दिल्ली हमले के बाद भारत के अगले कदम पर निगाहें, मुनीर को पंगा बहुत भारी पड़ेगा।
प्रदीप सिंह।
कहावत है कि जब गीदड़ की मौत आती है तो वह शहर की ओर भागता है और जब पाकिस्तान के जनरल या वहां के हुक्मरानों की मौत आती है तो भारत की तरफ भागते हैं। वे भूल गए हैं कि यह पुराना भारत नहीं है। 2014 के बाद भारत बदल गया है। भारत के प्रधानमंत्री जब से नरेंद्र मोदी बने हैं तब से भारत की नीतियां बदल गईं और उसकी सोच बदल गई। ऑपरेशन सिंदूर ज्यादा पुरानी बात नहीं है। मई में जिस तरह का घाव भारत ने पाकिस्तान को दिया था, दूसरा कोई देश होता तो फिर सिर उठाने की हिम्मत न करता, लेकिन कुछ लोग ऐसे बेशर्म होते हैं जिनके बारे में कहावत है कि आंख में सूअर का बाल होता है। तो पाकिस्तान उन्हीं देशों में है। पाकिस्तान कटोरा लेकर पूरी दुनिया में भीख मांग रहा है। अब तो वह कह रहा है कि कर्ज मत दो। हमको दान दो। कर्ज भी मांगने की स्थिति में वह नहीं रह गया है। दान पर चलने वाला देश दुनिया में आतंक को फैला रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने कहा था कि अगली किसी भी आतंकवादी घटना को हम युद्ध की घोषणा मानेंगे। इसीलिए ऑपरेशन सिंदूर को उसने बंद नहीं किया। यही कारण है कि दिल्ली में लाल किले के पास हुए विस्फोट के बाद से पाकिस्तान में गहरी दहशत है। उसे लग रहा है कि भारत की तरफ से कभी भी हमला होगा। पाकिस्तान के संविधान में 27वा संशोधन हो रहा है। जिसके जरिए आसिम मुनीर को सर्वशक्तिमान बना दिया जाएगा। उसके बाद वह आजीवन फील्ड मार्शल और सेना अध्यक्ष रहेगा। उसके खिलाफ कोई मुकदमा नहीं चल सकता। उसको यह पद मिलने के बाद वहां डेमोक्रेटिक ढंग से चुनी हुई तथाकथित सरकार का कोई महत्व नहीं रह जाएगा। इस बीच वहां के छह विपक्षी दलों के गठबंधन ने सड़क पर उतरकर इसका विरोध करने की घोषणा की है। उधर बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी लगातार पाकिस्तान की सेना पर हमला कर रही है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच भी दोहा में चल रही बातचीत फेल हो गई है। अफगानिस्तान तालिबान का कहना है कि हम पाकिस्तान को छोड़ेंगे नहीं और उनके घर में घुसकर मारेंगे।
ऐसे में आसिम मुनीर उस स्थिति में आ गया है कि सिर मुंडाते ही ओले पड़े। ऑपरेशन सिंदूर में बुरी तरह से हारने के बाद भी पाकिस्तान ने उसको फील्ड मार्शल बना दिया और इधर उसकी इज्जत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो-दो तीन-तीन बार उसको खाने पर बुलाकर बढ़ा दी है। हालांकि अमेरिका का लक्ष्य दूसरा है। उसको पाकिस्तान से कोई ज्यादा मतलब नहीं है। उसको मतलब है कि पाकिस्तान उसके कितने काम आ सकता है। अमेरिका का तात्कालिक लक्ष्य अफगानिस्तान का बगराम एयरबेस है। अमेरिका को लगता है कि पाकिस्तान उसे दिलाने में मदद कर सकता है और अगर वह मिल जाएगा तो वहां अमेरिकी सेना के बने रहने में भी मदद कर सकता है। उधर अफगान तालिबान ने सीधे-सीधे घोषणा कर दी है कि बगराम में किसी दूसरे देश का विमान नहीं उतरने देंगे। बगराम एयरबेस पर अगर किसी को छूट मिली है तो सिर्फ भारत को। भारत के फाइटर जेट और इंजीनियर वहां उतर रहे हैं। तालिबान और भारत की दोस्ती लगातार बढ़ती जा रही है। इससे परेशान होकर मुनीर और उसके साथियों का कहना है कि तालिबान जो कुछ कर रहा है वह भारत की शह पर कर रहा है। पाकिस्तान के खैबर पख्तून ख्वा में भी तहरीके तालिबान ने पाकिस्तान के सिर में दर्द किया हुआ है।

आसिम मुनीर के सामने घरेलू फ्रंट पर कई चुनौतियां और समस्याएं हैं, लेकिन ऐसे में उसने भारत से भी पंगा ले लियाा है। पाकिस्तान के जिहादियों ने भारत में जो डॉक्टरों का नया मॉड्यूल बनाया, वे सब पकड़े गए हैं। केवल एक जिहादी डॉक्टर जो लालकिले का पास विस्फोट वाली गाड़ी में बैठा था, वही मारा गया है। अब उसके घर वाले कह रहे हैं कि हमको पता नहीं है। हर आतंकवादी के घर वाले कहते हैं कि हमको पता नहीं और हमारे घर का बच्चा निर्दोष है। लेकिन उसके बारे में उसके साथियों ने जो बताया है, वह बेहद चौंकाता है। फरीदाबाद और अन्य स्थानों से हजारों किलो विस्फोटक अब तक बरामद हो चुका है। आसिफ मुनीर ने शायद अपने घरेलू मोर्चे से ध्यान हटाने के लिए यह आतंकवादी हमला कराया है। उसको उम्मीद है कि भारत अगर इस बार हमला करेगा तो अमेरिका उसका साथ देगा। तुर्की पहले से साथ दे रहा है। सऊदी अरब से समझौता हुआ है इसलिए सऊदी अरब भी साथ देगा, लेकिन सऊदी अरब उसके कटोरे में भीख डालने के अलावा कुछ नहीं करने वाला। सऊदी अरब के पास अपनी कोई फौज नहीं है। वह पाकिस्तान की फौज को किराए पर लेता है। सऊदी अरब हथियार के लिए अमेरिका पर निर्भर है। उसके पास तेल और पैसे के अलावा और कुछ नहीं है। तो इसलिए सऊदी अरब पाकिस्तान की कोई मदद कर पाएगा, इस बारे में कोई गलतफहमी नहीं होनी चाहिए और सऊदी अरब को पाकिस्तान से ज्यादा भारत से संबंध की जरूरत है, यह भी बात स्पष्ट है।
दिल्ली विस्फोट के बाद अब पाकिस्तान के टेलीविजन चैनल्स, सोशल मीडिया और वहां की सरकार में दहशत है कि भारत का अगला कदम क्या होगा। वे कह रहे हैं- भारत को यह नहीं करना चाहिए कि इस आतंकवादी हमले के तार पाकिस्तान से जोड़ दे। उनको डर लगा हुआ है कि अब भारत जरूर हमला करेगा। पाकिस्तान पर पिछला हमला हमारी एयरफोर्स ने लीड किया था और इस बात के पर्याप्त संकेत हैं कि अगला हमला हमारी नेवी लीड करेगी और इस बार हमारी थल सेना चुपचाप नहीं बैठेगी। इस बार भारत केवल एयरबेस और आतंकी संगठनों के हेड क्वार्टर उड़ाकर संतुष्ट नहीं होने वाला। इस बार पाकिस्तान का टूटना तय है। कितने टुकड़ों में? कितना हिस्सा यह बाद में तय होना है। यह बात भी हम लोगों को समझ लेनी चाहिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाने जा रही है। बहुत सोच समझकर रणनीतिक ढंग से प्लान करके हमला होगा। ऑपरेशन सिंदूर के समय जो हमारी सैन्य ताकत थी, उससे आज कई गुना बढ़ चुकी है। हमारी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जो भी कमियां दिखी थीं, उन सबको दुरुस्त कर लिया गया है। चाहे थल सेना हो, चाहे वायु सेना हो या या नौसेना, हर क्षेत्र में भारत ने ताकत बढ़ाई है। टेक्नोलॉजी खासकर सेटेलाइट का इस्तेमाल भारत अब ज्यादा प्रभावी तरीके से कर सकता है। अब भारत को पता चल गया है कि पाकिस्तान के पास जो अमेरिकी परमाणु हथियार हैं, वो कहां है और उन पर वो कैसे हमला कर सकता है। तो इसलिए कोई भी पाकिस्तान को बचाने की कोशिश करेगा उससे भारत रुकने वाला नहीं है। डोनाल्ड ट्रंप दावा कर रहे हैं कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर रुकवा दिया। अब उनको पता चलेगा कि उनकी रुकवाने की ताकत कितनी है। जब ऑपरेशन सिंदूर का दूसरा चरण शुरू होगा तो आसिम मुनीर को पता चलेगा कि दिल्ली में धमाका करके उसने अपनी मौत को न्योता दिया है।
इस युद्ध के दौरान भारत की नजर दो देशों पर होगी। इजराइल और रूस। इजराइल और रूस भारत के खिलाफ कभी नजाएंगे, लेकिन सवाल यह है कि कितना साथ देंगे?हीं रूस खुद युद्ध में फंसा है, इजराइल भी फंसा है। इसके बावजूद दोनों देश भारत की मदद कर रहे हैं। अब इस युद्ध में जो कि होना अवश्यभावी है, इजराइल और रूस की कितनी भूमिका होगी और वे कितना भारत के सहायक के रूप में होंगे, यह देखने वाली बात होगी। हालांकि अब भारत इतना आत्मनिर्भर हो चुका है कि अगर इन देशों की कोई बड़ी मदद नहीं मिलती है तो भी भारत की नेवी ने मोर्चा संभाला तो पाकिस्तान की नेवी का नामोनिशान मिट जाएगा। और थल सेना अगर मैदान में उतरी तो आप मान कर चलिए कि पाकिस्तान का एक बड़ा हिस्सा भारत में शामिल हो जाएगा। तो यह लड़ाई ऑपरेशन सिंदूर की तरह सीमित नहीं होने वाली है। लेकिन यह बहुत लंबी भी नहीं चलने वाली है। भारत अपना लक्ष्य तय करता है। लक्ष्य हासिल करता है और फिर कहता है कि हो गया हमारा काम। तो भारत को मालूम है कि उसे क्या हासिल करना है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत को लगा था कि अब पाकिस्तान हिम्मत नहीं करेगा। लेकिन अमेरिका का जो साथ मिला है, उसके बाद पाकिस्तान का हौसला बढ़ गया है। और यह बात भी मानकर चलिए कि चीन पाकिस्तान की मदद में खुलकर कभी सामने नहीं आएगा। लेकिन वह यह जरूर चाहेगा कि भारत का ज्यादा से ज्यादा नुकसान हो। वह चाहेगा कि लड़ाई लंबी खिंचे, जो भारत के हित में नहीं है। बुधवार को सीसीएस की बैठक में दिल्ली धमाके के बाद के एक्शन प्लान को लेकर रणनीति बनी है। अगला कदम कब उठेगा, तो इसके लिए इंतजार कीजिए समय का। पाकिस्तान को जब से उसका जन्म हुआ है तब से अब तक का सबसे बड़ा सदमा पहुंचने वाला है।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक और ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)


