डॉ. संतोष कुमार तिवारी।
एक बार गोस्वामी तुलसीदास जी के बांह में बहुत दर्द हुआ था। तब उन्होंने ‘हनुमान बाहुक’ लिखी। ‘हनुमान बाहुक’ में ईश्वर से तुलसीदासजी की प्रार्थना है कि मेरी बांह का दर्द दूर कर दें। और उनकी बांह का दर्द दूर हो गया।
आज से कोई बीस-बाइस वर्ष पहले की बात है। मैं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नेट का पेपर सेट करने के लिए दिल्ली गया था। यूजीसी ने मेरे रुकने की व्यवस्था संस्कृत विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस में की थी। उस गेस्ट हाउस में मेरी मुलाकात डॉ. शिव बहादुर सिंह से हुई। वह भी उसी गेस्ट हाउस में रुके थे। वह गोमती नगर लखनऊ के रहने वाले थे। और मेरे पापाजी श्री गया प्रसाद तिवारी जी ‘मानस’ (1921 – 2009) को भी जानते थे। जहां तक मुझे याद पड़ता है कि उन्होंने यह बताया था कि वह कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग (आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट) से प्रोफेसर के तौर पर सेवानिवृत्त हैं। वह बहुत विद्वान व्यक्ति थे। उनकी एक पुस्तक ‘नवाबों के पहले का लखनऊ’ मैंने भी पढ़ी। इस पुस्तक का प्रकाशन हिंदी वांग्मय लखनऊ ने किया।
बातचीत के दौरान डॉ. सिंह ने मुझे बताया कि एक बार वह अयोध्या गए हुए थे और उनकी बांह में बहुत दर्द था। तो अयोध्या में एक मंदिर में संगमरमर की बहुत बड़ी प्लेट लगी हुई थी और उस पर ‘हनुमान बाहुक’ लिखी हुई थी। तो उन्होंने उसको पढ़ा वहीं पर और उनकी बांह का दर्द दूर हो गया। डॉ. शिव बहादुर सिंह अब इस दुनिया में नहीं हैं।

कई वर्ष बाद एक बार रांची में मेरी भी बांह में बहुत तेज दर्द हो रहा था। लोगों ने मुझे तरह-तरह की सलाह दी कि ये मरहम लगा लो या वो स्प्रे छिड़क लो, तो उससे दर्द दूर हो जाएगा। लेकिन मैंने ऐसा कुछ नहीं किया। मुझे डॉ. शिव बहादुर सिंह की बात याद थी। मुझे उसी दिन रांची से नाशिक जाना था। नासिक पहुंचकर मैंने ‘हनुमान बाहुक’ पढ़ी। और एक बार पढ़ने से ही मेरी बांह का दर्द दूर हो गया। …लेकिन, यह सब आस्था का विषय है।
गीता प्रेस, गोरखपुर ने ‘हनुमान बाहुक’ प्रकाशित की है। इस पुस्तिका का गीता प्रेस द्वारा एक सौ से अधिक बार रिप्रिंट अर्थात पुनर्मुद्रण हो चुका है और इसकी 28 लाख से अधिक प्रतियां अब तक बिक चुकी हैं।
गीता प्रेस के अतिरिक्त अन्य प्रकाशकों ने भी इस इस पुस्तिका को प्रकाशित किया होगा। सबकी जानकारी मुझे नहीं है। गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित ‘हनुमान बाहुक’ का इस समय मूल्य सात रुपए है।
(लेखक सेवानिवृत्त प्रोफेसर हैं।)



