#pradepsinghप्रदीप सिंह।
सोमवार को ईद पर मुस्लिम नेताओं के जिस तरह के बयान आए उससे आप समझिए कि देश में अभी भी उनकी मानसिकता क्या है? पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती को उससे तकलीफ है जो कुछ इजराइल ने फिलिस्तीन में किया। उस घटना से उनका दिल दुखता है। लेकिन बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ जो कुछ हो रहा है, उससे उनका दिल जरा भी नहीं दुखता, कोई असर नहीं होता।उधर समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को इस बात पर ऐतराज है कि वो ईद के समारोह में शामिल होने ईदगाह जा रहे थे। जगह-जगह जो बैरिकेड लगे हुए थे उससे उनको जाने में समय लगा, रोका गया, पूछताछ हुई।

इसी तरह से आप अलग-अलग उन नेताओं के बयान देखेंगे। यहां मैं उन नेताओं की बात कर रहा हूं जो अपने को सेक्युलर कहते हैं… और उन नेताओं की भी जो मुस्लिम नेता हैं। अगर आप उन सबकी बात सुनेंगे और उसका निष्कर्ष निकालने की कोशिश करेंगे तो आपको पता चलेगा या आप इस निष्कर्ष पर पहुंचेंगे कि भारत में मुसलमानों के साथ बड़ा अत्याचार हो रहा है। अगर भारत में मुसलमानों के साथ अत्याचार हो रहा है तो जरा वो लोग बताएं कि कौन सा ऐसा देश है जहां मुसलमान भारत से ज्यादा सुरक्षित है।

थोड़ी पुरानी बात है… साल 1921… केरल में एक जगह है मालाबार। वहां का मोपला नरसंहार उस शताब्दी का सबसे बड़ा सांप्रदायिक दंगा था। उस दंगे के बारे में वीर सावरकर, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर, एनी बेसेंट जैसे नेताओं ने क्या उजागर किया? उन्होंने उसके पीछे की इस्लामिक मानसिकता को उजागर किया। लेकिन सबसे बड़ी बात कही गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर ने। उनके मुताबिक आजादी से पहले तो जो चलना था, वो चला, आजादी के बाद भी जो नीतियां बनाई गई वो मुसलमानों को भारत को हड़पने यानी भारत को दारुल इस्लाम बनाने की छूट देने वाली और हिंदुओं को भ्रमित रखने वाली थीं। ये जो गंगा जमुनी तहजीब की बात है ये सिर्फ हिंदुओं को भ्रमित करने के लिए है। तो इस बारे में और हिंदू मुस्लिम संबंधों के बारे में जो कुछ गुरुदेव ने लिखा उसको वामपंथी और कांग्रेसी इतिहासकारों ने कभी सामने आने नहीं दिया। अगर उनकी बातों को लोगों तक पहुंचाया गया होता, लोगों तक पहुंचने दिया गया होता, तो शायद हिंदुओं के मन में जो भ्रम है- जो गंगा जमुनी तहजीब के लॉलीपॉप के पीछे भागने वाले हिंदू हैं- उनको समझ में आता कि वास्तविकता क्या है?

गुरुदेव ने एक लेख लिखा जिसका शीर्षक था- समस्या। श्रृंगेरी शारदा पीठ के जगतगुरु को भेजी गई एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि मालाबार के हिंदू बहुत विनम्र हैं। वो मोपला मुसलमानों से बहुत डरते हैं। जब भी संकट आता है वे अपने परिवार को लेकर पलायन कर जाते हैं। गुरुदेव कहते हैं कि हिंदुओं को लगता है कि एक दिन ऐसा आएगा जब ईश्वर इन अत्याचारियों को सजा देगा। फिर उसके बाद जो बात वह कहते हैं उसे हर हिंदू को गांठ बांध लेना चाहिए, अपने मन में उसे धारण कर लेना चाहिए। उन्होंने कहा हिंदुओं की समस्या क्या है? हिंदुओं की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वो सांसारिक समस्याओं का समाधान व्यावहारिक रूप से नहीं करता है। उसके बजाय उसको ईश्वर पर भरोसा हो जाता है। वह ईश्वर पर आश्रित हो जाता है कि उनकी समस्या का हल ईश्वर निकाल देंगे, जो अत्याचारी है उनको एक दिन दंडित कर देंगे। इस बात को आप मालाबार ही नहीं- सोमनाथ में जो हुआ, जिस तरह से देश भर में हिंदू मंदिरों को तोड़ा गया, भगवान की मूर्तियों को तोड़ा गया- उन सब में देखेंगे। सबसे बड़ा उदाहरण तो सोमनाथ का ही है जहां पुजारियों को लगा कि महादेव खुद रक्षा करेंगे, महादेव के मंदिर पर कौन आक्रमण कर सकता है, कौन तोड़ सकता है।

Rabindranath Tagore, the unlikely conservative on Hindu marriages | Books  News - The Indian Express

गुरुदेव रबीन्द्रनाथ की एक बात और सुनिए और हमेशा के लिए याद रखिए। उन्होंने कहा कि हिंदुओं ने आत्मरक्षा ना करके ईश्वर का सबसे बड़ा अपमान किया है। आत्मरक्षा की यही बात वीर सावरकर सिखाते थे कि हिंदुओं को आत्मरक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए। किसी ने इनमें से यह नहीं कहा कि किसी और मजहब के व्यक्ति पर आक्रमण करना चाहिए, हिंसा करनी चाहिए। सबने आत्मरक्षा की बात की। आत्मरक्षा वही कर सकता है जिसके साथ दो चीजें हों। एक- एकजुट हो और दो- ताकतवर हो। कमजोर आत्मरक्षा नहीं कर सकता और बंटा हुआ समाज आत्मरक्षा नहीं कर सकता। मालाबार की हिंसा में मोपला मुसलमानों ने जो नरसंहार किया उसकी कथा सुनेंगे तो आपकी रूह कांप जाएगी। जिस तरह का अत्याचार हुआ उस सबको ढकने, छिपाने के लिए कहां से प्रयास हुआ? सबसे बड़ा प्रयास हुआ महात्मा गांधी की ओर से। उन्होंने इसे जमींदारों और किसानों का संघर्ष बताकर कहानी खत्म कर दी।

ये स्थिति आई क्यों? गुरुदेव ने लिखा है कि 800 साल पहले मालाबार के राजा ने अरब से आए व्यापारियों को अपने राज्य में बसने की इजाजत दे दी। उनके मंत्रियों ने सलाह दी कि ये व्यापारी हैं, इनको बसने देना चाहिए। उसके बाद वो धर्म परिवर्तन कराने लगे। राजा ने मूर्खतापूर्ण फैसला लिया और धर्म परिवर्तन की भी अनुमति दे दी। उसी की सजा हम आज तक भुगत रहे हैं। राजा का एक गलत निर्णय कैसे पीढ़ियों को प्रभावित करता है, उसका उदाहरण है मालाबार। और हिंदुओं को- मालाबार के हिंदुओं को और देश भर में हिंदुओं को- लगता रहा कि ऐसे अत्याचारों से उन्हें ईश्वर बचाएंगे। ये ईश्वर के कारण हो रहा है। वही हमको बचाएंगे। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि हिंदू घटते गए और उनमें से बहुत से मुसलमान हो गए। उन्होंने कहा कि सिर्फ अत्याचार के बारे में सोचते रहेंगे तो उससे कोई परिणाम नहीं निकलेगा। अगर इस अत्याचार को रोकना है तो इस मूर्खता से छुटकारा पाना होगा कि ईश्वर आकर हमें बचा लेंगे। हमको आत्मरक्षा की जरूरत नहीं है जिस दिन हम एकजुट हो जाएंगे। अब इसमें से आप वो बात निकाल सकते हैं जो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कही कि बंटोगे तो कटोगे। गुरुदेव ने कहा जिस दिन हम इस मूर्खता से छुटकारा पा लेंगे उस दिन अत्याचारी हमारे सामने आत्मसमर्पण करेगा।

गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर का एक निबंध संग्रह है। स्वामी श्रद्धानंद शीर्षक से निबंध में उन्होंने लिखा है कि ‘अल्लाहू अकबर का नारा मुसलमान लगाएगा तो सब इकट्ठा हो जाएंगे। कोई मतभेद नहीं होगा। कोई सवाल नहीं उठेगा। कोई विवाद नहीं होगा।’ यहां आप उनकी पीड़ा को समझिए। वो कहते हैं कि ‘हम पुकारेंगे तो कोई नहीं आएगा। हम प्रांत में, भाषा में, क्षेत्रीयता में, अलग-अलग संप्रदायों में बटे हुए हैं। यही वजह है कि हम लड़े तो मुसलमानों और मुगलों से लेकिन छोटी-छोटी टुकड़ियों में लड़े। नतीजा यह हुआ सब मारे गए।’ जो उन्होंने नहीं कहा उसका इशारा यह है कि अगर एकजुट होकर लड़ते तो हमारी यह दुर्दशा न हुई होती। और फिर उसी निबंध में वह चेतावनी देते हैं कि अपने बच्चों के भविष्य के बारे में सोचिए। अगर कमजोर कंधों पर हिंदुत्व को छोड़कर जाएंगे तो क्या होगा, इसकी आप कल्पना कर सकते हैं?

ये बातें जब उन्होंने लिखी थीं, कही थीं, उस समय से हिंदुओं के बीच में प्रचारित-प्रसारित की जातीं। कोई लेकर जाता और हिन्दुओं को समझाता कि गुरुदेव ने क्या कहा, तो आपको समझ में आता कि क्या करना चाहिए, या क्या करना चाहिए था, या अब भी क्या करना चाहिए। उन्होंने कहा हिंदू मुसलमान कुछ समय के लिए झूठी दोस्ती कर सकते हैं। फिर वह व्यवहारिक जीवन का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि कांटेदार जमीन को जब तक आप कांटों से मुक्त नहीं करेंगे तब तक उस पर फलदार वृक्ष नहीं लग सकते।

फिर ‘ओरिजिनल वर्क्स ऑफ टैगोर’ जिसे विश्व भारती ने 1982 में प्रकाशित किया, उसके वॉल्यूम 24 में पेज 375 पर उन्होंने लिखा कि दुनिया में दो मजहब इस्लाम और ईसाई ऐसे हैं जो इस बात से संतुष्ट नहीं होते कि उनको अपने मजहब का पालन करने की स्वतंत्रता है। वह दूसरे मजहब को नष्ट करने के लिए उतावले रहते हैं।

1924 में ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि मुसलमान की निष्ठा कभी एक देश के लिए नहीं हो सकती। गुरुदेव ने कहा कि उन्होंने बहुत से मुसलमानों से बात की- मान लीजिए कोई विदेशी आक्रांता, मुस्लिम आक्रांता अगर भारत पर हमला करे तो आप अपने देश की रक्षा के लिए अपने पड़ोसी के साथ, अपने हिंदू भाइयों के साथ खड़े होंगे- या उनका साथ देंगे। गुरुदेव ने कहा कि उन्हें जो उत्तर मिला वो बड़ा निराशाजनक था। यही बात डॉक्टर अंबेडकर ने भी लिखी है। उन्होंने कहा कि किसी भी मुसलमान के लिए राष्ट्रभक्ति प्राथमिकता नहीं हो सकती, उसके लिए उसका मजहब प्राथमिक है। उन्होंने अली ब्रदर्स का जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि अली ब्रदर्स, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया, वो भी अपनी वसीयत में लिख कर गए कि मरने के बाद उनको भारत में नहीं किसी मुस्लिम देश में दफनाया जाए।

Here is what Rabindranath Tagore thought of Islam

गुरुदेव ने लिखा है कि मुसलमानों के लिए देश और पड़ोसी से ज्यादा महत्वपूर्ण उनका मजहब है। उन्होंने कहा कि छूट दी गई मुसलमानों को कि वो इस पूरे देश पर कब्जा कर सकें- जो वो बंटवारे से नहीं कर पाए- इस तरह की नीतिया बनाई गई। हिंदुओं को भ्रमित रखा गया। उनको गंगा जमुनी तहजीब का लॉलीपॉप दिखाया गया। आज तक हम उसमें फंसे हुए हैं। हमारे दिमाग में स्पष्टता ही नहीं है कि हमारी प्राथमिकता क्या है? मुसलमानों के यहां कोई कन्फ्यूजन नहीं है, उनके यहां कोई भ्रम नहीं है। उनके लिए सिर्फ और सिर्फ मजहब सबसे आगे है- पहला भी है और आखिरी भी है। देशप्रेम, राष्ट्र प्रेम, भाईचारा ये सब तात्कालिक बातें हैं। गुरुदेव ने कहा कि थोड़े समय के लिए वो हिंदू मुसलमान साथ होने का,साथ रहने का नाटक कर सकते हैं, लेकिन अंततः मुसलमान के लिए उसका मजहब ही सब कुछ है।

सवाल ये है कि कितने हिंदू इस बात को समझते हैं। उनको लगता है कि ये सब मुसलमानों के खिलाफ बोला जा रहा है। गनीमत है कि ये बातें गुरुदेव रबीन्द्र नाथ टैगोर ने की हैं। अगर किसी राजनीतिक दल के नेता ने की होतीं तो वही होता जो राजनीतिक दल के नेता के साथ होता है। ऐसा नहीं कि गुरुदेव के साथ कुछ नहीं हुआ। यह सब लिखने कहने के कारण उनको अंग्रेजों का पिट्ठू बताकर, अंग्रेजों का एजेंट बताकर बदनाम करने की कोशिश हुई। आप सोचिए ये बातें जब 20वीं शताब्दी में गुरुदेव बोल रहे थे, लिख रहे थे, तब से बताई गई होतीं, इनको प्रकाश में लाया गया होता- तो आपकी मनःस्थिति क्या होती? क्या आज जैसी होती? इस पर विचार कीजिए। अब भी देर नहीं हुई है- जब जागे तभी सवेरा। जब बात समझ में आ जाए- जब मतिभ्रम दूर हो जाए- जब आपके दिमाग के जाले साफ हो जाएं- तभी अच्छा है। याद रखिए कि हिंसा किसी समस्या का हल नहीं है। दूसरा एकजुटता में जो ताकत है वह और किसी चीज में नहीं है। अन्यथा… बंटेंगे तो कटेंगे, उसके लिए तैयार रहिए।

(लेखक राजनीतिक विश्लेषक और ‘आपका अख़बार’ के संपादक हैं)