‘तेरे इश्क में’ धनुष-कृति सेनन की जोड़ी और इंटेंस लव स्टोरी।

तहज़ीब हाफी का एक शे”र है: “ये फिल्मों में ही सबको प्यार मिल जाता है आखिर में/ मगर सचमुच में इस दुनिया में ऐसा कुछ नहीं होता।” ‘तेरे इश्क में’ एक गुस्सैल लेकिन प्रेम में डूबे इंसान की कहानी है। बॉलीवुड हंगामा न्यूज़  नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार इस फिल्म में शंकर गुरुक्कल (धनुष), दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र संघ DUSU के अध्यक्ष है। उसका स्वभाव बाग़ी और हिंसक है। मुक्ति बेहनिवाल (कृति सेनन) उसी कॉलेज की छात्रा है। वह अपनी पीएचडी थीसिस में यह सिद्ध करना चाहती है कि हिंसक प्रवृत्ति वाले आदमी को सही तरीके से संभाला जाए तो वह पूरी तरह बदलकर शांतिप्रिय इंसान बन सकता है। इसी दौरान शंकर एक छात्र का पीछा करते हुए हंगामा कर देता है। प्रोफेसर इस घटना के आधार पर कहते हैं कि कुछ लोग कभी नहीं बदलते। मुक्ति चुनौती लेती है कि वह शंकर को बदलेगी। इस पर बात बनती है कि अगर वह ऐसा कर लेती है तो उसकी थीसिस पास कर दी जाएगी। शुरुआत में शंकर तैयार नहीं होता, पर बाद में मान जाता है। बदलते-बदलते वह मुक्ति से गहरा प्यार करने लगता है। वह अपने व्यवहार में भी बड़ा बदलाव ला देता है और मुक्ति अपनी पीएचडी पूरी कर लेती है। यहीं शंकर को एहसास होता है कि मुक्ति की भावनाएँ उसके लिए वैसी नहीं हैं जैसी उसकी मुक्ति के लिए। यह उसे तोड़ देता है और वह दुनिया पलट देने का फैसला करता है। 7 साल बाद दोनों की मुलाक़ात फिर होती है, और यहीं से कहानी का दूसरा हिस्सा शुरू होता है।

हिमांशु शर्मा और नीरज यादव की कहानी मौजूदा ट्रेंड के बिल्कुल अनुरूप है एक दिल-टूटा हुआ आदमी, जो अपनी मंज़िल पाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ता। उनकी पटकथा कई हिस्सों में दिलचस्प और बांधकर रखने वाली है, लेकिन एक बिंदु के बाद यह थोड़ी उलझी हुई भी लगने लगती है। दोनों के डायलॉग्स फिल्म की खासियत हैं और ड्रामा तथा हास्य को मजबूती देते हैं।

आनंद एल राय का निर्देशन प्रभावी है। वह फिल्म की शुरुआत एक निर्णायक घटना से करते हैं और फिर कहानी फ्लैशबैक में चली जाती है, जिससे दर्शकों की जिज्ञासा बनी रहती है कि आखिर दोनों किरदारों के बीच क्या गलत हुआ। कुछ दृश्य ऐसे भी हैं जो धनुष के साउथ इंडियन प्रशंसकों को ध्यान में रखकर फिल्माए गए लगते हैं लेकिन वे कहानी में फिट बैठते हैं।

ड्रामा निर्माण में आनंद एल राय बेहतरीन काम करते हैं। कुछ दृश्य तो अपने निष्पादन और मौलिकता के चलते खास बन जाते हैं जैसे मुक्ति का शंकर से अपना ‘सब्जेक्ट’ बनने के लिए कहना, डरपोक आदमी को शंकर को थप्पड़ मारने के लिए कहना, बार में होने वाला पागलपन भरा दृश्य, मुक्ति का शंकर के घर पहुँचना और इंटरवल से ठीक पहले का पल। सेकेंड हाफ की शुरुआत भी अच्छी होती है, खासकर शंकर के पिता राघव (प्रकाश राज) के हिस्से के दृश्य याद रह जाने वाले हैं।

वहीं कमियों की बात करें तो, फिल्म का दूसरा भाग कमजोर पड़ता है। कई घटनाएँ अत्यधिक सुविधाजनक ढंग से घटती हैं और फ़र्स्ट हाफ जितनी असरदार नहीं लगतीं। वर्तमान समय वाली कहानी में प्लॉट थोड़ा उलझा हुआ भी महसूस होता है । सिनेमैटिक स्वतंत्रता (cinematic liberties) भी बहुत अधिक ले ली गई हैं जैसे घायल शंकर का आसानी से एक IAS अधिकारी के घर में घुस जाना (जबकि इस जगह पर कुछ दिन पहले हमला हुआ था और यहाँ भारी सुरक्षा होनी चाहिए थी), या एक डिप्रेशनग्रस्त, शराबी, गर्भवती महिला को ऊँचाई वाले इलाके में भेज देना । फिल्म का क्लाइमैक्स भी जरूरत से ज्यादा लंबा खिंचता है इसे प्रभावशाली बनाया गया है, लेकिन इसका प्रभाव उतना गहरा नहीं बैठता।

तेरे इश्क में की सबसे बड़ी ताकत धनुष और कृति सेनन का दमदार अभिनय है। धनुष ने शंकर के रूप में बेहद प्रभावशाली परफॉर्मेंस दिया है। उन्होंने गुस्से और भीतर छिपी नाज़ुक भावनाओं-दोनों को बड़ी सहजता से परदे पर उतारा है। कृति सेनन ने अपने करियर के सबसे बेहतरीन अभिनय में से एक प्रस्तुत किया है। उनका किरदार जटिल है, और साथ ही यह चुनौती भी थी कि इतने शक्तिशाली परफॉर्मर्स के बीच वह दब न जाएँ। वह दोनों मोर्चों पर सफल होती हैं। प्रकाश राज सपोर्टिंग रोल में मजबूत छाप छोड़ते हैं। तोता रॉय चौधरी (यशवंत बेहनिवाल) हिंदी दर्शकों के लिए एक सुखद सरप्राइज साबित होंगे जो उन्हें रॉकी और रानी की प्रेम कहानी (2023) के प्यारे पापा के रूप में याद करते हैं। प्रियांशु पैंयूली (वेद; शंकर का सबसे अच्छा दोस्त) भी अच्छे लगते हैं। चित्तरंजन त्रिपाठी और जया भट्टाचार्य अपने-अपने किरदारों में ठीक हैं। परमवीर चीमा (जसजीत) और अबीर का किरदार निभाने वाले अभिनेता औसत प्रदर्शन देते हैं। विनीत कुमार सिंह (वी शेखावत) स्पेशल अपियरेंस में शानदार हैं। आशीष वर्मा का किरदार कमज़ोर लिखा गया है और लगता है कि उनके कई दृश्य एडिट कर दिए गए। मोहम्मद ज़ीशान अयूब (मुरारी) मनोरंजक हैं अब देखना यह है कि दर्शक उन्हें रांझणा (2013) से जोड़ पाएंगे या नहीं।

Dhanush wraps up Aanand L Rai's Tere Ishk Mein, Kriti Sanon pens heartfelt  note : Bollywood News - Bollywood Hungama

ए. आर. रहमान का संगीत फिल्म के प्रभाव को और बढ़ा देता है। हालाँकि, सबसे अधिक सराहा गया टाइटल ट्रैक फिल्म में पूरी तरह नहीं बजाया गया है। दोनों ‘जिगर ठंडा’ वर्ज़न बेहद प्रभावशाली हैं। ‘चिन्नावारे’ इसलिए खास बन जाता है क्योंकि यह एक पूरी तरह तमिल गाना है, वह भी एक हिंदी फिल्म में। ‘लड़की जैसी’ याद रह जाने वाला गीत है। इसके अलावा, ‘आवारा अंगारा’ और ‘उसे कहना’ भी अच्छी तरह से कंपोज़ और प्लेस किए गए हैं। रहमान का बैकग्राउंड स्कोर इस तरह की फिल्म के लिए बिल्कुल उपयुक्त है।

तुषार कांती राय की सिनेमैटोग्राफी ठीक-ठाक है। नितिन जहानी चौधरी का प्रोडक्शन डिज़ाइन आकर्षक है और यथार्थवाद बनाए रखता है। कृति सेनन के लिए रूषि शर्मा और मनोशी नाथ के बनाए कपड़े स्टाइलिश हैं। धनुष के लिए काव्या श्रीराम द्वारा तैयार किए गए कॉस्ट्यूम उनके वर्ग और अंदाज़ को सही ढंग से दर्शाते हैं। रक्षिता शर्मा के बाकी कॉस्ट्यूम भी अच्छे हैं। सुनील रॉड्रिग्स का एक्शन न तो ओवर-द-टॉप है और न ही जरूरत से ज्यादा हिंसक। रेड चिलीज डॉट वीएफएक्स का काम कुछ दृश्यों में और बेहतर हो सकता था। हेमल कोठारी और प्रकाश चंद्र साहू की एडिटिंग थोड़ी और स्मूद तथा टाइट हो सकती थी।

कुल मिलाकर, तेरे इश्क में एक इंटेंस प्रेम कहानी है, जिसे दमदार ड्रामाई क्षणों और धनुष व कृति सेनन के मजबूत अभिनय का सहारा मिलता है। लेकिन इसकी लंबी अवधि और कमज़ोर सेकेंड हाफ इसके प्रभाव को काफी कम कर देते हैं।