। आलोचकों ने फिल्म पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और अशांति को बढ़ावा देने के मकसद से झूठ फैलाने का आरोप लगाया है। लेकिन फिल्म को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना समर्थन दिया गया है, और हिंदू कट्टरपंथियों ने फिल्म को सही ठहराया है।’
पाकिस्तान के एक और बड़े अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने फिल्म को लेकर अपनी एक खबर का शीर्षक दिया है- ‘मुसलमानों को टारगेट करती एक और भारतीय प्रोपेगेंडा फिल्म- इस बार केरल की कहानी।’ अखबार ने लिखा है, ‘कश्मीर फाइल्स के बाद बॉलीवुड की एक और प्रोपेगेंडा फिल्म जो भारत के बाहर भी सुर्खियों में है। सुदीप्तो सेन की इस फिल्म पर भारत के कई राज्य सरकारों, फिल्म आलोचकों, कई मीडिया आउटलेट्स और सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल खड़े किए हैं।’ अखबार ने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के उस बयान का भी जिक्र किया है जिसमें उन्होंने फिल्म को मुसलमानों के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी का एक प्रोपेगेंडा बताया था।
कतर

मुस्लिम देश कतर के जाने- माने अखबार अलजजीरा ने कहा है कि निर्माताओं ने फिल्म में अपने दावे का समर्थन करने के लिए हिंदू दक्षिणपंथी सिद्धांत लव जिहाद का सहारा लिया है।
अखबार ने लिखा, ‘निर्माताओं का कहना है कि फिल्म एक मुस्लिम “लव जिहाद” साजिश की सच्ची कहानियों को दिखाती है, जिसमें गैर-मुस्लिम लड़कियों और महिलाओं को कथित तौर पर रोमांस के जाल में फंसाया जाता है और उनसे शादी कर इस्लाम में उनका धर्मांतरण किया जाता है। इसके बाद उन्हें इस्लामिक स्टेट में शामिल होने के लिए मजबूर किया जाता है।’
अखबार ने लिखा है कि बीजेपी अब तक केरल में अपनी राजनीतिक बढ़त बढ़ाने में नाकामयाब रही है। केरल भारत का सबसे सुशासित राज्य है जहां सत्ता की बागडोर लेफ्ट और कांग्रेस के हाथों में रही है। अखबार ने आगे लिखा, ‘आलोचकों का कहना है कि द केरल स्टोरी भारतीय सिनेमा में एक नए ट्रेंड का हिस्सा है, जो तथ्यों की कम परवाह करता है और दक्षिणपंथी नैरेटिव को बढ़ाना चाहता है। वे कहते हैं कि यह चलन 2014 में मोदी के सत्ता में आने के बाद शुरू हुआ।’
संयुक्त अरब अमीरात
यूएई के अखबार खलीज टाइम्स ने लिखा है कि झूठे दावों को लेकर फिल्म द केरल स्टोरी की काफी आलोचना हो रही है। अखबार ने लिखा, ‘रिलीज के बाद से ही विवादास्पद हिंदी फिल्म ‘द केरला स्टोरी’ आलोचनाओं का शिकार है। फिल्म, केरल की महिलाओं के एक समूह के इर्द-गिर्द घूमती है जो इस्लाम अपनाकर इस्लामिक स्टेट में शामिल हो जाती हैं। केरल की हजारों महिलाओं का धर्म परिवर्तन कर उन्हें आतंकवादी संगठन में भर्ती किए जाने वाले झूठे दावे की व्यापक रूप से आलोचना की जा रही है।’
अखबार लिखता है कि आलोचकों ने तथ्यात्मक रूप से गलत दावे के लिए फिल्म की आलोचना की है। फिल्म को वास्तविक घटना के रूप में दिखाया गया है लेकिन दर्शक इस बात पर ध्यान दें कि फिल्म में दिखाए गए आंकड़ों की पुष्टि करने के लिए कोई सबूत नहीं है।
अखबार ने आगे लिखा, ‘ट्रेलर में ‘द केरला स्टोरी’ ने दावा किया कि केरल की 32,000 महिलाएं लापता हो गईं और आतंकी संगठन में शामिल हो गईं। हालांकि, ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन की 2019 की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि केरल से केवल 60 से 70 व्यक्ति 2014 और 2018 के बीच आतंकवादी समूह में शामिल हुए थे।’
सऊदी अरब
सऊदी अरब के अखबार सऊदी गैजेट ने लिखा है कि विपक्ष के कई नेताओं ने फिल्म की आलोचना करते हुए कहा है कि फिल्म सांप्रदायिक सद्भावना बिगाड़ने वाली एक प्रोपेगेंडा है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भारत की सत्ताधारी पार्टी के कई नेताओं ने फिल्म का समर्थन किया है।
फिल्म की रिलीज के बाद से ही बहुत से लोगों ने इसकी सराहना की है और कहा है कि यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है जिस पर बात की जानी चाहिए। अखबार ने आगे लिखा, ‘भारत के बीजेपी शासित कई राज्यों ने फिल्म को टैक्स फ्री कर दिया है। हालांकि, कई लोग फिल्म पर आरोप लगा रहे हैं कि यह मुसलमानों को गलत तरीके से पेश करती है और इस्लामोफोबिया को बढ़ावा देती है।’
अखबार ने लिखा कि केरल भारत के सबसे प्रगतिशील राज्यों में शामिल है और सांप्रदायिक सद्भावना के लिए अक्सर इसकी तारीफ की जाती है। साल 2011 की जनगणना के मुताबिक, केरल की 3।3 करोड़ आबादी में 27 प्रतिशत मुस्लिम हैं और 18% ईसाई। अखबार लिखता है, ‘कई राजनीतिज्ञों और मुस्लिम नेताओं ने आरोप लगाया है कि फिल्म सांप्रदायिक सद्भावना बिगाड़ने को लेकर चलाई जा रही मुहिम का हिस्सा है और यह राज्य का अपमान करती है।’(एएमएपी)



