नए ड्रोन 48 घंटे तक लगातार उड़कर मिशन को अंजाम देने में सक्षम।
अपग्रेडेड सेंसर के साथ ड्रोन को उपग्रह संचार के साथ लिंक किया गया।

भारतीय सेना पूर्वी लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश क्षेत्र तक एलएसी के पार चीनी सैन्य गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रही है। 2020 में गलवान घाटी के हिंसक संघर्ष के बाद भारत ने पूर्वी लद्दाख में चीनियों के मुकाबले लगातार अपनी क्षमताओं को कई गुना बढ़ा लिया है। नए ड्रोन यूनिट की तैनाती इसी रणनीति का एक हिस्सा हैं। यह ड्रोन मारक क्षमताओं से लैस नहीं हैं, लेकिन उनके पास उन मानकों पर अपग्रेड किए जाने का विकल्प है।
इसके अलावा भारत महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट चीता पर भी काम कर रहा है, जिसके तहत सुरक्षा बल इजरायली मूल के हेरोन के अपने मौजूदा बेड़े को बेहतर संचार सुविधाओं और मिसाइलों के साथ अपग्रेड करना चाहते हैं। यह इजरायली ड्रोन लंबी दूरी से दुश्मन के ठिकानों को निशाना बना सकते हैं। इस परियोजना को इजरायली कंपनियों के सहयोग से भारतीय फर्मों के साथ मुख्य भूमिका में पूरा किया जाना था। वायु सेना इस परियोजना में नेतृत्व की भूमिका में है, जिसके तहत नौसेना और सेना में इजरायली ड्रोन को भी स्ट्राइक क्षमताओं और बेहतर निगरानी और टोही पॉड्स के साथ अपग्रेड करने की योजना है।
पूर्वी लद्दाख से लेकर सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश क्षेत्र तक तैनात की गई नई ड्रोन यूनिट को स्नूपिंग क्षमताओं के साथ अपग्रेड किया गया है। इसलिए जमीनी बल भी उन क्षेत्रों में छिपे हुए ठिकानों के बारे में सटीक खुफिया जानकारी हासिल करने में सक्षम होंगे, जहां ऑपरेशन किया जाना है। अपग्रेडेड ग्राउंड स्टेशन इन ड्रोन्स को दूर से संचालित करने और उपग्रह संचार प्रणाली के माध्यम से नियंत्रित करने में भी सक्षम होंगे। (एएमएपी)



