शाह की सक्रियता के संकेत समझिए।
प्रदीप सिंह।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह इन दिनों अति सक्रिय दिख रहे हैं और उनकी यह अति सक्रियता बहुत से लोगों के लिए खतरे का सबब बनने वाली है। पहली खबर तो यह है कि करीब चार दशक से आतंकवाद का दंश झेल रहे देश में पहली बार आतंकवाद विरोधी नीति ‘प्रहार’ बनी है। इसमें आतंकवाद से निपटने के तमाम तरीके अपनाने और एक इंटीग्रेटेड एप्रोच के रूप में आतंकवाद के खिलाफ काम करने की योजना है। यह देश के लिए बहुत अच्छी और आतंकवादियों व देश के अंदर बैठे उनके पैरोकारों के लिए बहुत बुरी खबर है।
इसके साथ ही एक और खबर है। 20 फरवरी को इंडिया एआई इंपैक्ट समिट के दौरान भारत मंडपम में यूथ कांग्रेस के गुंडों ने जो बेशर्मी की, उस पर चार दिन तक कांग्रेस चुप रही,लेकिन मंगलवार को कांग्रेस के सर्वोच्च नेता राहुल गांधी खुलकर उनके समर्थन में आ गए। उन्होंने कहा कि मुझे अपने शेरों पर गर्व है और उन्हें भाजपा और संघ से डरने की जरूरत नहीं है। मेरा मानना है कि इसके साथ ही राहुल को यह भी कहना चाहिए था कि तुम्हें कानून से डरने की जरूरत है। जो देश के विरोध में खड़ा हो,देश को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करे,उसको तो जरूर डरना चाहिए। मुझे लगता है कि बहुत जल्दी यूथ कांग्रेस में यह डर आपको दिखाई देगा और इसकी आंच राहुल गांधी तक भी जरूर पहुंचेगी। इस मामले में सात लोगों को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जो लोग दिल्ली से बाहर भागे गए हैं उनकी भी गिरफ्तारी की कोशिश चल रही है। गिरफ्तार लोगों में यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष उदयभानु चिब भी शामिल हैं। उनको पटियाला कोर्ट में पेश कर पुलिस ने 7 दिन की रिमांड मांगी थी। कोर्ट ने चार दिन की रिमांड दे भी दी है। पुलिस का कहना है कि वह जांच में सहयोग नहीं कर रहे, किसी सवाल का जवाब नहीं दे रहे हैं और वही इस पूरी घटना के मास्टरमाइंड हैं। उन्होंने ही योजना बनाई। पुलिस उस प्रिंटिंग प्रेस की भी तलाश कर रही है,जहां वह टीशर्ट छपीं जिन पर प्राइम मिनिस्टर इज कॉम्प्रोमाइज्ड लिखा हुआ था।

एक अंतरराष्ट्रीय समारोह में आप अधनंगे होकर प्रदर्शन करते हैं तो आप किसका मान बढ़ा रहे हैं और किसका अपमान कर रहे हैं? नरेंद्र मोदी भाजपा के प्रधानमंत्री नहीं हैं। वह भारत के प्रधानमंत्री हैं। अब राहुल गांधी कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री डरे हुए हैं। यह बात राहुल गांधी कम से कम दसवीं बार बोल रहे होंगे। तो राहुल गांधी कौन सा चश्मा पहन कर देखते हैं मुझे मालूम नहीं है, लेकिन राहुल गांधी और कांग्रेसियों के मन में डर जरूर दिखाई दे रहा है। दिल्ली पुलिस ने जो धाराएं लगाई हैं, उनमें षड्यंत्र की धारा भी है। इस घटना को सोच समझकर अंजाम दिया गया, पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया, सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा पहुंचाई गई और देश में दंगा फसाद कराने की कोशिश की गई। ये सब गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
अब यूथ कांग्रेस के प्रेसिडेंट के समर्थन में मल्लिकार्जुन खरगे से लेकर राहुल गांधी तक सब उतर आए हैं। हालांकि कांग्रेस के कई पुराने नेता कह रहे हैं कि यह गलत हुआ, नहीं होना चाहिए था। कांग्रेस के जो समर्थक दल हैं, उनमें से भी किसी ने कांग्रेस का समर्थन नहीं किया है। तो विपक्ष में इस पूरे मुद्दे पर कांग्रेस और राहुल गांधी अलग-थलग पड़ गए हैं। लेकिन राहुल गांधी ने तय कर लिया है कि वह अराजकता के रास्ते पर ही चलेंगे। इस घटना के बाद कांग्रेस के नेता कह रहे हैं कि देश का यूथ बहुत नाराज है। भैया, इस देश की 140 करोड़ की आबादी में दो तिहाई युवा हैं। क्या ये 20-25 युवा ही इस पूरे देश के युवाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं? कहीं और कोई विरोध दिखाई दिया क्या? और विरोध किस बात का कर रहे थे? कांग्रेस कह रही है कि अमेरिका से जो डील हुई है, उसका विरोध कर रहे हैं। सरकार ने किसानों का हित बेच दिया है, देश को बेच दिया है।
सवाल यह है कि क्या कोई डील भारत-अमेरिका के बीच में हुई है? अभी तक तो नहीं हुई है। भारत -अमेरिका के बीच इंटरिम डील का सिर्फ फ्रेमवर्क तैयार हुआ है। फिर राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को कौन बता रहा है कि क्या बेच दिया गया,क्या खरीद लिया गया? राहुल गांधी और कांग्रेस देश में केवल अराजकता पैदा कर लोगों को सड़क पर उतारना चाहते हैं, जो उनके बस की बात नहीं है। राहुल ऐसी कोशिश बहुत बार कर चुके हैं।
इस घटना के बाद जिस तरह की जांच हो रही है, इससे पता चलता है कि सरकार खासतौर से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने तय कर लिया है कि इस तरह की अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिन लोगों ने यह किया है, उनको इसकी सजा मिलनी चाहिए। दिल्ली पुलिस जिस तत्परता से काम कर रही है,उससे बहुत स्पष्ट है कि उसको पूरा फ्री हैंड है। अभी प्राथमिक तौर पर दिल्ली पुलिस का मानना है यूथ कांग्रेस अध्यक्ष उदयभानु चिब इस षड्यंत्र के मास्टरमाइंड हैं। लेकिन मेरा मानना है कि यह षड्यंत्र केवल यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष के बस की बात नहीं है। इसमें कांग्रेस के ऊपर के लोग भी शामिल हैं। ये जो चार दिन की रिमांड मिली है, इसमें पुलिस चिब से तो पूछताछ करेगी ही उसके अलावा जो लोग गिरफ्तार हुए हैं उनसे इनका आमना-सामना भी कराएगी। अब उदयभानु चिब के लिए बचना बहुत कठिन होगा और उनसे ज्यादा कठिन उनके लिए होगा जिनके निर्देश पर उन्होंने यह शर्मनाक हरकत की।

राहुल गांधी और मलिकार्जुन खरगे दोनों अब इस घटना को ओन करते हुए कह रहे हैं कि जनतंत्र में विरोध प्रदर्शन का अधिकार है। बिल्कुल ठीक बात है। लेकिन कहां पर और कैसे? जिस जगह पर अधनंगे होकर प्रदर्शन किया गया, वहां एआई इंपैक्ट समिट चल रहा था। 20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष और 80 देशों के प्रतिनिधि आए हुए थे। वहां पर आप भारत-अमेरिका डील का विरोध करने गए थे या एआई का विरोध करने गए थे। आपको यही नहीं मालूम कि वह मंच क्या है। आपको सिर्फ यह लगा कि वहां अंतरराष्ट्रीय समुदाय है तो हमको खूब पब्लिसिटी मिलेगी। हालांकि इस घटना के बाद कोई उनके समर्थन में सामने आ नहीं रहा है। लेकिन राहुल गांधी को कोई शर्म नहीं है। नरवणे की किताब को लेकर उन्होंने चार दिन तक संसद नहीं चलने दी और अब कह रहे हैं कि वह तो मुद्दा ही नहीं है क्योंकि जनरल नरवणे ने ही उनको एक्सपोज कर दिया।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे कह रहे हैं कि बीजेपी और उसकी सरकार कांग्रेसियों को डरा रही है। सवाल यह है कि अगर आपने कुछ गलत नहीं किया है तो डर क्यों रहे हैं? आप डर इसलिए रहे हैं कि आपको पता है आपने गलत किया है। राहुल कांग्रेस एक अराजकतावादी संगठन बन गया है। देश में अराजकता पैदा करने के लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। राहुल गांधी हर वह काम करना चाहते हैं, जिससे भारत की छवि खराब हो। भारत मंडपम में अधनंगे होकर प्रदर्शन करने वाले राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं की आम जनता ने पिटाई की और ऐसा देश में पहली बार हुआ। इससे ज्यादा शर्मनाक बात कांग्रेस पार्टी के लिए क्या हो सकती है।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)



