भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने मंगलवार को एडिशनल सेशन जज को 15 लाख रुपये की रिश्वत मांगने के मामले में “भगोड़ा” घोषित किया और जज के क्लर्क को भी शिकायतकर्ता के पक्ष में एक व्यावसायिक मुकदमे का फैसला करने के लिए उक्त राशि स्वीकार करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।

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एसीबी, मुंबई कार्यालय द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, शिकायतकर्ता का व्यावसायिक मुकदमा एजाजुद्दीन काजी (55) की अदालत में सूचीबद्ध था। एडिशनल सेशन जज के पास 10 करोड़ रुपये से कम मूल्य के व्यावसायिक मुकदमों की सुनवाई करने का अधिकार है।

‘लाइव लॉ’ की  रिपोर्ट के अनुसार जब मामला काजी की अदालत में सूचीबद्ध होने आया तो उक्त अदालत में क्लर्क के रूप में कार्यरत चंद्रकांत वासुदेव ने शिकायतकर्ता से संपर्क किया और शुरुआत में 25 लाख रुपये की मांग की। क्लर्क ने शिकायतकर्ता से कहा कि 25 लाख रुपये की इस राशि में से वह केवल 10 लाख रुपये रखेगा और शेष 15 लाख रुपये जज के लिए होंगे।

हालांकि, जब शिकायतकर्ता ने अनिच्छा दिखाई तो वासुदेव ने राशि घटाकर 15 लाख रुपये की। यह राशि ‘अनुकूल’ आदेश के बदले में मांगी गई। रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़े गए क्लर्क ने कहा कि उसने जज के निर्देश पर यह राशि स्वीकार की थी।

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रिश्वत देने से इनकार करने पर शिकायतकर्ता ने एसीबी, मुंबई इकाई में शिकायत दर्ज कराई और फिर अधिकारियों ने जाल बिछाकर वासुदेव को पैसे लेते समय मौके से ही गिरफ्तार कर लिया।

एसीबी की विज्ञप्ति में कहा गया कि रिश्वत की राशि स्वीकार करने के बाद वासुदेव ने तुरंत काजी को फोन किया और उन्हें स्वीकार की गई राशि के बारे में बताया और यह भी भ्रष्टाचार विरोधी अधिकारियों ने अपनी FIR में दर्ज कर लिया।

तदनुसार, वासुदेव और काजी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (पीसी) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। चूंकि काजी का पता नहीं चल पाया है, इसलिए एसीबी ने उसे “वांछित भगोड़ा” घोषित कर दिया।