काम पर भरोसा हो तो मुफ्त रेवड़ियां बांटने की क्या जरूरत।
प्रदीप सिंह।
देश में कुल 28 राज्य हैं। उनमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गवर्नेंस का एक नया मॉडल पेश किया है, जो सभी प्रदेशों के लिए अनुकरणीय है। अभी 11 फरवरी को ही उत्तर प्रदेश सरकार ने योगी जी के नेतृत्व में लगातार दसवां बजट पेश किया है। यह एक रिकॉर्ड है। इससे पहले यूपी का कोई मुख्यमंत्री उसके कार्यकाल में लगातार 10 बजट पेश नहीं कर पाया। हालांकि मैं इसे कोई बड़ी उपलब्धि की तरह नहीं मानता। लेकिन, वह जो कर रहे हैं और जो किया है उसको बहुत बड़ी उपलब्धि मानना चाहिए।
हमें देखना चाहिए कि 2017 में जब वह मुख्यमंत्री बने थे तब प्रदेश की हालत क्या थी? उनको घाटे की अर्थव्यवस्था विरासत में मिली थी। इकोनॉमिक एक्सपर्ट कहते थे कि अगर यह राज्य के बजाय कोई कंपनी होती तो दिवालिया हो गई होती। प्रदेश में जो पांच-छह वीआईपी माने जाते थे, सिर्फ उनके जिले में बिजली आती थी। आज 24 घंटे जिला मुख्यालयों पर बिजली आती है। जापानी बुखार इंसेफेलाइटिस से हर साल सैकड़ों बच्चे मरते थे। लेकिन यह सिलसिला केवल 2017 अगस्त तक चला। योगी सरकार ने अब उस जापानी बुखार से उत्तर प्रदेश को मुक्ति दिला दी है। योगी को विरासत में माफिया की सामानांतर नहीं,मुख्यधारा की सरकार मिली थी। जहां माफिया तय करता था- कौन जिंदा रहेगा,कौन मार दिया जाएगा? किसकी संपत्ति उसकी बनी रहेगी,किसकी संपत्ति पर माफिया का कब्जा हो जाएगा? सरकार केवल उस माफिया को संरक्षण देने का काम करती थी। लेकिन योगी सरकार ने माफिया यानी ऑर्गेनाइज्ड क्राइम की कमर तोड़ दी है। मैं मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद की बात नहीं कर रहा हूं,एक छोटा सा उदाहरण देता हूं मेरठ के सोतीगंज का। देश भर से चोरी की कारें सोतीगंज में कटने के लिए आती थीं। दो-ढाई घंटे में आप उस कार को पहचान नहीं सकते थे, इतने टुकड़े हो चुके होते थे। हाल यह था कि बॉर्डर पर अगर बैरियर लगा है और चोरी की गाड़ी को पुलिस ने रोक लिया तो ड्राइवर शीशा उतार कर केवल यह कहता था कि सोतीगंज जा रहे हैं और बैरियर हट जाता था। आज उस सोतीगंज का नाम लेवा कोई नहीं है। पूरा तंत्र खत्म खत्म हो चुका है।

माफिया की सबसे बड़ी ताकत होती है शासकीय संरक्षण। योगी ने सबसे पहले उसे खत्म किया। फिर उसकी दूसरी ताकत आतंक को खत्म किया। इसके बाद उसकी तीसरी ताकत आर्थिक साम्राज्य को खत्म किया। माफिया के बनाए हुए निर्माण को बुलडोजर से गिराकर गरीबों के लिए घर बनवाए। योगी जी के इस 10 साल के कार्यकाल में ही काशी विश्वनाथ का कॉरिडोर बना। अयोध्या में राम मंदिर बना। विंध्यवासिनी कॉरिडोर बना। हर साल गन्ना किसान आंदोलन करते थे कि उनको भुगतान नहीं मिल रहा है। पर्ची सिस्टम के जरिए घोटाले का एक नया तंत्र विकसित कर दिया गया था। योगी ने उस पर्ची सिस्टम को खत्म किया। गन्ना किसानों का भुगतान अब समय से होने लगा है। उन्होंने वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना को भरपूर प्रोत्साहन दिया। इस योजना की खासियत यह है कि हर जिले में कुछ न कुछ बनता है, लेकिन उसको उद्योगपति नहीं छोटे कारीगर बनाते हैं और इनमें भी ज्यादातर काम करने वाले अति पिछड़े और दलित समाज के लोग हैं। उनको बाकायदा प्रोफेशनल ट्रेनिंग, औजार के लिए आर्थिक मदद के साथ बाजार भी उपलब्ध कराया गया। आज यूपी का जो वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट है, वह देश में ही नहीं विदेश में भी बिक रहा है। यूपी का एक्सपोर्ट बढ़ाने में इसका बहुत बड़ा योगदान है। अब उसके बाद उन्होंने एक जिला-एक व्यंजन योजना शुरू की है। उत्तर प्रदेश में इस साल के आखिर तक जैसे ही गंगा एक्सप्रेसवे खुलेगा,वह देश का सबसे ज्यादा एक्सप्रेसवे वाला प्रदेश बन जाएगा। इन 9 सालों में डिफेंस कॉरिडोर का काम ही शुरू नहीं हुआ उसमें उत्पादन भी होने लगा है। कानपुर के डिफेंस कॉरिडोर में ब्रह्मोस मिसाइल का इंप्रूव्ड वर्जन बन रहा है। नोएडा देश का सबसे बड़ा डाटा सेंटर बनने की ओर अग्रसर है। जेवर एयरपोर्ट इस साल अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय उड़ानों के लिए खुल जाएगा।
इन सारे कामों को प्रदेश की जनता देख,समझ और महसूस कर रही है। इसीलिए दसवें साल में भी योगी जी की सरकार के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी जैसा कोई विचार लोगों के मन में नहीं है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेता हैं जो दर्शक दीर्घा में बैठे हुए सब देख रहे हैं। उनके सामने बड़ा संकट है। सरकार के कामों की प्रशंसा करते हुए उनकी आवाज हलक में अटक जाती है। निंदा करना चाहते हैं पर कर नहीं पाते हैं कि जनता में इसकी क्या प्रतिक्रिया होगी। उत्तर प्रदेश भाजपा के नेताओं की ऐसी बहुत बड़ी फौज है जिन्हें जैसे ही भाजपा के विरोधी योगी जी पर आक्रमण करते हैं, नई ऊर्जा मिलती है। उनको लगता है कोई तो हमारा काम कर रहा है। इसलिए आप देखिए योगी जी के खिलाफ उनके राजनीतिक विरोधी जितनी बार आक्रमण करते हैं, उसका जवाब कभी प्रदेश भाजपा की ओर से नहीं आता है। भाजपा का कोई नेता, कोई प्रवक्ता उनके बचाव में नहीं आएगा और यह सिलसिला चलता रहेगा। लेकिन मैं जो बात कह रहा हूं सवाल यह है कि उसका संदर्भ क्या है? संदर्भ वही बजट है जो 11 फरवरी को पेश हुआ। उनकी सरकार के पास पैसा है। सरप्लस बजट है। वह चाहते तो बजट में लोक लुभावन योजनाओं की घोषणा कर सकते थे, लेकिन एक भी ऐसी योजना की घोषणा बजट में नहीं हुई है। अगले साल फरवरी-मार्च में प्रदेश में चुनाव होना है और आजकल जो माहौल बना हुआ है कि आप इन्हीं घोषणाओं से चुनाव जीत सकते हैं। ऐसे में योगी जी ने ऐसा नहीं किया तो क्यों नहीं किया? यह उनका अपने काम पर विश्वास है। यह मुख्यमंत्री के आत्मविश्वास से लबालब होने का प्रमाण है। उन्हें किसी लोक लुभावन योजना की घोषणा करने की जरूरत नहीं है। यह आप किस प्रदेश में देखते हैं?

अभी तमिलनाडु में चुनाव हो रहा है। वहां के मुख्यमंत्री स्टालिन ने महिलाओं के लिए एक नई योजना की घोषणा कर दी है। उनके और योगी के व्यवहार में अंतर देखिए। दोनों के विज़न का अंतर देखिए। योगी जी देश के सामने गवर्नेंस का नया मॉडल पेश कर रहे हैं कि लोक लुभावन योजनाओं की घोषणा के बिना भी चुनाव जीते जा सकते हैं। योगी आदित्यनाथ ने प्रमाणित किया है कि अगर आपको अपने काम पर विश्वास है,अपने सुशासन पर विश्वास है तो जनता आपका साथ देगी। वही उत्तर प्रदेश में दिखाई दे रहा है। अखिलेश यादव,राहुल गांधी और मायावती जितनी कोशिश कर लें, मुझे नहीं लगता कि उत्तर प्रदेश में सरकार के परिवर्तन के कोई लक्षण हैं। हालांकि अभी लगभग एक साल बाकी है। लेकिन जब हम पॉलिटिकल सिचुएशन का आकलन करते हैं तो उस समय की परिस्थिति से करते हैं। आज की परिस्थिति यही है। उत्तर प्रदेश के बजट में किसी फ्री बीज का अनाउंसमेंट न होना, गवर्नेंस की जो राजनीति है उसमें बहुत बड़े बदलाव का संकेत है। अगर देश के सारे राज्य,सारे मुख्यमंत्री इसका अनुकरण करेंगे तो देश की राजनीति भी बेहतर होगी और प्रदेशों की जो आर्थिक समस्या है, उसमें भी कमी आएगी। लोक लुभावन योजनाओं की घोषणा से प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर असर पड़ता है। इन्हें पूरा करने के लिए विकास की जो योजनाएं हैं, उनमें कटौती की जाती है। इससे प्रदेश का विकास रुकता है।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)



