मोदी की लगातार ऊंची होती उड़ान के आगे बेबस और बेदम विपक्ष।
प्रदीप सिंह।
नरेंद्र मोदी जैसा नेता इस देश में कभी नहीं हुआ। यह बात मैं केवल इसलिए नहीं कह रहा हूं कि वह 11 साल से ज्यादा समय से देश के प्रधानमंत्री हैं और उससे पहले करीब 13-14 साल गुजरात के मुख्यमंत्री रहे। वे कभी विधायक नहीं बने सीधे मुख्यमंत्री बने और 2014 से पहले कभी लोकसभा या राज्यसभा का सदस्य नहीं रहे सीधे प्रधानमंत्री बने। पिछले 24 साल से ज्यादा समय से वह लगातार सत्ता में हैं। अपने जीवन में आज तक कोई चुनाव हारे नहीं हैं और उनके नेतृत्व में लड़ा गया चुनाव चाहे गुजरात विधानसभा का हो और चाहे लोकसभा का हो, पार्टी हारी नहीं है। इस तरह का रिकॉर्ड आप बताइए और किस नेता का है?
जो नेता वोट दिलाने की ताकत रखता हो,पार्लियामेंट्री डेमोक्रेसी में उसी नेता की ताकत को असली ताकत माना जाता है। आप कितने बुद्धिमान हैं? कितने पढ़े लिखे हैं? वह सब बाद में आता है। पहला सवाल आता है कि क्या आप में वोट दिलाने की क्षमता है? और नरेंद्र मोदी 24 साल से यह बात साबित कर रहे हैं। देश में कोई ऐसा नेता नहीं हुआ, जो लगातार 24 साल तक लोकप्रियता के अपने ऊंचे पायदान पर न केवल बना रहा हो बल्कि लगातार नई ऊंचाई पर पहुंचता गया हो। आजकल तो स्थिति यह है कि छह महीने या साल भर के लिए भी कोई सत्ता में रहे तो कोई न कोई दाग लग जाता है। 24 साल सत्ता में रहना और बेदाग बने रहना यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। मोदी से पहले अटल जी को छोड़ दीजिए तो इस देश में कोई ऐसा प्रधानमंत्री नहीं हुआ, जिस पर या उसकी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप न लगे हों। हालांकि आप यह मानकर नहीं चल सकते कि देश से भ्रष्टाचार खत्म हो गया है या सरकार से भ्रष्टाचार खत्म हो गया है, लेकिन भ्रष्टाचार और नरेंद्र मोदी दो विपरीत ध्रुव हैं,यह आम जनता मानती है। किसी भी नेता के लिए सबसे मुश्किल होता है अपनी लोकप्रियता और विश्वसनीयता को बनाए रखना। सत्ता संभालने के साथ ही नरेंद्र मोदी के सामने चुनौतियां आनी शुरू हो गई थीं। गुजरात में भुज के भूकंप के बारे में पूरी दुनिया जानती है कि कितनी बड़ी तबाही हुई थी। उस दौरान केशु भाई पटेल की सरकार को जिस तरह से काम करना चाहिए था,नहीं कर पाई। उस परिस्थिति में नरेंद्र मोदी को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाकर भेजा गया। सत्ता संभालते ही उन्होंने भुज में जो किया, पूरी दुनिया ने उसका लोहा माना। आज गुजरात के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में कोई जगह है तो उसका नाम भुज है। उसके बाद फरवरी 2002 में गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के दो डिब्बों, जिनमें कार सेवक अयोध्या से आ रहे थे,को जला दिया गया। सब के सब जलकर मर गए। उसकी प्रतिक्रिया में गुजरात में दंगे शुरू हो गए। मोदी ने उस समय अपने पड़ोसी राज्यों राजस्थान और मध्य प्रदेश से पुलिस की मांग की,लेकिन चूंकि वहां कांग्रेस सरकारें थीं तो दोनों ने मना कर दिया। धीरे-धीरे दंगे पर काबू पाया गया। 2002 में हुए दंगे के बाद से आज 23 साल हो गए लेकिन गुजरात में एक भी सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ। मोदी ने राज्य को दंगामुक्त बना दिया। 2002 से पहले गुजरात में सांप्रदायिक दंगों का लंबा इतिहास था। हर साल दंगे होते थे। लेकिन इसका श्रेय कोई नरेंद्र मोदी को नहीं देता।

अब सवाल यह है कि नरेंद्र मोदी की आखिर यह उड़ान लगातार ऊंची क्यों होती जा रही है? सत्ता में जो आता है कुछ समय के बाद उसकी लोकप्रियता में कमी आना शुरू हो जाती है। नरेंद्र मोदी एकमात्र उदाहरण हैं, सत्ता में जैसे-जैसे समय बीत रहा है उनकी लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। मुझे एक जगह रेवन नाम के एक पक्षी के बारे में पढ़ने को मिला। यह कौवे से आकार में थोड़ा बड़ा और इसका काला रंग बड़ा चमकीला होता है। इसको दोहरे चरित्र वाला भी माना जाता है। यह बाज की पीठ पर सवार हो जाता है और उसकी गर्दन पर लगातार चोंच मारता रहता है। अब बाज चाहता तो इसको झटककर गिरा देता या इसको मारने की कोशिश करता। लेकिन बाज ऐसा कुछ नहीं करता। वह अपनी उड़ान को ऊंचा करता जाता है और ऐसी ऊंचाई पर पहुंच जाता है जहां ऑक्सीजन का लेवल बहुत कम हो जाता है और यह रेवन पक्षी ऑक्सीजन की कमी से मर जाता है। मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में बाज का यही गुण ह। जब वह मुख्यमंत्री थे तभी से लगातार उन पर हमले होते रहे। मौत का सौदागर से लेकर और न जाने क्या-क्या कहा गया। केंद्र की मनमोहन सिंह सरकार ने उन्हें दंगों में फंसाने की कोशिश की। अमित शाह, जो उनके करीबी थे, उनको झूठे केस में जेल भेजा गया। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गुजरात दंगों की जांच हुई और एसआईटी की रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नरेंद्र मोदी को बाइज्जत बरी कर दिया गया। उनके खिलाफ कोई प्रमाण नहीं मिला। यह कोई आसान लड़ाई नहीं थी। वह पहले मुख्यमंत्री बने, जिनसे 10-12 घंटे तक एसआईटी ने पूछताछ की। आजकल किसी एक नेता की किसी छोटे से मामले में भी गिरफ्तारी हो जाए तो प्रदर्शन, धरना,पत्थरबाजी,तोड़फोड़ सब हो जाता है। नरेंद्र मोदी से पूछताछ के दौरान एक भी विरोध प्रदर्शन नहीं हुआ। उस समय के गृह मंत्री पी चिदंबरम और सोनिया गांधी ने पूरी ताकत लगा दी थी कि किसी तरह से मोदी को जेल भेज दिया जाए लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। नरेंद्र मोदी इस सब के दौरान लगातार अपनी उड़ान को ऊंचा करते गए। गुजरात को उन्होंने डेवलपमेंट का एक मॉडल बना दिया। उसकी चर्चा पूरी दुनिया में होने लगी। एक धारणा बन गई कि देश के सभी राज्यों और केंद्र को भी उसका अनुकरण करना चाहिए। मोदी की ऊंची उड़ान से उनके विरोधी ऑक्सीजन की कमी से धरती पर गिर पड़े। केंद्र में सत्ता परिवर्तन हो गया। तब से वह उठ नहीं पाए हैं। मोदी आज देश के प्रधानमंत्री ही नहीं,वैश्विक नेता हैं। दुनिया के सारे देश उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखते हैं। उन्हें उम्मीद रहती है कि दुनिया में कहीं समस्या है तो मोदी उसको सुलझा सकते हैं। मोदी ने भारत को ग्लोबल साउथ का लीडर बना दिया है। आज हर देश भारत से संबंध और व्यापार बढ़ाना चाहता है। ब्रिटेन जिसने 200 साल हमारे ऊपर राज किया, उसने भारत से फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किया है। हमने ब्रिटेन की इकॉनमी को पीछे छोड़ दिया है। भारत जिस तरह से आर्थिक और सैनिक क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहा है,वह पूरी दुनिया के लिए आश्चर्य का विषय है। यह मोदी की साख का ही असर है कि आज देश में विपक्ष की विश्वसनीयता निम्नतर स्तर पर है।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक और ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)



