नक्शे में पहली बार पीओके को भारत का हिस्सा दिखाया

#pradepsinghप्रदीप सिंह।
कभी-कभी बहुत बड़े-बड़े घटनाक्रमों के बीच में एक ऐसी घटना होती है जिसका मैग्नीट्यूड तो बहुत बड़ा होता है,लेकिन उस पर चर्चा कम होती है। अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील का फ्रेमवर्क तैयार हो गया है। इंडस्ट्री और कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने कहा है कि मार्च के मध्य तक डील साइन होने की उम्मीद है। यह डील भारत के लिए बड़ा अवसर है। अहम बात यह है कि इसी के साथ अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ने भारत का नक्शा भी जारी किया है और पहली बार इस नक्शे में पीओके को भारत का हिस्सा दिखाया गया है।

इस समय जैसी जिओपॉलिटिक्स है। अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्ते जिस तरह से सुधर रहे थे। पाकिस्तान का फील्ड मार्शल आसिम मुनीर जिस तरह से दो-दो,तीन-तीन बार अमेरिका की यात्रा पर गया और राष्ट्रपति ट्रंप से मिला। अमेरिका ने जिस तरह से पाकिस्तान को आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक से लोन दिलवाया। इस सबको देखते हुए लग रहा था कि अमेरिका पाकिस्तान का इस्तेमाल भारत के खिलाफ अब ज्यादा कर रहा है,लेकिन इस नक्शे ने पाकिस्तान को बहुत बड़ा झटका दिया है। हालांकि अभी यह निष्कर्ष निकालना गलत होगा कि अमेरिका की रुचि पाकिस्तान में खत्म हो गई है। पाकिस्तान की जरूरत अमेरिका को अब भी है। लेकिन जब भारत की बात आती है तो अमेरिका यह समझता है कि किसी भी हालत में पाकिस्तान भारत का विकल्प नहीं हो सकता। भारत की इकॉनमी का जो साइज है,भारत की जो सैन्य तैयारी है,भारत में स्वदेशी का जो अभियान चला है और जियोपॉलिटिक्स एवं ग्लोबल स्टेज पर भारत और खासतौर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जो प्रतिष्ठा है, उसकी तुलना में पाकिस्तान कहीं नहीं आता।

तो पाकिस्तान की एक सीमित हद तक अमेरिका के लिए उपयोगिता है,लेकिन भारत उसकी जरूरत है। अमेरिका को पता है कि भारत को साथ लिए बिना वह चीन को रोकने में सफल नहीं हो सकता। यह नक्शा जारी करना अमेरिका का एक तरह से पाकिस्तान को संदेश भी है कि भारत से अपनी तुलना मत करो। हमारी नजर में जो हैसियत भारत की है वह तुम्हारी कभी नहीं हो सकती है। कश्मीर के मुद्दे पर भारत की संसद सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर चुकी है कि पीओके को एक दिन लेना है। हम हमेशा यह कहते रहे हैं कि पाक ऑक्यूपाइड कश्मीर भारत का हिस्सा है और हमेशा रहेगा। जिस तरह से पीओके में पाकिस्तान की सरकार के खिलाफ आंदोलन हो रहा है,उससे यह संभावना बढ़ गई है कि वह दिन बहुत ज्यादा दूर नहीं है जब पाकिस्तान के कब्जे से यह हिस्सा मुक्त हो जाएगा। पाकिस्तान वैसे भी चारों तरफ से घिरा हुआ है। पाकिस्तान की सेना बलूचिस्तान के विद्रोहियों को रोकने में पूरी तरह से असफल हो गई है। विद्रोही जब चाहते हैं पाकिस्तानी सेना पर हमला करते हैं और पाकिस्तान की सेना कुछ नहीं कर पाती। अब पाकिस्तान में हालात यह बन रहे हैं कि कोई पाकिस्तानी फौजी बलूचिस्तान में पोस्टिंग के लिए तैयार नहीं है। ऐसे फौजियों की संख्या बढ़ती जा रही है, जिन्होंने औपचारिक प्रक्रिया पूरी किए बिना फौज छोड़ दी। अचानक छुट्टी पर चले गए और लौट कर नहीं आए।

पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व पर पाकिस्तान के सैनिकों का ऐसा अविश्वास इससे पहले शायद ही कभी दिखा हो, जितना आज है। पाकिस्तान की सेना एक व्यापारिक संस्थान बन गई है। वह सौदे करने लगी है। उसे न देश की इकॉनमी की चिंता है और न ही देश की सुरक्षा की चिंता है। अफगानिस्तान से पंगा पाकिस्तान को और भारी पड़ने वाला है। ऐसे में अमेरिका का यह संदेश बहुत मायने रखता है। भारत के नक्शे में पीओके को दिखाना चीन के लिए भी संदेश है। चीन ने पीओके के एक हिस्से को पाकिस्तान से खरीद लिया है या कब्जा कर लिया है। वहां की करीब 5000 वर्ग किलोमीटर जमीन पर चीन काबिज है। यानी चोरी के माल में चीन ने भी बंटवारा किया। चीन वहां इंफ्रास्ट्रक्चर बना रहा है। चाइना पाकिस्तान इकोनमिक कॉरिडोर उसी रास्ते से होकर जा रहा है। अमेरिका ने साफ संकेत दिया है कि पीओके के मुद्दे पर अमेरिका भारत की राय से सहमत है। इसलिए पीओके लेने के लिए अगर भविष्य में भारत कभी हमला करता है तो अमेरिका उसका विरोध नहीं करेगा। हालांकि अमेरिका ने यह बात सीधे नहीं कही है,लेकिन डिप्लोमेसी ज्यादातर संकेतों की भाषा में ही चलती है। इस तरह का संकेत अमेरिका ने पहली बार दिया है।

इंग्लैंड की संसद में पहले ही यह प्रस्ताव पास हो चुका है कि पीओके भारत का अभिन्न हिस्सा है और भारत का ही रहना चाहिए और अब अमेरिका के रुख में आया यह बदलाव बहुत कुछ कहता है। इस मुद्दे पर भारत का साथ देकर अमेरिकी राष्ट्रपित डोनाल्ड ट्रंप एक तरह से भारत का खोया हुआ विश्वास जीतने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले 20-22 सालों से अमेरिका में किसी भी पार्टी की सरकार रही हो,उसने भारत से संबंध सुधारने की लगातार कोशिशें की हैं। अमेरिका भारत को स्ट्रेटेजिक पार्टनर कहता रहा है, लेकिन ट्रंप के इस दूसरे कार्यकाल में उनके ईगो के कारण संबंध बिगड़ना शुरू हुए। हालांकि अभी यह मान लेना गलती होगा कि उनका ईगो खत्म हो गया है।

ट्रेड डील के एग्जीक्यूटिव आर्डर में भारत पर जो 25% पीनल टैरिफ खत्म किया गया है, इसमें भी मेंशन किया गया है कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। अमेरिका के कॉमर्स मिनिस्टर हैं इस पर निगरानी रखेंगे कि भारत ने तेल खरीदना बंद किया कि नहीं और अगर नहीं किया तो राष्ट्रपति फिर से टैरिफ लगा सकते हैं। तो भारत को रूस से तेल खरीद के मामले में तलवार की धार पर चलना है। अमेरिका को समझाना पड़ेगा कि भारत अगर रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम बढ़ जाएंगे।

इस ट्रेड डील के लिए अमेरिका ने भारत को झुकाने की बहुत कोशिश की, लेकिन भारत ने अपनी रेड लाइन क्रास नहीं की। लेकिन अब जो स्थिति है चाहे वह उनके ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव की ओर से भारत का नक्शा जारी करना हो या जो डील का फ्रेमवर्क तैयार हुआ है, ये दोनों ही भारत के लिए विन-विन सिचुएशन है। 30 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी में हमको अपना सामान बेचने का रास्ता खुल गया है। अब सब कुछ हमारे ऊपर है कि हमारी तैयारी कितनी है? हमारे प्रोडक्शन का स्केल कितना है और हमारे प्रोडक्शन की क्वालिटी क्या है। भारत के लघु और मध्यम उद्योगों और भारत के बेरोजगारों के लिए यह डील बहुत अच्छी खबर है। इससे इतना तो तय है कि रोजगार के अवसर बड़ी मात्रा में बढ़ने वाले हैं।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)