आपका अखबार ब्यूरो।
इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) के कलादर्शन प्रभाग के दो-दिवसीय वार्षिक दिवस समारोह शानदार प्रदर्शनियों और संगीत-नृत्य प्रस्तुतियों के साथ संपन्न हुआ। समारोह का शुभारंभ आईजीएनसीए के अध्यक्ष श्री रामबहादुर राय, सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी, संस्कार भारती के अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्री अभिजीत गोखले, सिक्किम विश्विद्यालय के कुलपति प्रो. एस.के. स्वाइन और आईजीएनसीए के कलादर्शन प्रभाग की अध्यक्ष प्रो. ऋचा कॉम्बोज ने दीप प्रज्वलित कर किया।

इसके बाद, श्री रामबहादुर राय ने संस्कार भारती के सहयोग से कलादर्शन प्रभाग द्वारा आयोजित अनूठी प्रदर्शनी ‘सौहार्द’ का उद्घाटन किया, जिसमें भारत के सांस्कृतिक स्थलों और पंढरपुर वारी यात्रा से जुड़े मनोरम चित्र प्रदर्शित किए गए हैं। इसके साथ ही, एक और अनूठी प्रदर्शनी ‘पूर्वोत्तर भारतीय राज्यों के सांस्कृतिक परिदृश्य में सुषिर वाद्यों की संरचना और स्वरूप’ का उद्घाटन भी किया गया। कलादर्शन प्रभाग द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी के क्यूरेटर हैं सिक्किम विश्वविद्यालय के संगीत विभाग (बांसुरी) के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार। इसमें पूर्वोत्तर राज्यों के अनूठे वाद्ययंत्र प्रदर्शित किए गए हैं, जिसमें सिक्किम का वाद्ययंत्र लेप्चा, असम का बांसुरी जैसा वाद्य सिफुंग और शहनाई जैसा वाद्य तंगमुरी सहित दर्जनों अन्य इंस्ट्रूमेंट शामिल हैं। आईजीएनसीए के दर्शनम् गैलरी में लगी ये प्रदर्शनियां 21 नवंबर, शाम 6 बजे तक दर्शकों के लिए खुली रहेंगी।

कलादर्शन के वार्षिक दिवस के उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने की, जबकि विशिष्ट अतिथि थे श्री अभिजीत गोखले और प्रो. एस.के. स्वाइन।

प्रदर्शनियों के बाद शुरु हुआ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला। उद्घाटन दिवस की पहली प्रस्तुति थी सारंगी वादन। आईजीएनसीए के समवेत सभागार में सेनिया घराने के अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त सारंगी वादक उस्ताद कमाल साबरी ने अपनी अद्भुत प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। इस प्रस्तुति का आयोजन आईजीएनसीए के एनएमसीएम प्रभाग ने किया था। दिन की अंतिम प्रस्तुति थी ‘दिव्य रास’। संगीता चट्टर्जी एवं कल्पतरु डांस एन्सेम्बल ने राधा-कृष्ण की लीलाओं को नृत्य और संगीत के माध्यम से जीवंत कर दिया। इस प्रस्तुति ने सचमुच दर्शकों को दिव्यता का अनुभव प्रदान किया।

आयोजन के दूसरे दिन, 20 नवंबर को विदुषी डॉ. सुभद्रा देसाई ने हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत और सुश्री आभा श्रीवास्तव व उनके समूह  ने बुंदेलखंड का बधाई नृत्य प्रस्तुत किया।


वार्षिक दिवस समारोह में कला, संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक विमर्श की समृद्ध परम्पराओं को एक ही मंच पर प्रस्तुत किया गया। प्रदर्शनी से लेकर संध्या की प्रस्तुतियों तक, कार्यक्रमों ने भारतीय संस्कृति की विविधता, सृजनशीलता और गहन सौंदर्य को उजागर किया। प्रदर्शनियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने पूरे आयोजन को उत्सव का स्वरूप प्रदान किया। कला दर्शन का वार्षिक आयोजन का पहला दिन कला और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण प्रयास रहा।