स्टार्मर की तरह मोदी झुके नहीं, ट्रेड डील न होने का सच आया सामने।
प्रदीप सिंह।सच किसी न किसी तरह से बाहर आ ही जाता है। भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील का मामला काफी समय से लटका हुआ है। तरह-तरह के अंदाजे लगाए जा रहे थे कि इन शर्तों पर भारत नहीं मान रहा है। इस पर अमेरिका नहीं मान रहा है। इस बीच में अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लगा दिया। उसका कहना था कि भारत रूस से तेल खरीदता है,इसी कारण यह टैरिफ लगाया गया है। लेकिन रूस से एनर्जी का व्यापार चीन और यूरोपीय यूनियन तो हमसे कहीं ज्यादा करते हैं। ट्रंप को वह दिखाई नहीं देता। इसका मतलब रूस से तेल की खरीद एक बहाना है। भारत पर 50% टैरिफ लगाने की असली वजह कुछ और है, जिसके बारे में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे और अब वह सच बाहर आ गया है।

अमेरिका के वाणिज्य मंत्री लुटनिक हारवर्ड ने हाल ही में मीडिया से बातचीत में बताया कि भारत से ट्रेड डील क्यों नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि जुलाई में डील को लेकर सारे मुद्दे तय हो गए थे। इसके बाद इंतजार था कि नरेंद्र मोदी फोन करेंगे। क्यों इंतजार था? लुटनिक ने यह भी बता दिया। उन्होंने कहा कि जब ब्रिटेन से अमेरिका की डील फाइनल हो रही थी तो उससे एक दिन पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री स्टार्मर ने डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया और उसी दिन डील हो गई। यही भारत के साथ होना था। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगर ट्रंप को फोन कर देते तो यह डील हो गई होती। तो अमेरिका ने ही इस बात को साबित कर दिया कि डोनाल्ड ट्रंप लगातार झूठ बोल रहे हैं कि भारत रूस से तेल खरीद रहा है,इस वजह से टैरिफ लगाया गया। अब एक और तलवार भारत पर लटकाने की कोशिश हो रही है। एक रिपब्लिकन सांसद ने संसद में बिल पेश किया है कि जो देश रूस से तेल खरीदते हैं, उन पर 500% तक टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को होगा। अभी कुछ स्पष्ट नहीं है कि यह पास हो पाएगा कि नहीं और अगर यह पास हो भी गया तो क्या अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप ऐसा करेंगे क्योंकि अमेरिका ने यह देख लिया कि 50% टैरिफ लगाने के बाद भी भारत की इकॉनमी पर कोई असर नहीं पड़ा बल्कि भारत का एक्सपोर्ट और ज्यादा बढ़ गया है। तो ट्रंप के ईगो को चोट पहुंची है। असली मामला यह है। रूस से तेल खरीद का कोई मामला नहीं है। बल्कि डोनाल्ड ट्रंप का अब रूस पर दबाव डालने का भी कोई इरादा नहीं है। रूस-यूक्रेन युद्ध रुकवाने में भी उनकी रुचि खत्म हो गई है। अब उनके सामने चीन,वेनेजुएला,ग्रीनलैंड,कोलंबि

अब आप देखिए मई में ऑपरेशन सिंदूर हुआ। इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने झूठ बोलना शुरू कर दिया कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध को रुकवाया। भारत ने मना किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद में कहा कि दुनिया के किसी देश या किसी नेता की इसमें कोई भूमिका नहीं थी। लेकिन ट्रंप बार-बार इस झूठ को दोहराते रहे। उनको लगा कि उनके दोहराने से दुनिया इसको सच मान लेगी। लेकिन उनको शायद अंदाजा नहीं था कि नरेंद्र मोदी ब्रिटेन के प्रधानमंत्री नहीं हैं, जिन्होंने ट्रंप के सामने घुटने टेक दिए। नरेंद्र मोदी दूसरी मिट्टी के बने हुए हैं। भारत में एक ब्रिगेड जो बेशर्मी के साथ नरेंद्र सरेंडर कहती है,उसको यह बात समझ में नहीं आ सकती क्योंकि उनको लगता है कि हमारे परिवार के बड़े लोगों ने सरेंडर किया है तो नरेंद्र मोदी क्यों नहीं कर सकते? जब ट्रंप ने भारत-पाक युद्ध रुकवाने का दावा किया, उसी समय उन्हें नोबेल प्राइज दिलाने का अभियान भी शुरू हुआ। इसमें पाकिस्तान समेत कई चापलूसों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया,लेकिन मोदी और भारत ने ऐसा नहीं किया क्योंकि उनको मालूम था कि ट्रंप का दावा झूठा है। उसके बाद कनाडा में जी-7 की बैठक हुई,जिसमें भारत को भी विशेष रूप से बुलाया गया। ट्रंप वहां आए और यह कहकर बहुत जल्दी सम्मेलन से निकल गए कि उन्हें कुछ जरूरी काम है। वास्तव में उन्हें कोई काम नहीं था। दरअसल वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सामना नहीं करना चाहते थे। वहां से जाने के बाद उन्होंने मोदी को फोन पर न्योता दिया कि जी-7 की बैठक के बाद वाशिंगटन होते हुए भारत जाइए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पता था कि ट्रंप ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर को भी लंच पर बुला रखा है, इसीलिए उन्होंने वहां जाने से मना कर दिया। ट्रंप की चालाकी थी कि मुनीर और मोदी को आमने-सामने बिठाकर एक फोटो खिंचवा ली जाएगी और कहेंगे कि हमने समझौता कराया,लेकिन मोदी ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इसके साथ ही भारत के विदेश मंत्रालय ने फोन पर ट्रंप-मोदी की सारी बातचीत का टैक्स्ट जारी कर दिया। ताकि ट्रंप फिर से कोई झूठ न बोल पाएं। ट्रंप को यह दूसरा झटका लगा। उसके बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप के बीच में सिर्फ दो बार फोन पर बातचीत हुई है। पहली 17 सितंबर को जब प्रधानमंत्री मोदी का जन्मदिन था और ट्रंप ने बधाई देने के लिए फोन किया। दूसरी बार दिसंबर में जब गाजा पीस प्लान को लेकर शर्म अल शेख में हुए सम्मेलन के लिए ट्रंप ने मोदी को न्योता दिया। लेकिन मोदी ने जाने से मना कर दिया और एक जूनियर प्रतिनिधि को वहां भेजा गया क्योंकि प्रधानमंत्री को पता था कि वहां भी ट्रंप कुछ खेल कर सकते हैं। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का डोनाल्ड ट्रंप पर से भरोसा उठ गया है। उन्हें लगता है कि यह आदमी कुछ भी झूठ बोल सकता है। जो बातचीत नहीं हुई, उसका दावा करता है। और दुर्भाग्य से हमारे देश में ऐसा विपक्ष है, जो ट्रंप के हर झूठे दावे पर सफाई मांगता फिरता है। इसीलिए चार बार ऐसे मौके आए जब डोनाल्ड ट्रंप ने फोन पर बात करने की कोशिश की लेकिन मोदी ने चारों बार मना कर दिया। अब ट्रंप जैसा व्यक्ति जो चौबीसों घंटे प्रशंसा का भूखा हो,जिसके पास असीमित ताकत हो,उसकी प्रशंसा करना तो दूर उससे बात तक करने से मोदी ने मना कर दिया। इसीलिए अमेरिका के वाणिज्य मंत्री कहते हैं कि मोदी का फोन अगर आ गया होता तो जुलाई में ही यह डील हो जाती,लेकिन मोदी ने फोन नहीं किया। उनका कहना है कि जो डील उस समय फाइनल हुई थी, अब वह टेबल पर नहीं है यानी अब वह वैध नहीं है। अब जो भी बातचीत होगी नए सिरे से होगी। तो एक बात इससे समझ लीजिए कि डील न होने की कीमत पर भी भारत ने इस बात को मंजूर नहीं किया कि वह अपने देश के स्वाभिमान से समझौता करे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई साल पहले कहा था कि मैं देश नहीं झुकने दूंगा तो देश को उन्होंने झुकने नहीं दिया। यह बात ट्रंप के गले के नीचे नहीं उतर रही है कि पूरी दुनिया हमारे सामने झुकने को तैयार है, लेकिन मोदी हमारे सामने झुकने को तैयार नहीं है। तो यह जो 500% टैरिफ वाला बिल लाया जा रहा है,यह दरअसल भारत पर तलवार लटकाई जा रही है,जो मुझे लगता है कि कभी चलेगी नहीं । हालांकि भारत इसके लिए भी तैयार है कि अमेरिका इस तरह का कुछ भी कदम उठा सकता है।
मोदी को मालूम है कि अमेरिका और डीप स्टेट की ताकत क्या है? वह दुनिया भर में तख्ता पलट करवाने में माहिर है। सबसे ताजा उदाहरण तो वेनेजुएला का ही है। हमारे बगल में बांग्लादेश,श्रीलंका,नेपाल के भी हालात हम देख चुके हैं। इस सबके बावजूद और डोनाल्ड ट्रंप के स्वभाव को देखते हुए भी प्रधानमंत्री ने तय किया कि मैं भारत का सिर नहीं झुकने दूंगा। अमेरिका से डील होगी कि नहीं मुझे मालूम नहीं है, लेकिन इतना तय है कि अब जो भी डील होगी,वह भारत की शर्तों पर ही होगी।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक और ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)



