लिम्बायत सीट से बीजेपी की जीत
मुस्लिम इलाकों की सभी 19 सीटों में सबसे अधिक मुस्लिम उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था और कई स्वतंत्र उम्मीदवार भी चुनाव लड़ रहे थे। राज्य की लिम्बायत सीट पर कुल 44 उम्मीदवार मैदान में थे जिसमें से 36 मुस्लिम उम्मीदवार शामिल थे। लेकिन बीजेपी की संगीताबेन राजेंद्र पाटिल लिम्बायत सीट से 52 फिसदी मतों के साथ विजयी रहीं थी। हालांकि दूसरे स्थान पर आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार 20 फिसदी वोटों के साथ रहे थे।
कांग्रेस के एकमात्र मुस्लिम उम्मीदवार की जीत
इस बार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के एकमात्र मुस्लिम उम्मीदवार इमरान खेड़ावाला ने जीत हासिल की है। हालांकि 2017 के चुनाव में इमरान खेड़ावाला के अलावा दो मुस्लिम उम्मीदवार एमए पीरजादा ने वांकानेर में और दरियापुर में ग्यासुद्दीन शेख ने जगह बनाई थी। दोनों ही इस बार चुनाव हार चुके हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) पार्टी के उम्मीदवारों ने महत्वपूर्ण मुस्लिम आबादी वाली 19 में से 13 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन वह किसी में भी अपनी जीत हासिल न कर सके। इसके अलावा एकमात्र सीट से एआईएमआईएम ने एकमात्र सीट भुज में 17.36 फीसदी वोट हासिल किए हैं। लेकिन यह अभी भी वहां बीजेपी की जीत के अंतर से कम है।
गोधरा से बीजेपी की लगातार 7 वीं बार जीत
गुजरात में मुसलमान राज्य की आबादी का 9 प्रतिशत है, लेकिन राज्य में खराब प्रतिनिधित्व का इतिहास रहा है। बीजेपी ने आखिरी बार 1998 में गुजरात विधानसभा चुनाव में एक मुस्लिम उम्मीदवार को मैदान में उतारा था लेकिन बीजेपी ने इस बार भी इतिहास रचते हुए भारी मुस्लिम आबादी वाली सीटों में से एक गोधरा में जीत हासिल कर ली है। वहां से बीजेपी के उम्मीदवार चंद्रसिंह राउलजी जीते हैं जिन्होंने बिलकिस बानो के बलात्कारियों को “संस्कारी ब्राह्मण” कहा था। वह निर्वाचन क्षेत्र से छह बार के विधायक हैं। (एएमएपी)