एक अप्रकाशित किताब से उद्धरण देकर मोदी,राजनाथ पर साध रहे निशाना।

#pradepsinghप्रदीप सिंह
लोकसभा में सोमवार को जो कुछ हुआ, उससे एक बार फिर साबित हुआ कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और उनकी पार्टी का चीन प्रेम कम होने का नाम नहीं ले रहा है। राहुल गांधी बार-बार ऐसे मुद्दे उठाते हैं, जिससे भारत को नीचा दिखाया जा सके और चीन की प्रशंसा की जा सके। राहुल गांधी लोकसभा में एक ऐसी किताब से उद्धरण देना चाहते थे, जो छपी ही नहीं है। अब संसद की परंपरा है कि आप अगर किसी पर आरोप लगाते हैं या किसी डॉक्यूमेंट को कोट करते हैं तो आपको उसको ऑथेंटिकेट करना पड़ता है। अगर वह गलत साबित हुआ तो फिर आपके खिलाफ एक्शन हो सकता है। आपके खिलाफ प्रिविलेज मोशन आ सकता है और आपकी सदस्यता तक जा सकती है। दूसरा नियम यह है कि आप किसी सदस्य,मंत्री,प्रधानमंत्री पर कोई आरोप लगाते हैं तो उसकी लिखित में सूचना 24 घंटे पहले स्पीकर या सभापति को देनी पड़ती है। यह सभी पक्षों पर लागू होता है। राहुल गांधी ने ऐसा कोई नोटिस दिया नहीं। वह दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को कटघरे में खड़ा करना चाहते थे। वह पूर्व आर्मी चीफ जनरल नरवणे के कंधे पर रखकर बंदूक चला रहे थे।

अब यह कहा जा रहा है कि राहुल जो बात कहने की कोशिश कर रहे थे,वह जनरल नरवणे के संस्मरणों की जो किताब छपने वाली है,उसमें है। तो जो किताब अब तक छपी ही नहीं है उसमें क्या है,यह राहुल गांधी को कैसे मालूम हुआ? इस पर राहुल ने एक मैगजीन का हवाला दिया कि उसमें छपा है। अब मैं किसी मैगजीन के इंटेंशन पर सवाल नहीं उठा रहा हूं। मैं यह कह रहा हूं कि कोई पत्रिका या कोई अखबार किसी ऐसी पुस्तक को कैसे कोट कर सकता है, जो छपी ही नहीं है। सदन में बार-बार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह राहुल गांधी से पूछ रहे थे कि वह किताब है कहां दिखाइए। लेकिन किताब तो है नहीं। उसके बाद स्पीकर ने भी कम से कम आधा दर्जन बार सदन के नियम को लेकर व्यवस्था दी, लेकिन राहुल गांधी अड़े हुए थे। पहले वह पुस्तक का हवाला देकर बोल रहे थे फिर उन्होंने पत्रिका का हवाला देकर बोलना शुरू किया। फिर जब रूलिंग दी गई तो उन्होंने दोनों को छोड़कर अपनी ओर से कहना शुरू किया कि कैलाश रेंज पर चीन के चार टैंक आ गए थे। इस पर राजनाथ सिंह ने पूछा, आपको किसने बताया? कहां से आपको पता चला?

अब प्रश्न यह भी उठता है कि जो दावा चीन नहीं कर रहा है, चीन की तरफ से वह दावा राहुल गांधी क्यों कर रहे हैं? इसके पीछे उनका उद्देश्य क्या है? एक उद्देश्य तो समझ में आता है कि वह सत्तारूढ़ पार्टी के दो बड़े नेताओं प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। वह नेता प्रतिपक्ष हैं तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन जो बात वह कह रहे हैं वह तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। यह नहीं हो सकता कि आप सदन में प्रधानमंत्री,रक्षा मंत्री या किसी भी अन्य के खिलाफ कोई भी आरोप लगा दें। आरोप लगाया है तो उसकी जिम्मेदारी लेनी पड़ती है। राहुल गांधी इसके लिए तैयार नहीं थे। वह बार-बार कह रहे थे कि मैं ऑथेंटिकेट करने को तैयार हूं। लेकिन सवाल यह क्या ऑथेंटिकेट करने को तैयार हैं? क्या वह ऐसी पुस्तक को ऑथेंटिकेट कर सकते हैं, जो छपी ही नहीं है? इससे आगे राहुल ने यह भी कहा कि इस पुस्तक को सरकार ने छपने नहीं दिया। तो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पूछा कि अगर ऐसा है तो जनरल नरवणे कोर्ट क्यों नहीं गए? उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं की? उन्होंने कोई बयान क्यों नहीं दिया? राहुल गांधी के पास इन बातों का जवाब नहीं था और वह देना भी नहीं चाहते थे। स्पीकर ने बार-बार उनसे कहा कि ऐसा लगता है आप तय करके आए हैं कि आप विषय पर नहीं बोलेंगे। विषय क्या था? राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा होनी थी। राहुल ने कहा कि मैं जिस विषय पर बोल रहा हूं, इस पर नहीं बोलने वाला था, लेकिन रूलिंग पार्टी के एक सांसद ने मेरी और मेरी पार्टी की देशभक्ति पर सवाल उठाया तो हम अब इनके प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और इनकी सरकार की देशभक्ति पर सवाल उठाएंगे। कैसे उठाएंगे? चीन की मदद से। यानी वह कहना यह चाहते हैं कि चीन का पक्ष सही है और भारत सरकार का पक्ष गलत है।

आपको याद होगा कि डोकलम विवाद के समय राहुल गांधी आधी रात में छिपकर चीनी दूतावास में चीनी राजदूत से मिलने गए थे। खबर बाहर आ गई तो कांग्रेस पार्टी ने खंडन किया कि नहीं मिलने गए थे। फिर चीनी दूतावास ने उसकी पुष्टि कर दी कि मिलने आए थे और फोटो जारी कर दिए तब कांग्रेस पार्टी ने माना कि हम मिलने गए थे। यह नियम है  कि अगर कोई सांसद,कोई नेता या कोई प्रबुद्ध व्यक्ति दूसरे देश के राजनयिकों से मिलता है तो मिलने जाने से पहले एक्सटर्नल अफेयर्स मिनिस्ट्री में बात करता है और जब मिलकर लौटता है तो फिर वह भारत सरकार को ब्रीफ करता है कि हमारी यह बात हुई। लेकिन राहुल गांधी चीनी राजदूत से मिलने से पहले न तो डी ब्रीफिंग में शामिल हुए और न लौट कर बताया कि उनकी क्या बात हुई। सवाल है कि जब भारत और चीन की सेनाएं डोकलम में आमने-सामने थीं और युद्ध जैसी नौबत आ गई थी, उस समय वह चीनी राजदूत से मिलकर क्या बताने,क्या कहने,क्या पूछने के लिए गए थे। और अब एक पत्रिका ने एक काल्पनिक किताब को कोट करते हुए कुछ लिख दिया, उसको आधार बनाकर वह भारत सरकार को कटघरे में खड़ा करना चाहते हैं। राहुल का हमेशा से ही ऐसा रवैया रहा है। उनके बयान पाकिस्तान की संसद में कोट किए जाते हैं। राहुल के लिए संसदीय नियमों और परंपराओं का कोई मतलब नहीं है। वह अपने को एंटाइटल्ड समझते हैं कि जो चाहे मुद्दा उठा सकते हैं, जब चाहे उठा सकते हैं। ऐसा लगता है कि वह उस कहावत में विश्वास करते हैं कि बदनाम हुए तो क्या नाम न होगा? उनकी पार्टी के लोग और उनके करीबी इस बात से खुश हैं कि 40 मिनट तक राहुल देश में लाइव टेलीकास्ट होते रहे।

एक निराधार बात के सहारे उन्होंने यह नैरेटिव खड़ा करने की कोशिश की कि भारत चीन के सामने झुक गया। चीन बहुत सक्षम है। वह बार-बार चीन की प्रशंसा करते हैं। यही नहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जब भारत की इकॉनमी को डेड बताते हैं तब भी वह तुरंत सुर मिलाते हुए कहते हैं कि बिल्कुल सही बात है। राहुल गांधी और उनके समर्थकों को लगा होगा कि लोकसभा में 40 मिनट तक हंगामा करके उन्होंने झंडा गाड़ दिया,लेकिन मुझे लगता है कि राहुल गांधी ने अपने आप को,अपने नेतृत्व को और अपनी पार्टी को कटघरे में खड़ा कर दिया है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले को उन्होंने गली-मोहल्ले की लड़ाई जैसा बना दिया। उनको लगता है कि यह मुद्दा उठाकर वह देश के प्रधानमंत्री,रक्षा मंत्री को बदनाम कर सकते हैं। उन्होंने सही किया या गलत,इसका फैसला तो देश की जनता करेगी।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)