फीडबैक यूनिट मामले में सीबीआई ने सिसोदिया के अलावा आईआरएस अफसर सुकेश कुमार जैन, सीआईएसएफ के रिटायर्ड डीआईजी राकेश कुमार सिन्हा, आईबी के ज्वॉइंट डिप्टी डायरेक्टर प्रदीप कुमार पुंज, सीआईएसएफ के रिटायर्ड असिस्टेंट कमांडेंट सतीश खेत्रपाल और गोपाल मोहन को भी आरोपी बनाया है।
इस पर आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘प्रधानमंत्री का प्लान मनीष सिसोदिया पर झूठे मामले थोपने और लंबे समय तक हिरासत में रखने का है। देश के लिए ये दुख की बात है।’
दिल्ली बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि ये गंभीर मामला है और सीबीआई को देशद्रोह के एंगल से भी इसकी जांच करनी चाहिए। वहीं, दिल्ली कांग्रेस के उपाध्यक्ष अली मेहदी ने कहा कि ये आंतरिक सुरक्षा का मामला है, इसलिए सभी आरोपियों पर UAPA के तहत केस दर्ज होना चाहिए।
क्या है फीडबैक यूनिट?
- 2015 में जब आम आदमी पार्टी दिल्ली की सत्ता में आई। इसके बाद एंटी-करप्शन ब्रांच (एसीबी) पर कंट्रोल को लेकर दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल में जंग छिड़ गई। बाद में एसीबी का पूरा कंट्रोल उपराज्यपाल के पास चला गया।
- इस लड़ाई को हारने के बाद अरविंद केजरीवाल ने अपनी सतर्कता विभाग के तहत खुद की जांच एजेंसी खोलने का फैसला लिया। इसके बाद ‘फीडबैक यूनिट’ बनी।
- फीडबैक यूनिट का काम दिल्ली सरकार के अधीन आने वाले सरकारी विभाग, ऑटोनमस बॉडी, इंस्टीट्यूशन और अन्य संस्थाओं पर नजर रखने का था।
- फीडबैक यूनिट बनाने का फैसला 29 सितंबर 2015 को कैबिनेट मीटिंग में लिया गया। फरवरी 2016 से इसने काम शुरू किया। इसमें 17 संविदा कर्मचारी थे, जिनमें से ज्यादातर आईबी और केंद्रीय बलों से रिटायर्ड अफसर थे।

फीडबैक यूनिट को लेकर क्या हैं आरोप?
- सीबीआई का आरोप है कि सिसोदिया और अन्य आरोपी अफसरों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रुल्स और रेगुलेशन को ताक पर रखते हुए फीडबैक यूनिट को बनाया। ये भी आरोप लगाया कि इस यूनिट को ‘बेइमान इरादे’ से बनाया गया था।
- सीबीआई ने आरोप लगाया कि फीडबैक यूनिट के अफसर राकेश कुमार सिन्हा, प्रदीप कुमार पुंज, सतीश खेत्रपाल और सलाहकार गोपाल मोहन ने ‘राजनीतिक खुफिया जानकारी’ इकट्ठा करने के लिए न सिर्फ यूनिट के कर्मचारियों का इस्तेमाल किया, बल्कि सीक्रेट सर्विस फंड का भी दुरुपयोग किया।
- जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि फीडबैक यूनिट को बनाने और उसके कामकाज के गैर-कानूनी तरीके से सरकारी खजाने को 36 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
40% रिपोर्ट राजनीतिक खुफिया जानकारी से जुड़ीं
- सीबीआई की अब तक की जांच में सामने आया है कि फीडबैक यूनिट में 17 रिटायर्ड अफसरों को नियुक्त करने से पहले प्रशासनिक सुधार विभाग और एलजी की मंजूरी नहीं ली गई थी।
- सीबीआई ने फीडबैक यूनिट की तैयार रिपोर्ट्स का एनालिसिस करने के बाद बताया कि 60% रिपोर्ट सतर्कता और भ्रष्टाचार के मामलों से जुड़ी थीं, जबकि 40% रिपोर्ट राजनीतिक खुफिया जानकारी से जुड़ी हुई थीं।
- जांच में ये भी खुलासा हुआ है कि फीडबैक यूनिट की रिपोर्ट के आधार पर किसी सरकारी अफसर या विभाग के खिलाफ कोई औपचारिक कार्रवाई नहीं की गई।
सिसोदिया कैसे फंस गए इसमें?
- गृह मंत्रालय ने कथित राजनीतिक जासूसी मामले में मनीष सिसोदिया के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी दी थी।
- इस मामले में मनीष सिसोदिया इसलिए घेरे में आ गए, क्योंकि उनके पास सतर्कता विभाग भी था, जिसके अंतर्गत फीडबैक यूनिट बनाई गई थी।
- इसके बाद दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने पिछले महीने सिसोदिया के अलावा पांच अन्य अफसरों के खिलाफ सीबीआई जांच को मंजूरी दे दी थी।(एएमएपी)



