केंद्रीय गृहमंत्री के खिलाफ धमकी भरा बयान उनकी हताशा दिखा रहा।
प्रदीप सिंह।
पतीली में जो चावल पक रहा है,उसका एक दाना निकाल कर देखिए तो पता चल जाता है चावल पक गया है या नहीं। सारे दानों को देखने की जरूरत नहीं पड़ती है। इसी तरह से राजनीति में कभी-कभी एक बयान ऐसा होता है,जो राजनीति का भविष्य बता देता है और चुनाव के समय अगर ऐसा बयान आए तो वह चुनाव के नतीजे की ओर भी इशारा कर देता है। ऐसा ही बयान दिया है पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने। उन्हें मुख्यमंत्री पद पर करीब 15 साल होने जा रहे हैं। जिस नेता ने सड़क पर जान की बाजी लगाकर पार्टी को खड़ा किया हो,पार्टी को आगे बढ़ाया हो,लोकप्रिय बनाया हो, उस नेता की ओर से अगर इस तरह का बयान आए तो समझिए कि सब कुछ ठीक नहीं है। नेता के अंदर जब हताशा और निराशा दिखेगी तो आप समझ सकते हैं कि कैडर की क्या हालत होगी।

पश्चिम बंगाल के चुनाव के बारे में अगर आज आप किसी से भी पूछेंगे,भले ही वह भाजपा समर्थक हो,तो कहेगा कि भाजपा का जीतना आसान नहीं है। ममता बनर्जी का नाम लेते ही बताएगा कि वे जमीनी नेता हैं,जनाधार है और जहां तक वेलफेयर योजनाओं का सवाल है,वह भाजपा से किसी मामले में पीछे नहीं हैं। भाजपा यहां सालों से कोशिश कर रही है। 2014 में जब नरेन्द्र मोदी भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बनाए गए थे तब लोगों को लग रहा था कि उनकी लोकप्रियता के कारण पश्चिम बंगाल में भाजपा बहुत अच्छा करेगी, लेकिन उसे सिर्फ दो सीटें मिली थीं। इस घटना ने साबित किया कि नेता की लोकप्रियता चुनावी सफलता की गारंटी नहीं बनती जब तक कि आपका मजबूत संगठन न हो। इसके बाद 2016 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को सिर्फ तीन सीटें मिलीं। उसके बाद आया 2019 का लोकसभा चुनाव। यहां से भाजपा ने पश्चिम बंगाल में मजबूत दस्तक दी,जब उसने सीपीएम और कांग्रेस दोनों को हाशिए पर धकेल दिया। 2019 में उसे दो से सीधे 18 लोकसभा सीटें मिलीं। वहां से पश्चिम बंगाल की राजनीति को बीजेपी ने दो ध्रुवीय बना दिया। फिर 2021 का विधानसभा चुनाव आया। 2019 के लोकसभा चुनाव में बेहतरीन प्रदर्शन की नींव पर भाजपा को लग रहा था कि अट्टालिका खड़ी हो जाएगी। अट्टालिका खड़ी तो हुई लेकिन भाजपा की उम्मीद के मुताबिक नहीं। बीजेपी तीन से 77 पर पहुंच गई लेकिन सत्ता से बहुत दूर रह गई। 2019 में उसे 41% वोट मिले थे जबकि 2021 में उसको 38% से ज्यादा वोट मिले। तब से पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस को टक्कर देने वाली पार्टी भाजपा ही है। कांग्रेस और लेफ्ट पार्टीज ने कुल मिलाकर राज्य में 64 साल राज किया है,आज हालत यह है कि इन दोनों पार्टियों का एक भी विधायक पश्चिम बंगाल विधानसभा में नहीं है।

तृणमूल कांग्रेस कांग्रेस पार्टी से ही निकली हुई है। ममता बनर्जी ने कांग्रेस का सारा जनाधार और सीपीएम का सारा सिस्टम ले लिया। जो लोग सीपीएम के लिए कटमनी लेते थे,गुंडागर्दी करते थे, वसूली करते थे,वे टीएमसी के लिए करने लगे। ममता बनर्जी की लोकप्रियता,उनके जुझारूपन, महिला मतदाताओं पर उनकी पकड़ ने उनको एक तरह से अजेय बना दिया था। उनके सत्ता में आने के बाद से यह पहला चुनाव होने जा रहा है जब ममता बनर्जी अजेय नहीं दिख रही हैं। और यह बात मैं उनके बयान के आधार पर कह रहा हूं। जो नेता जमीन से जुड़ा होता है और अगर उसमें कॉन्फिडेंस हो तो वह अपनी बात कहता है। वह बताता है कि सत्ता में रहने के दौरान उसने क्या किया। आज पश्चिम बंगाल में जितने मुद्दे हैं,चाहे वह गवर्नेंस का हो,कानून व्यवस्था का हो,महिलाओं की सुरक्षा का हो या भ्रष्टाचार,उन सब पर ममता बनर्जी डिफेंसिव मोड में हैं। और घुसपैठिये तो पूरे देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन गए हैं। पश्चिम बंगाल इन घुसपैठियों का एंट्री पॉइंट है। वहीं से उनके फर्जी कागज बनते हैं। जो इस देश के नागरिक नहीं हैं, उनको इस देश का नागरिक बनाया जाता है। ये घुसपैठिये फिर हिंसात्मक,सांप्रदायिक और आतंकी घटनाओं में शामिल होते हैं। घुसपैठियों का ममता बनर्जी सिर्फ़ इसलिए समर्थन कर रही हैं क्योंकि उनका वोट उनको मिलना निश्चित है। एसआईआर से पहचान में आ रहे घुसपैठियों को बचाने में उनकी पूरी सरकार और तंत्र लगा हुआ है। ऐसे में ममता बनर्जी के सामने भाजपा चुनौती बनकर खड़ी है। तो अब ममता बनर्जी के बयान पर आते हैं। हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पश्चिम बंगाल के दौरे पर थे। इसी दौरान ममता बनर्जी ने एक तरह से देश के गृहमंत्री को धमकी दी और कहा कि आप जिस होटल में रुके हैं,अगर वहां से बाहर निकल पा रहे हैं तो यह हमारी मेहरबानी है। अगर हम नहीं चाहें तो आप होटल के बाहर निकल नहीं सकते। आज तक देश के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ। चाहे एक दूसरे के जितने विरोधी रहे हों। सवाल है कि ममता बनर्जी ऐसा क्यों बोल रही हैं? यह उनकी हताशा है। चाहे वह 2014 का चुनाव रहा हो या 2016,2019 या 2021 का,पहले कभी इस तरह की भाषा ममता बनर्जी ने नहीं बोली। इस तरह के बयान आने वाले समय में आपको और सुनने को मिलेंगे। अभी से उनकी हताशा पराकाष्ठा पर पहुंच गई है। वह यह नहीं कह रही हैं कि आपको हम जीतने नहीं देंगे। वह यह नहीं कह रही हैं कि हमारी लोकप्रियता ऐसी है कि आपको जीत कभी नहीं मिलेगी। वे सीधे देश के गृहमंत्री को धमकी दे रही हैं। इस बयान से पहले उन्होंने दुर्योधन,दुशासन,और दुराचारी न जाने क्या-क्या कहा लेकिन भाजपा के जो वरिष्ठ नेता हैं, उनकी एक खूबी है। वे अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के हमले से विचलित नहीं होते और बड़े धैर्य से उसका सामना करते हैं। यह ट्रेनिंग उनको राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से मिली है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर तीन प्रतिबंध लगे लेकिन कभी स्वयंसेवकों ने हिंसा का रास्ता नहीं अपनाया। तीनों बार अदालत से प्रतिबंध हटा। धैर्य का नतीजा यह होता है कि लोगों की सहानुभूति जो गाली खा रहा होता है, उसके प्रति हो जाती है,गाली देने वाले के प्रति नहीं। लेकिन ममता बनर्जी कोई सबक लेने को तैयार नहीं, उनको लगता है कि वह पश्चिम बंगाल में अपराजेय हैं और भाजपा ने उन्हें चुनौती देकर महापाप किया है। उनको इस बार उनका सिंहासन डोलता हुआ नजर आ रहा है। राजनीतिक भूकंप के झटके उनको महसूस हो रहे हैं और यह बयान उसी झटके का असर है। तो आप मानकर चलिए कि पश्चिम बंगाल में बड़ा राजनीतिक परिवर्तन होने जा रहा है। उसके संकेत खुद ममता बनर्जी दे रही हैं।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक और ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)



