तुर्कमान गेट की घटना से सीखने होंगे सबक, हिंसा करो फिर विक्टिम कार्ड  खेलो।

प्रदीप सिंह।
दिल्ली के तुर्कमान गेट पर मंगलवार को घटी घटना ने इसे फिर से चर्चा में ला दिया है। पहली बार यह 1976 में इमरजेंसी के दौरान चर्चा में आया था जब संजय गांधी ने यहां पर जो अतिक्रमण था, उसे गिरवाया था। उसके बाद यहां पर फिर से अतिक्रमण हो गया। यह मामला लंबे समय से अदालत में चल रहा है। दो महीने पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया कि तीन महीने में यहां पर जितने अवैध निर्माण हैं,सब गिरा दीजिए। इस मुकदमे में दिल्ली वक्फ बोर्ड और मस्जिद की कमेटी सब शामिल थे। उनकी सुनवाई हुई। लेकिन जब अतिक्रमण हटाने के लिए पुलिस पहुंची तो कहा गया कि हमसे तो कोई बात ही नहीं की गई। अब इस झूठ का आप क्या करेंगे? इतना ही नहीं पुलिस को देखकर अफवाह फैलाई गई कि मस्जिद गिराने आए हैं। व्हाट्सएप पर संदेश भेजे गए कि मस्जिद गिराने के लिए पुलिस आई है,सब लोग इकट्ठा हो जाओ। इसके बाद करीब 300 लोगों की भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया। पथराव किया गया। बैरिकेड तोड़ दिए। पुलिस के मेगाफोन तोड़ दिए। हमले और पथराव में कई पुलिस वाले घायल हो गए। चूंकि कोर्ट का आदेश था तो पुलिस को उसे लागू करना ही था। पुलिस ने बुलडोजर चलवाकर अतिक्रमण गिरवा दिए। इस दौरान और भी बहुत कुछ हुआ। एक मौलवी हैं मोहिबुल्लाह नदवी। वे रामपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद भी हैं। जब पुलिस की कार्रवाई शुरू हुई तो उससे पहले ही करीब 11 बजे वे यहां पहुंचे और आरोप है कि उन्होंने लोगों को भड़काया। उसके बाद यह दंगा शुरू हुआ। अब नदवी से पुलिस पूछताछ करने वाली है। ये नदवी वहीं हैं,जिन्होंने पिछले संसद सत्र में कहा था कि मुसलमानों को सरकार के खिलाफ जिहाद करना पड़ेगा। अब आप इनकी मानसिकता को समझिए। ये जनप्रतिनिधि हैं। संसद में खड़े होकर यह बोलने के बाद भी इनकी सदस्यता बची हुई है। इसका क्या अर्थ निकाला जाए? अगर यह सब चलता रहा तो देश कहां जाएगा? इसका आप अंदाजा लगा सकते हैं।

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तो सार्वजनिक रूप से कहती हैं कि हिंदुओं को मुस्लिम इलाकों में नहीं जाना चाहिए। देश में जहां मुस्लिम आबादी ज्यादा है, वहां हिंदुओं का कोई त्योहार नहीं मनाया जा सकता। वहां से कोई शोभा यात्रा नहीं निकल सकती। बहराइच की घटना आपको याद ही होगी किस तरह से हत्या हुई थी और देश भर में इस तरह की घटनाएं आयेदिन हो रही हैं। पहले हिंदुओं से टकराव की बात थी। अब सीधे-सीधे न्यायालय से भी टकराव हो रहा है। तुर्कमान गेट पर जो अतिक्रमण हटाया जा रहा था,वह दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर हो रहा था। अब तो स्थिति यह है कि पहले ये लोग खुद हिंसा करेंगे और उसके बाद विक्टिम कार्ड खेलेंगे। अब कहा जा रहा है कि मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए यह बुलडोजर की कार्रवाई की गई। तो आप अतिक्रमण करें,जबरन कब्जा कर लें और उसकी छूट भी चाहते हैं। दरअसल उनके कहने का यह मतलब है कि हम इस देश में कहीं भी कब्जा कर सकते हैं। अगर पुलिस,सरकार या अदालत बोलेगी तो इसका मतलब मुसलमानों पर जुल्म हो रहा है। इस अतिक्रमण को हटाने के लिए बार-बार नोटिस भेजे गए। जो भी स्टेक होल्डर्स थे,सबसे बुलाकर बात की गई। कार्रवाई से पहले भी पुलिस ने सबको बुलाकर बताया कि इस तारीख को इस समय पर अतिक्रमण हटाया जाएगा। यह सब बताने के बावजूद वहां पुलिस पर पथराव हुआ। इसका मतलब यह है कि इस देश में संविधान और कानून का राज नहीं चलेगा। मुसलमान जो कहेंगे, वही कानून माना जाएगा। और इस बात का समर्थन करने वालों की कोई कमी नहीं है। बल्कि हिंदुओं में भी बड़ी संख्या ऐसे लोग हैं,जो इसका समर्थन करते हैं। खैर,पुलिस ने 3800 स्क्वायर फीट इलाके में जो अतिक्रमण था, उसको गिरा दिया। यह काम इसी सरकार के रहते हो सकता था। इससे पहले 50 साल में नहीं हुआ। लेकिन यह कोई बहुत संतुष्ट होने वाली बात नहीं है।

अब सवाल यह है कि 2026-27 में जनगणना होने वाली है। तो एक गणना इस बात की भी होनी चाहिए कि भारत में कितने पाकिस्तान बन चुके हैं। क्योंकि हाल ही में तृणमूल कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि 30 फीसदी मुसलमान इकट्ठा हो जाएं तो भारत में चार पाकिस्तान बना सकते हैं। आप याद रखिए मजहब के नाम पर इन्होंने देश का बंटवारा किया। पाकिस्तान लिया,लेकिन यहीं रह गए और मुस्लिम लीग का वह नारा हमें भूलना नहीं चाहिए कि लड़कर लिया पाकिस्तान, हंस कर लेंगे हिंदुस्तान। आपको याद होगा कि कर्नाटक हाईकोर्ट के एक जज ने कर्नाटक के किसी इलाके के बारे में कहा कि वह पाकिस्तान जैसा है। सुप्रीम कोर्ट ने उस जज को चेतावनी दी। उस टिप्पणी को हटा दिया। लेकिन सवाल है कि वास्तविकता से कब तक भागेंगे? इस देश में एक-दो नहीं, हजारों ऐसे स्थान हैं जहां हिंदुओं के जाने की बात छोड़िए पुलिस नहीं घुस सकती। उत्तर प्रदेश का मऊ ऐसा ही एक इलाका था। वहां पुलिस छोड़िए, पीएसी नहीं घुस पाती थी। 1984 में वहां पर दंगा हुआ और एक डिप्टी एसपी की मुसलमानों ने हत्या कर दी। इस पर पुलिस ने रिवोल्ट कर दिया कि हमारे अधिकारी को जिन लोगों ने मारा है जब तक उनको गिरफ्तार नहीं किया जाएगा तब तक हम काम नहीं करेंगे। जब डीएम ने पता किया तो मालूम हुआ कि वहां ऐसे इलाके हैं, जहां दिन में भी पीएसी नहीं घुस सकती क्योंकि छतों से महिलाएं एसिड बल्ब फेंकती हैं। फिर वहां कर्फ्यू लगाया गया और तब कार्रवाई की गई। मऊ ही वह इलाका है जहां हिंदू अपने घर में सत्यनारायण की कथा नहीं करा सकते थे। अपने घर में घंटी और शंख नहीं बजा सकते थे। हिंदू बहुत परेशान हो गए तो उन्होंने मथुरा के पंडों से संपर्क किया। मथुरा से बड़ी संख्या में पांडे आए और उन्होंने घर-घर जाकर, गांव-गांव जाकर सत्यनारायण की कथा कराई,पूजा कराई,शंख,घंटा,घड़ियाल सब बजा। यह क्यों बता रहा हूं आपको? क्योंकि जब आप विरोध में खड़े होंगे तभी आपको आपका हक मिलेगा। सरकार हक नहीं देने वाली है।

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तो मेरा फिर से कहना है कि सरकार को ऐसे इलाकों को चिन्हित करना चाहिए, जो पाकिस्तान बन गए हैं। जहां घरों पर पाकिस्तान का झंडा लगाया जाता है। अब तो आईएसआईएस के भी झंडे लगने लगे हैं। उसमें भी कोई संकोच नहीं होता है। इसके बारे में कोई कड़ा कानून बनना चाहिए। यह देश की जड़ों को खोखला करने वाला है। जो पाकिस्तान भारत के अंदर बने हैं,इनका सफाया जरूरी है। यह वैचारिक अतिक्रमण भौतिक अतिक्रमण से भी ज्यादा खतरनाक है। इससे लड़ने के लिए हमको-आपको तैयार होना पड़ेगा और तैयार होने के लिए जरूरी है कि हम यह समझें कि इस वैचारिक लड़ाई को जो मुसलमान लड़ रहे हैं,उनका उद्देश्य क्या है? उनका उद्देश्य कोई भाईचारा नहीं है। उनका उद्देश्य इस देश को दारुल इस्लाम बनाना है। यह छोटी सी बात अगर गैर मुसलमानों को समझ में आ जाए तो शायद हालात में बदलाव शुरू हो जाएगा। लेकिन इस सबके बावजूद मैं कहता हूं कि सरकार अपनी जिम्मेदारी और जवाबदेही से बच नहीं सकती। ऐसा कैसे हो सकता है कि किसी एक इलाके में हिंदुओं का जाना वर्जित हो जाए या ऐसे इलाकों में हिंदुओं के जाने का मतलब है कि उनकी जान की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की नहीं है। क्या देश में एक भी ऐसा इलाका है जो हिंदू बहुल हो और वहां मुसलमानों को आने जाने में किसी तरह की तकलीफ या रोक-टोक हो। तो यह मुस्लिम बहुल इलाकों में ही क्यों होता है? इसको सोचने और इसका समाधान खोजने की जरूरत है। ऐसे इलाकों को आइडेंटिफाई किया जाए जो मिनी पाकिस्तान बन चुके हैं और उनको डिस्ट्रॉय किया जाए। डिस्ट्रॉय से मेरा मतलब लोगों को डिस्ट्रॉय करने से नहीं है। उस मानसिकता को खत्म करने की जरूरत है। उनको यह बताने की जरूरत है कि भारत में रहना है तो भारतवासी बनकर ही रह सकते हैं। आपका मजहब कोई हो लेकिन आप भारत के खिलाफ,भारतीय संस्कृति के खिलाफ और इस देश के बहुसंख्यक के खिलाफ खड़े होकर इस देश में रहने का अधिकार खो देते हैं। यह बात उनको सामाजिक,कानूनी और संवैधानिक तीनों तरीकों से बताई जानी चाहिए।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक और ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)