आम आदमी पार्टी का सीएम फेस इसुदान गढ़वी को बनाए जाते ही इंद्रनील राजगुरु ने पार्टी छोड़ दी है। इसके बाद से ही यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि आखिर इंद्रनील राजगुरु की बगावत आम आदमी पार्टी को कितना नुकसान पहुंचा सकते हैं। इंद्रनील राजगुरु सौराष्ट्र के बड़े चेहरे रहे हैं, जो कांग्रेस छोड़कर आम आदमी पार्टी में आए थे। उनके एग्जिट से आम आदमी पार्टी को सौराष्ट्र में बड़ा झटका लग सकता है, जहां वह मजबूती से आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी। गुजरात में सौराष्ट्र वह इलाका है, जहां कांग्रेस और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर रही है। ऐसी स्थिति में आम आदमी पार्टी यहां भाजपा को कड़ी टक्कर देने की कोशिश करती रही है।इंद्रनील राजगुरु इसी इलाके के बड़े नेता रहे हैं और यहां उनके बाहर जाने से आम आदमी पार्टी के लिए फाइट करना मुश्किल होगा। इंद्रनील राजगुरु के असर को इससे समझा जा सकता है कि राजकोट ईस्ट सीट से वह 2012 में जीते थे और फिर 2017 में उन्होंने राजकोट वेस्ट सीट से सीएम विजय रूपाणी को ही चुनौती दे दी थी। यही नहीं चुनाव में वह मुकाबले में भी दिखे थे। रियल एस्टेट कारोबारी रहे इंद्रनील राजगुरु एक दौलतमंद नेता रहे हैं और स्थानीय स्तर पर अच्छा प्रभाव रहा है। इसलिए सौराष्ट्र इलाके में आम आदमी पार्टी को झटका लग सकता है। इसके अलावा कांग्रेस को यहां फायदा होगा, जो आपके आने से बड़ी चुनौती का सामना कर रही थी।
आम आदमी पार्टी के लिए एक चुनौती यह भी है कि उसने गोपाल इटालिया की आलोचना होने पर पिछले दिनों जो पटेल कार्ड चला था, उस पर झटका लग सकता है। अब भाजपा की ओर से पाटीदारों के बीच यह संदेश दिया जा सकता है कि आम आदमी पार्टी उनके समुदाय की परवाह नहीं करती। यही नहीं सूत्रों का कहना है कि गोपाल इटालिया भी इसुदान गढ़वी को सीएम फेस बनाए जाने से खुश नहीं है। शुक्रवार को उनके सीएम फेस बनने का ऐलान करते वक्त इटालिया के चेहरे पर भी चिंता और दुख की लकीरें साफ दिख रही थीं।
राजकोट में क्यों अहम हैं इंद्रनील राजगुरु
इंद्रनील राजगुरु ने 2018 में कांग्रेस छोड़ी थी, लेकिन 2019 में एक बार फिर से वह कांग्रेस में आ गए थे। लोकसभा चुनाव में पार्टी के उम्मीदवारों के लिए प्रचार भी किया था। इंद्रनील राजगुरु अपनी दौलत को लेकर भी चर्चा में रहे हैं। इस बीच इंद्रनील राजगुरु के पार्टी से जाने पर आप का भी बयान सामने आया है। गुजरात इकाई के अध्यक्ष गोपाल इटालिया ने कहा कि इंद्रनील राजगुरु चाहते थे कि उन्हें ही सीएम का फेस बनाया जाए। इसके लिए वह पार्टी पर दबाव भी बना रहे थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। (एएमएपी)