स्वदेशी प्रौद्योगिकियों से मिसाइल की समग्र लागत काफी कम हो गई।
अग्नि के सिद्धांत पर काम करने वाली ब्रह्मोस मिसाइल में डीआरडीओ ने पीजे-10 परियोजना के तहत स्वदेशी बूस्टर बनाकर इसकी मारक क्षमता बढ़ा दी है। 21वीं सदी की सबसे खतरनाक मिसाइलों में से एक ब्रह्मोस मिसाइल 8.4 मीटर लम्बी तथा 0.6 मीटर चौड़ी है। 3000 किलोग्राम की यह मिसाइल 300 किलोग्राम वजन तक विस्फोटक ढोने तथा 400 किलोमीटर तक लक्ष्य को मार गिराने की क्षमता रखती है। यह सुपर सोनिक क्रूज मिसाइल आवाज की गति से 2.8 गुना तेज जाने की क्षमता रखती है। भारत ने अब 800 किमी. की रेंज में टारगेट को हिट करने वाला ब्रह्मोस मिसाइल का नया वर्जन तैयार किया है। इस एयर लॉन्च संस्करण का परीक्षण शुरू कर दिया गया है।
इधर, रक्षा मंत्रालय नौसेना के फ्रंटलाइनर युद्धपोतों के लिए 200 से अधिक विस्तारित रेंज वाली मिसाइलों के अधिग्रहण को अंतिम रूप दे रहा है। रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) में खरीद के प्रस्ताव पर जल्द ही विचार करने के बाद इसे प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई वाली सुरक्षा संबंधी कैबिनेट कमेटी को अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। सौदे की वास्तविक लागत मिसाइलों की संख्या और कॉन्फ़िगरेशन पर निर्भर करेगी, लेकिन यह सौदा 15 हजार करोड़ रुपये से ऊपर होने की संभावना है। फिलहाल तीनों सेनाएं ब्रह्मोस से लैस हैं और अब तक 38 हजार करोड़ रुपये से अधिक के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं।(एएमएपी)



