मनरेगा का नाम बदलने के विरोध में चल रहा आंदोलन दूरबीन से भी दिख नहीं रहा।
प्रदीप सिंह।
कहते हैं समय बड़ा बलवान होता है,लेकिन समय निर्दयी भी होता है। कब समय का चक्र घूमे और क्या से क्या हो जाए। आज बात कांग्रेस पार्टी की। कांग्रेस एक ऐसी पार्टी है,जो अपने आप को ही गंभीरता से नहीं लेती है। यह हम ही लोग हैं जो उसकी चर्चा करते रहते हैं। मजबूरी यह है कि कांग्रेस देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है,लोकसभा में इस समय उसकी 99 सीटें हैं और नेता प्रतिपक्ष उसका है। इसलिए डेमोक्रेसी में जो सबसे बड़ा विपक्षी दल है उसकी बात न हो, यह संभव नहीं है। कांग्रेस आज जिस हालत में है, उसे सिर्फ और सिर्फ एक शब्द में बयान किया जा सकता है ‘दयनीय’।
Courtesy: The Statesman
दरअसल यह लिगेसी है जवाहरलाल नेहरू और गांधी परिवार की, जहां आज कांग्रेस पहुंची है। कांग्रेस को अभी तक जीवित रखने में भी गांधी परिवार का हाथ है और कांग्रेस को ऐसा बना दिया है कि यह न तो मर रही है, न जिंदा रह पा रही है। सत्ता इसके डीएनए में ऐसे बस गई है कि सत्ता के बिना यह पार्टी सर्वाइव नहीं कर सकती और विपक्ष में कैसे काम किया जाता है,इसकी कोई समझ कांग्रेस पार्टी के अंदर है नहीं।
आजादी के आंदोलन के दौरान कांग्रेस पार्टी नहीं, एक प्लेटफार्म था जिसमें सभी विचारधारा के लोग थे जो आजादी के बाद धीरे-धीरे अलग होते गए। तो कांग्रेस केवल नेहरू गांधी परिवार की पार्टी बची। अब उस नेहरू गांधी परिवार में जो लोग बचे हैं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा, इन तीन में से किसी की यह हैसियत नहीं है कि पार्टी से अलग होकर अकेले वह लोकसभा की एक सीट जीत सके। सोनिया गांधी 2024 का चुनाव नहीं लड़ीं। राहुल दो जगह वायनाड और रायबरेली से से लड़े। दोनों जगह से जीतने के बाद उन्होंने वायनाड छोड़ दिया और रायबरेली को चुना। रायबरेली से सबसे पहले जो कांग्रेस से सांसद बना उसका नाम था फिरोज गांधी। राहुल गांधी के दादा। आपने राहुल गांधी से कभी उनका नाम सुना है? जो व्यक्ति बात-बात में परिवार की लिगेसी का जिक्र करता हो,वह कभी अपने दादा को याद नहीं करता है। तो जो अपनों को इस तरह से भुला देता है,लोग उसको भुला देते हैं। वही हाल कांग्रेस पार्टी का हो रहा है। कांग्रेस पार्टी समय-समय पर उत्साह में आती है और आंदोलन की घोषणा करती है। सैकड़ों हजार करोड़ रुपए खर्च करके राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा निकाली गई और घोषणा कर दी गई कि यह गेम चेंजर है। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की सीटें बढ़ गईं तो उसका सारा श्रेय भारत जोड़ो यात्रा को दिया जाता है। सवाल यह है कि अगर उस भारत जोड़ो यात्रा के कारण लोकसभा में इतनी सीटें बढ़ गईं तो उसके बाद हुए दिल्ली,हरियाणा,महाराष्ट्र और बिहार विधानसभा चुनावों में पार्टी हार क्यों गई। हारी ही नहीं,उसकी दुर्दशा हो गई।
अब एक और ताजा मामला हुआ है। संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार ने महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम और उसका पूरा स्वरूप बदलकर विकसित भारत जी राम जी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना कर दिया। कांग्रेस ने बहुत हल्ला मचाया कि गांधी जी को छोड़ दिया। लेकिन कांग्रेस ने यह नहीं देखा कि राम जी को अपना लिया। अब राम जी से तो कांग्रेस की पुरानी दुश्मनी है। भगवान राम का अस्तित्व ही मानने से जो पार्टी इंकार करती है, उसको राम जी का नाम आने पर तो ऐतराज होगा ही। तो कांग्रेस ने घोषणा कर दी कि इस योजना के खिलाफ वह राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेगी। अब पार्टी ही राष्ट्रव्यापी नहीं रह गई है तो राष्ट्रव्यापी आंदोलन कहां करेंगे? पूरे देश में सिर्फ तीन राज्यों में उसकी सरकार है और वह भी अगले चुनाव तक रहेगी इसकी कोई गारंटी नहीं है। अभी चार राज्यों और एक केंद्र शासित क्षेत्र पश्चिम बंगाल,केरल,तमिलनाडु, असम और पुदुचेरी में होने वाले हैं। इनमें सबसे ज्यादा संभावना थी कि कांग्रेस पार्टी केरल में सत्ता में आ सकती है, लेकिन जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं वह भी धूमिल हो रही है। बाकी राज्यों में कांग्रेस संघर्ष में ही नहीं है। तो 10 जनवरी से देशभर में कांग्रेस का आंदोलन शुरू हो जाना था। लेकिन देश में कहीं कांग्रेस का यह आंदोलन चल रहा है क्या? कांग्रेस का कोई बड़ा नेता कहीं किसी शहर में आपको इस आंदोलन का नेतृत्व करता हुआ दिखाई दिया क्या? संसद सत्र के बीच में राहुल गांधी विदेश चले गए। बाकी बचे सोनिया गांधी और प्रियंका वाड्रा कहीं इस आंदोलन में नजर आए? उनको भी छोड़ दीजिए राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे कहीं दिखाई दिए क्या? तो यह गायब पार्टी है। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड्स में तो है। लोकसभा में है,राज्यसभा में है,कुछ राज्यों में भी है। लेकिन यह पार्टी कौन चलाता है,कैसे चलती है,किसी को मालूम नहीं है।

एक और उदाहरण देखिए। उत्तर प्रदेश में एसआईआर के दौरान प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए कांग्रेस ने भी अपनी एक कमेटी बनाई। उस कमेटी में ऐसे लोग सदस्य बनाए गए हैं, जिनमें से कई तो इस दुनिया में हैं ही नहीं और जो हैं, उनमें से ज्यादातर पार्टी छोड़कर बहुत पहले दूसरी पार्टियों में जा चुके हैं। दुनिया की ऐसी कोई पॉलिटिकल पार्टी आप नहीं देखेंगे, जिसकी न राष्ट्रीय नेताओं को कोई चिंता हो और न प्रदेश के नेताओं को कोई चिंता हो। पार्टी की चिंता सिर्फ उन लोगों को है,जो चुनाव लड़ना चाहते हैं। वह भी कितने दिन रहेगी पता नहीं क्योंकि पार्टी का अस्तित्व कुछ ही राज्यों में बचा है। देश के जो भी बड़े राज्य हैं,जैसे उत्तर प्रदेश,बिहार, तमिलनाडु,महाराष्ट्र,पश्चिम बंगाल,आंध्र प्रदेश,उड़ीसा में देख लीजिए कांग्रेस पार्टी कहां है? इसके लिए आपको दूरबीन लेकर खोजना पड़ेगा। लेकिन पार्टी का जो सर्वेसर्वा है,वह विदेश यात्राओं में मस्त है। वह ऐसी संस्थाओं के कार्यक्रम में जाता है, जो भारत विरोधी हैं और भारत के लोकतंत्र को खत्म करना चाहते हैं।
राहुल गांधी पिछले काफी समय से देश के जेन जी से अपील कर रहे हैं कि उन्हें सड़क पर आना चाहिए। तो उनकी अपील शायद जेन जी तक पहुंच ही गई तभी नए साल पर देश भर के मंदिरों में जेन जी की भारी भीड़ नजर आई। नाइट क्लब की बात तो आपने बहुत सुनी होगी लेकिन आजकल कीर्तन क्लब बन रहे हैं और इस कीर्तन क्लबों में 80% से ज्यादा युवा हैं। यह है देश की जमीनी हकीकत और राहुल गांधी पता नहीं किस सपने की दुनिया में जी रहे हैं। उनकी पार्टी जमीन नहीं पकड़ पा रही है लेकिन उनके सपने बहुत बड़े हैं कि इस देश का प्रधानमंत्री बनना है। तो यह गायब पार्टी कहीं आपको भी मिले तो बताइये। पता कीजिए कहां चल रहा है कांग्रेस पार्टी का आंदोलन?
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक और ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)



