“यह सिर्फ़ एक प्रदर्शनी नहीं है; यह इज्ज़त, आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण का उत्सव है।” इनशब्दों के साथ केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने शनिवार को चंडीगढ़ के प्रदर्शनी मैदान में 29वें दिव्य कला मेले का उद्घाटन किया। उन्होंने मेले को बदलाव लाने वाला आंदोलन बताया जो देश भर के दिव्यांगजनों की ज़िंदगी में आशा की नई किरण बनकर उभरा है, जो सबको साथ लेकर चलने और समान अवसर के लिए सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दिखाता है।

2014 से सशक्तिकरण की यात्रा की जानकारी देते हुए मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में असंवेदनशील टर्मिनोलॉजी से सम्मानजनक शब्द “दिव्यांगजन” में बदलाव ने न सिर्फ़ शब्दकोश में बदलाव किया, बल्कि दृष्टिकोण में भी बदलाव किया। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 का लागू होना, दिव्यांगजनों की श्रेणी का विस्तार, और सुगम्य भारत अभियान को लागू करने ने मिलकर सुगम्यता, प्रतिष्ठा और भागीदारी की नींव रखी है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सच्चा सम्मान शब्दों से कहीं ज़्यादा होता है- इसे आर्थिक मज़बूती, सामाजिक समावेश और स्वावलंबन में बदलना चाहिए। दिव्य कला मेला, दिव्यांग कारीगरों और उद्यमियों की प्रतिभा को सीधे भारत भर के बाज़ार से जोड़कर इस जीवनदर्शन को दिखाता है।

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इस अवसर पर राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू ने कहा कि भारत के सांस्कृतिक मूल्यों के हिसाब से दिव्यांगजनों को सम्मान देना ऐतिहासिक कदम है। यद्यपि, उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सशक्तिकरण के साथ सम्मान भी होना चाहिए। उन्होंने कहा, “रोज़ी-रोटी और आत्मनिर्भरता के बिना इज़्ज़त अधूरी रहती है।” उन्होंने दिव्य कला मेले जैसे प्लेटफ़ॉर्म बनाने के लिए मंत्रालय की तारीफ़ की। इससे उन विशेषरूप से उन दिव्यांग युवाओं को अपने उत्पाद अपने घर के आसपास दिखाने और बेचने में सहायता मिलती है जो दूर नहीं जा सकते।

चंडीगढ़ के महापौर सौरभ जोशी ने इस अवसर को प्रतिभा, आत्मविश्वास और इंसानी काबिलियत का उत्सव बताया। चंडीगढ़ में दिव्य कला मेला, दिव्य कला शक्ति और रोज़गार मेला आयोजित करना सबको साथ लेकर चलने की शहर की प्रतिबद्धता को दिखाता है। यह इस विश्वास को मज़बूत करता है कि दिव्यांगता कोई सीमा नहीं बल्कि विशेष काबिलियत है जो समाज को बेहतर बनाती है।

दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के संयुक्त सचिव राजीव शर्मा ने स्वागत भाषण में इस पहल के असल आर्थिक असर पर ज़ोर दिया। पिछले तीन वर्ष में, अलग-अलग शहरों में लगाए गए दिव्य कला मेलों में ₹2366.43 लाख के बिज़नेस लेनदेन हुए हैं, जो साफ़ तौर पर बाज़ार में बढ़ती मंज़ूरी और दिव्यांग कारीगरों की बढ़ती उद्यमिता क्षमता को दिखाता है। उन्होंने कहा कि ये मेले सिर्फ़ प्रदर्शनी नहीं हैं, बल्कि आर्थिक समावेश और आत्मनिर्भरता के मज़बूत माध्यम हैं।

29वां दिव्य कला मेला चंडीगढ़ के प्रदर्शनी मैदान में आयोजित किया जा रहा है। इसमें चंडीगढ़ के सामाजिक कल्याण और महिला एवं बाल कल्याण विभाग की सचिव अनुराधा एस. चगती; एनडीएफडीसी के मुख्य महाप्रबंधक विनीत राणा; एनडीएफडीसी सहायक महाप्रबंधक एम. के. साहू; और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों सहित जाने-माने लोगों की शानदार मौजूदगी देखी गई। अब तक, देश भर में 28 जगहों पर दिव्य कला मेले लगाए जा चुके हैं, जिनमें करीब 2,362 दिव्यांग उद्यमियों ने हिस्सा लिया है। इससे कुल मिलाकर ₹23 करोड़ से ज़्यादा की आय हुई है। यह समावेशी उद्यमिता में बड़ी उपलब्धि है।

मार्केटिंग प्लेटफॉर्म देने के अलावा, सरकार ने दिव्यांगजनों की उद्यमिता को और मज़बूत करने के लिए इन कोशिशों के ज़रिए ₹20 करोड़ से ज़्यादा के ऋण मंज़ूर किए हैं। समानांतर रोज़गार मेलों में 3,131 उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 1,007 को शॉर्टलिस्ट किया गया और 313 से ज़्यादा को पहले ही जॉब ऑफ़र मिल चुके हैं। यह इस कोशिश के रोज़गार देने वाले पहलू को दिखाता है।