उपेक्षितों के लिए योगी सरकार ने खोला पिटारा तो बदलने लगी तस्वीर।
वन क्षेत्रों में निवास करने वाले वनटांगिया अब राजस्व गांव के निवासी हैं। इन्हें न सिर्फ नागरिकता का गौरव मिला है, बल्कि वनटांगिया को भी सारी सुविधायें भी मिल रहीं हैं। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने अपने गृह जनपद गोरखपुर के वनटांगिया गांव जंगल तिकोनिया नम्बर तीन से इसकी शुरुआत की थी। अब प्रदेश के सभी क्षेत्रों के वनटांगिया को आवास, जमीन, शौचालय, बिजली, स्कूल, रसोई गैस, पेयजल, राशन कार्ड, पेंशन योजनाओं का लाभ, मनरेगा के तहत रोजगार सुलभ कराने को हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
प्रदेश के ललितपुर जिले में रहने वाले सहरिया समुदाय की 70,634 की आबादी ने अब लकड़ी से सामान बनाने की कला का व्यवसायीकरण कर लिया है। बेलपत्र एकत्र करना और जड़ी बूटी का निर्माण कर विक्रय करने की कला भी सीख लिया है। इससे इनका जीवन आसान होने लगा है।
उत्तर प्रदेश के 19 जिलों- महाराजगंज, आजमगढ़, गाजीपुर, गोरखपुर, देवरिया, बलिया, कुशीनगर, जौनपुर, वाराणसी, संत रविदास नगर, मिर्जापुर, अंबेडकरनगर, अमेठी, चंदौली, मऊ, प्रतापगढ़, सोनभद्र और सुल्तानपुर जैसे जिलों में मुसहर जाति निवास कर रही है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार इनकी कुल आबादी 02 लाख 57 हजार 135 है।
ललितपुर जिले में निवास करने वाली सहरिया समुदाय की आबादी 70,634 है। इन्हें इनके हाल पर ही छोड़ दिया गया था। अब इनके जीवन में उजियारा होना शुरू हुआ। यह समुदाय लकड़ी से टोकरी बनाता है। बेलपत्र एकत्र कर उनका विक्रय करता है। औषधीय पौधों की जानकारी रखने वाला यह समुदाय जड़ी-बूटी तैयार कर उनकी बिक्री भी कर रहा है। गोरखपुर, बलरामपुर, बहराइच, पीलीभीत, लखीमपुरखीरी, महराजगंज में निवास करने वाले लगभग 40 हजार की आबादी वाले वनटांगिया समुदाय को भी पिछली सरकारों में कोई राहत नहीं मिली थी। योगी सरकार आई तो इनको पंख लग गये। (एएमएपी)