ठोककर अपनी बात कहने की उनकी खूबी से लेफ्ट इको सिस्टम परेशान।

#pradepsinghप्रदीप सिंह।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा फिर से चर्चा के केंद्र में हैं। उनमें कई खूबियां हैं,जिनके कारण लेफ्ट इको सिस्टम बहुत परेशान है। लेफ्ट इको सिस्टम को लग रहा है उसके सारे किए धरे को हिमंत नष्ट कर दे रहे हैं। हिमंत की पहली खूबी है कि वे सच बोलने से डरते नहीं है। दूसरी राष्ट्रीय हित की बात कहने से हिचकिचाते नहीं हैं और तीसरी उनको इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन क्या सोचता है। उनको हिंदू होने पर गर्व है। वह कभी पॉलिटिकली करेक्ट होने की कोशिश नहीं करते, जो बीजेपी के बहुत सारे नेता करते हैं। पॉलिटिकली करेक्ट होने का मतलब लोग क्या कहेंगे अगर ऐसा हम बोलेंगे तो। अगर आप संस्कृत भाषा का शब्द इस्तेमाल करना चाहे तो इसे चक्षु लज्जा कहते हैं।

हिमंत ने हाल ही में कहा कि असम में जो मियां समुदाय है उसको इतना परेशान कीजिए कि वह भाग कर बांग्लादेश चला जाए। वह जब मियां कहते हैं तो स्पष्ट करते हैं कि उनका मतलब किसी मजहब के खिलाफ नहीं है। मियां का मतलब बांग्लादेशी घुसपैठिए। इस बात को लेकर जब लेफ्ट इको सिस्टम की ओर से उन पर हमला हुआ तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की कही बात याद दिलाई। सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा था कि असम में चुपचाप और खतरनाक तरीके से जनसंख्या में बदलाव हो रहा है। लोअर असम के जिलों को धीरे-धीरे मुस्लिम बहुल इलाकों में बदला जा रहा है ताकि आने वाले समय में उनको बांग्लादेश में मिलाने की मांग की जा सके। अगर असम हाथ से निकल गया तो पूरा पूर्वोत्तर भारत से कट जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट की इसी बात को हिमंत बिस्वा सरमा बार-बार दोहरा रहे हैं। उनका कहना है कि मियां लोग यानी बांग्लादेशी घुसपैठिया हमारी संस्कृति को बर्बाद कर रहे हैं, हमारी भूमि और लोकतांत्रिक अधिकारों पर कब्जा कर रहे हैं। ये घुसपैठिये वोटर बनकर बहुत से जिलों में यह तय कर रहे हैं कि असम में सरकार किसकी होगी। लेकिन कांग्रेस पार्टी सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी को भी अनदेखा कर रही है। वह लेफ्ट इको सिस्टम के साथ है। उसको लगता है कि बांग्लादेशी घुसपैठियों के विरोध का मतलब है मुसलमानों का विरोध। यह कांग्रेस भला कैसे बर्दाश्त कर सकती है। चूंकि इन घुसपैठियों का वोट असम में कांग्रेस और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को मिलता है तो ये लोग उनकी रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। असम में कांग्रेस जब तक सत्ता में थी, तब तक उसने बांग्लादेशी घुसपैठियों को खूब बसाया। उनको हर तरह की सुविधा दी। उनको मतदाता सूची में शामिल कराया और उसका लाभ राजनीतिक रूप से उठाती रही। अब असम की हिमंत बिस्वा सरमा सरकार संस्कृति की सुरक्षा को लेकर बहुत सजग है। वह इस बात से डरती नहीं है कि लोग उसके बारे में क्या कहेंगे।

भाजपा में भी ऐसे लोग कम हैं, जो हिमंत की तरह इस बात की परवाह किए बिना कि लोग क्या सोचेंगे,सच बोलें। भाजपा के कई नेता गंगा जमुनी तहजीब के नशे में हैं। उनको लगता है कि इससे उनको प्रोग्रेसिव समझा जाएगा। इसलिए वह ऐसी कोई बात नहीं बोलते जो लेफ्ट इको सिस्टम को पसंद न आए। वे लेफ्ट इको सिस्टम का एंडोर्समेंट चाहते हैं। इसका सबसे बड़ा और ताजा प्रमाण यूजीसी की गाइडलाइंस हैं। इनमें वह सारी बातें शामिल की गईं जो वकील इंदिरा जय सिंह ने कहीं। इंदिरा जय सिंह किस विचारधारा की हैं,यह बताने की जरूरत नहीं है। भाजपा के सांसद और सरकार सब उनके प्रभाव में आ गए। उनको लगा कि इंदिरा जय सिंह की बात मानने से हम प्रोग्रेसिव समझे जाएंगे। लेकिन हिमंत बिस्वा सरमा इसमें बिल्कुल यकीन नहीं करते। जो सच है वह बोलते हैं और वह ऐसे प्रदेश में बोल रहे हैं जहां 35% आबादी मुसलमानों की है। मुस्लिमों की इतनी भारी तादाद के बावजूद वहां दो बार से बीजेपी की सरकार बन रही है। हिमंत एक तरह से असम में हिंदुओं का जागरण कर रहे हैं। उनको जगा रहे हैं कि अपनी ताकत और बदलती जनसंख्या से आने वाले समय में होने वाले खतरे को पहचानो। वरना एक दिन वही होगा जो 1947 में देश का विभाजन का कारण बना था।

INDIA bloc files complaint against Assam Chief Minister Himanta Sarma for  'inflammatory' remarks in Jharkhand, he responds - India Today

हिमंत ने मुख्यमंत्री बनने के बाद से घुसपैठ के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया है। काजीरंगा फॉरेस्ट एरिया से हजारों एकड़ जमीन को घुसपैठियों के कब्जे से मुक्त कराया है। हिंदुओं के धार्मिक स्थलों से कब्जे हटवाए हैं। इसके साथ-साथ वह असम को विकास की पटरी पर बहुत तेजी से दौड़ा रहे हैं। वह विकास और संस्कृति की रक्षा दोनों काम एक साथ कर रहे हैं, लेकिन वह इस मुद्दे पर किसी तरह का समझौता करने को तैयार नहीं हैं। वह कई बार बोल भी चुके हैं कि मुझे मियां का वोट नहीं चाहिए। उनकी वैचारिक दृष्टि बिल्कुल स्पष्ट है। उसमें कोई कंफ्यूजन नहीं है। वह इस बात की बिल्कुल परवाह नहीं करते हैं कि कौन क्या कहेगा।

असम में अगर तीसरी बार भाजपा की सरकार बनने जा रही है तो उसमें बहुत बड़ा योगदान हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व और उनकी सरकार की नीतियों का है। वह भाजपा में एक ऐसे नेता के रूप में उभरे हैं, जिसको हिंदू होने पर गर्व है। जबकि आपको भाजपा में ऐसे कई नेता मिल जाएंगे, जो सार्वजनिक रूप से इस बात को बोलने में संकोच करते हैं। तो हिमंत बिस्वा सरमा ऐसे सब लोगों को चेता भी रहे हैं और बता भी रहे हैं कि अपनी संस्कृति की रक्षा नहीं करोगे तो तुम्हारी पहचान भी खत्म हो जाएगी। अब सवाल यह है कि उनकी बात कितने लोग सुनते हैं?
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)