राहुल ने किया तेजस्वी और सहनी के सामने सरेंडर।
प्रदीप सिंह।
बिहार में महागठबंधन की जिस ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस का लंबे समय से इंतजार था, आखिर वह हो गई और इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का जो नतीजा है, उसमें कांग्रेस और राहुल गांधी का सरेंडर ही सरेंडर है। कांग्रेस देश की सबसे पुरानी और दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। वह सबसे लंबे समय तक देश की सत्ता में रही है। एक विधानसभा चुनाव में उस पार्टी की यह दुर्दशा हो जाएगी और वह एक नहीं दो-दो लोगों के सामने इस तरह सरेंडर कर देगी, ऐसा किसी ने सोचा नहीं था।
तेजस्वी यादव और उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल बिहार में बड़ी पार्टी है, इसमें कोई शक नहीं है। विधानसभा में उसकी 75 सीटें हैं। तेजस्वी यादव नेता प्रतिपक्ष हैं। उनके पिता और मां मुख्यमंत्री रह चुके हैं। राज्य में 15 साल आरजेडी का शासन रहा है। नीतीश कुमार के शासन में भी डेढ़ साल तेजस्वी यादव उप मुख्यमंत्री थे। लेकिन कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी होने का दावा जताते हुए अपनी जमीनी हैसियत को उससे ज्यादा बताने की कोशिश कर रही थी और इसी को लेकर विवाद उठ खड़ा हुआ। अपनी ज्यादा हैसियत की धारणा को स्थापित करने के लिए राहुल गांधी ने 16 दिन की वोट अधिकार यात्रा निकाली और वोट चोर गद्दी छोड़ का नारा दिया। लेकिन यात्रा के बाद से राहुल गांधी की जुबान पर वोट चोरी का शब्द आया ही नहीं। और तो और वोट अधिकार यात्रा के बाद वे चार देशों की यात्रा पर निकल लिए और जिस बिहार में चुनाव हो रहा है, वहां आए ही नहीं।
गुरुवार को महागठबंधन की प्रेस कॉन्फ्रेंस का सबको इंतजार था। अभी तक राहुल गांधी तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने को तैयार नहीं थे। कांग्रेस के लोग कहते थे कि यह हमारी स्ट्रेटजी है। यह हम इसलिए नहीं कर रहे हैं कि अगर तेजस्वी को सीएम उम्मीदवार घोषित कर दिया तो लोगों को जंगल राज की याद आ जाएगी। उसके अलावा जो सवर्ण मतदाता कांग्रेस के साथ आ सकता है, वह नहीं आएगा। लेकिन ये सारी स्ट्रेटजी धरी की धरी रह गई। तेजस्वी अड़ गए कि मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं करोगे तो साथ नहीं देंगे। राहुल गांधी को आत्मसमर्पण करना पड़ा और कांग्रेस को घुटने टेकने पड़े।
तेजस्वी यादव ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में जो बात कही, वह सदी का सबसे बड़ा मजाक कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार बनी तो उसका भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस होगा। उनके पिता लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले में 32 साल की सजा हो चुकी है। वह अभी जमानत पर हैं। खुद तेजस्वी यादव, लालू प्रसाद यादव, उनकी मां राबड़ी देवी, बहन मीसा भारती और रेलवे के कुछ अधिकारी जमीन के बदले नौकरी घोटाले में फंसे हैं। इस घोटाले में चार्जशीट फाइल हो चुकी है। तेजस्वी यादव खुद और उनका परिवार कब जेल चला जाएगा किसी को मालूम नहीं है। तेजस्वी यादव ने इसके बारे में कुछ नहीं कहा। तेजस्वी यादव का भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात करना उसी तरह से है, जैसे शैतान वेद वाक्य बोलने लगे। कौन विश्वास करेगा? किस तरह से विश्वास करेगा? उन्होंने पिछले दिनों नारा दिया था कि उनकी सरकार बनी तो हर परिवार से एक व्यक्ति को नौकरी मिलेगी। इससे उन पर क्या बीत रही होगी जिन लोगों ने अपनी जमीन देकर नौकरी ली है। जमीन के बदले नौकरी बिल्कुल ओपन एंड शट केस है। नौकरी दी और जमीन ली गई। यह बिल्कुल सिद्ध बात है। इसमें कहीं कोई शंका नहीं है। जिन्होंने जमीन दी, उनके कागजात हैं। जिनको नौकरी मिली उसके कागजात हैं। इस मामले में पूरे परिवार के लोगों का जेल जाना लगभग तय है। ऐसे में जब तेजस्वी सबको नौकरी की बात कह रहे हैं तो बिहार के लोगों को डर जाना चाहिए। क्योंकि अगर आप तेजस्वी और आरजेडी से सरकारी नौकरी चाहते हैं तो तैयार रहिए अपनी जमीन देने के लिए। तेजस्वी यादव का भ्रष्टाचार पर बोलना ऐसा है, जिस पर किसी के लिए विश्वास करना बहुत ही कठिन है। अच्छा होता तेजस्वी यादव भ्रष्टाचार की बात न करते। क्योंकि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उनकी पार्टी और उनके परिवार का जो ट्रैक रिकॉर्ड है वह पूरे बिहार और देश की जनता को पता है। अभी तो उनके पिता केवल जमानत पर रिहा हैं। सजा पूरी नहीं हुई है और नया मुकदमा तैयार है।
दूसरी बात। बिहार में जो परिस्थिति है, उसमें आरजेडी या महागठबंधन के सत्ता में आने की दूर-दूर तक कोई संभावना नहीं दिख रही है। फिर भी आरजेडी और तेजस्वी यादव के दबाव में राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी झुक गए। सरेंडर कर दिया। यहां तक तो फिर भी समझ में आता है कि व्यावहारिक राजनीति है। कांग्रेस छोटी सी पार्टी हैं, बिहार में उसका कुछ है नहीं। आरजेडी की कृपा से 19 विधायक जीते थे। 70 सीट दी थी। केवल 19 जिता पाए। यह आपका स्ट्राइक रेट था। उससे बेहतर स्ट्राइक रेट सीपीआई एमएल का था। लेकिन आपका राष्ट्रीय पार्टी होने का जो अहंकार है, वो जा ही नहीं रहा है। आपको लगा कि हम राष्ट्रीय पार्टी के नेता हैं। तेजस्वी यादव तो हमारे सामने बहुत जूनियर, बहुत छोटे हैं। उनकी पार्टी बहुत छोटी है। तेजस्वी ने कहा, यह सब नहीं चलेगा बिहार में। आप जो कुछ भी हैं बिहार के बाहर हैं। बिहार में आपकी हैसियत वही है, जो हम तय करेंगे। तो कांग्रेस पार्टी को घोषणा करनी पड़ी तेजस्वी को महागठबंधन का मुख्यमंत्री उमीदवार बनाने की। अशोक गहलोत को भेजा गया। इतनी महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी नहीं आए। 16 दिन बिहार में घूमने के बाद जो बिहार से भागे हैं तो अब तक लौट कर नहीं आए हैं।
कांग्रेस केवल आरजेडी या तेजस्वी के सामने झुक गई होती तो भी ठीक था। एक छोटी सी पार्टी के नेता हैं मुकेश सहनी। उनकी वीआईपी पार्टी का एक भी विधायक नहीं है। वे खुद भी विधायक नहीं हैं। वे कहते घूम रहे थे कि सरकार बनी तो मैं उप मुख्यमंत्री बनूंगा। खैर इस तरह के दावे चुनाव में बहुत से लोग करते हैं। लेकिन वे महागठबंधन की प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं आए। एक घंटा प्रेस कॉन्फ्रेंस लेट करनी पड़ी। अशोक गहलोत व तेजस्वी यादव को उन्हें मनाने जाना पड़ा। जिस होटल में प्रेस कॉन्फ्रेंस थी, उसी में मुकेश सहनी ठहरे हुए थे। उनके कमरे में कांग्रेस पार्टी नतमस्तक हो गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में अशोक गहलोत को बोलना पड़ा कि सरकार बनेगी तो मुकेश सहनी उप मुख्यमंत्री होंगे। मुकेश सहनी की वीआईपी पार्टी जब से बनी है तब से तीन या चार विधायक ही जीत पाए हैं। इनमें से भी तीन भाजपा में शामिल हो गए थे। ये है इस पार्टी का इतिहास। विधानसभा चुनाव में महागठबंधन में शामिल होने की मुकेश की शर्त ही यही थी कि उनको उप मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। तो आज कांग्रेस को मुकेश सहनी तक के सामने सरेंडर करना पड़ा।
बिहार में महागठबंधन की जीत की कोई संभावना नहीं थी। लेकिन यह संभावना जरूर थी कि मुकाबला अच्छा हो सकता है। आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने उस संभावना को भी खत्म कर दिया। आखिर मुकेश सहनी की बिहार की राजनीति में ऐसी कौन सी उपलब्धि है, जिसके कारण उनको उप मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। बिहार चुनाव में बीजेपी और एनडीए को अगर थोड़ी बहुत भी आशंका या चिंता रही हो तो महागठबंधन की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने वो सब दूर कर दी हैं। यह चुनाव 2010 के चुनाव जैसा दिख रहा है और एनडीए को 180 से 200 सीट के बीच या इससे ज्यादा भी मिल जाए तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। यह चुनाव तेजस्वी यादव का बिहार की राजनीति में भविष्य तय करेगा?
ऐसा लगता है कांग्रेस आज जिस हालत में है उसमें भी नहीं रह जाएगी। अब क्या कहना है राहुल गांधी का, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ झूठा आरोप लगाते थे कि ट्रंप ने डराया धमकाया और उन्होंने सरेंडर कर दिया। ट्रम्प की तो बहुत बड़ी हैसियत है। ये मुकेश सहनी की क्या हैसियत है, जिसके सामने राहुल गांधी ने सरेंडर कर दिया। मुकेश सहनी ने बताया कि कांग्रेस अंदर से कितनी कमजोर है। उन्होंने पूरे देश को दिखाया कि कांग्रेस को घुटने पर कैसे ला सकते हैं। राहुल गांधी का गुरूर कैसे तोड़ सकते हैं। अब न तो एसआईआर की चर्चा सुनाई दे रही है और न ही वोट चोरी की। आखिर इस सरेंडर के बाद राहुल बिहार जाकर बोलेंगे क्या? भ्रष्टाचार पर क्या बोलेंगे? 32 साल की सजा पाए हुए नेता के बगल में खड़े होकर भ्रष्टाचार के विरोध में बोलेंगे तो कौन सुनेगा?
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक और आपका अख़बार के संपादक हैं)


