चीन और भारत के बीच जारी सीमा विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। समझौते को लेकर हो रही कई बैठकों के बावजूद चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा। इसके विपरीत चीन लगातार ऐसे कदम उठा रहा है, जिन्हें उकसावे के तौर पर देखा जा रहा है। अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों के नाम बदलने का फैसला इन्हीं फैसलों में से एक है। जिसका भारत की तरफ से जवाब जरूर दिया गया, लेकिन चीन ने फिर से साफ कहा कि उसे नाम बदलने का पूरा हक है, क्योंकि अरुणाचल चीन का हिस्सा है। वहीं दूसरी तरफ चीन वैश्विक स्तर पर अपना कद लगातार ऊंचा कर रहा है, जो भारत के लिए एक बड़ी चिंता का विषय हो सकता है। आइए जानते हैं कैसे…

क्या है मौजूदा विवाद?

मौजूदा विवाद की बात करें तो चीन की तरफ से अरुणाचल प्रदेश में 11 पहाड़ियों और नदियों के नाम बदलने का फैसला लिया गया है। चीन ने इसे आधिकारिक तौर पर जारी किया और इनके कॉर्डिनेट भी दिए हैं। ऐसा चीन ने पहली बार नहीं किया है, ये तीसरी बार है जब चीन ने अरुणाचल की जगहों के नाम बदले हों। खास बात ये है कि मौजूदा मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान ही कई बार ये नाम बदले गए। इससे पहले अरुणाचल के गांवों के नाम भी बदले गए थे। इसे लेकर भारत ने हर बार चिंता जताई और इसे अस्वीकार कर दिया। इस बार भी ऐसा ही हुआ, लेकिन कोई कड़ा जवाब नहीं दिया गया।

भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, “चीन ने पहली बार ऐसी कोशिश नहीं की है, हम इसे अस्वीकार करते हैं। इस तरह की कोशिश से वास्तविकता नहीं बदल जाएगी। अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग रहा है और हमेशा रहेगा।” भारत के इस जवाब को लेकर अब सवाल भी खड़े हो रहे हैं। कई लोगों ने इसे काफी हल्का जवाब बताया।

भारत के जवाब पर उठे सवाल

सामरिक विषयों के एक्सपर्ट ब्रह्म चेलानी ने भी भारतीय विदेश मंत्रालय के जवाब पर ट्वीट किया। उन्होंने लिखा कि भारत अब तक तिब्बत को चीन का हिस्सा मानता है, खुद को नुकसान पहुंचाने के लिए इससे ज्यादा क्या हो सकता है? इसके बाद भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल की तरफ से भी बयान सामने आया। उन्होंने चेलानी का समर्थन करते हुए लिखा, “मैं भी मानता हूं कि भारत का जवाब काफी नरमी भरा है। भारत को चीन को सख्ती से जवाब देना चाहिए।”

हालांकि भारत के जवाब के बाद चीन की तरफ से भी पलटवार किया गया। चीन ने उकसावे वाला बयान देते हुए कहा कि अरुणाचल प्रदेश चीन का ही हिस्सा है। एक सवाल के जवाब में चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग्स ने कहा कि उसे जगहों के नाम बदलने का पूरा हक है।

चीन क्यों करता है अरुणाचल पर दावा?

अब सवाल ये है कि आखिर चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा क्यों करता है। अरुणाचल को 1987 में एक राज्य बनाया गया था। दरअसल अरुणाचल ने जब से तिब्बत पर कब्जा किया, उसके बाद से ही वो अरुणाचल पर अपना दावा पेश करता है और इसे साउथ तिब्बत बोलता है। तिब्बत पर चीन के कब्जे को लेकर दुनियाभर में बहस है। खुद दलाई लामा तिब्बत को चीन का हिस्सा बताने से इनकार करते हैं और इसे चीन की दादागीरी बताते हैं। ऐसे में चीन का तिब्बत के सहारे अरुणाचल पर दावा करना काफी खतरनाक माना जा रहा है।

भारत से रिश्ते नहीं सुधारना चाहता चीन?

चीन के रुख ने हर बार एक बात साफ की है कि वो किसी भी हाल में भारत के साथ सीमा विवाद को सुलझाना नहीं चाहता है। यानी चीन हमेशा भारत के लिए एक बड़े खतरे की तरह रहेगा। एक ऐसा खतरा जो कभी भी बढ़ सकता है और भारतीय जमीन कब्जाने की कोशिश कर सकता है। गलवान में हुई हिंसा के बाद सीमा विवाद को लेकर भारत-चीन की करीब 16 बैठकें हो चुकी हैं। इसके बावजूद मामला सुलझ नहीं पाया है। जब भी लगता है कि अब दोनों देशों के रिश्ते सुधर रहे हैं, तभी चीन कुछ ऐसा कर देता है कि तनाव फिर से बढ़ जाता है।

दुनियाभर में अपनी पैठ बढ़ा रहा चीन

अब भारत के लिए परेशानी सिर्फ यही नहीं है कि चीन सीमा पर लगातार भड़काऊ हरकतें कर रहा है और भारत की जमीन पर उसकी नजर है। भारत के लिए ये भी चिंता का सबब बन रहा है कि चीन वैश्विक स्तर पर अपनी पैठ को लगातार मजबूत करने में जुटा है। रूस के साथ चीन लगातार अपने रिश्ते बना रहा है, शी जिनपिंग हाल ही में रूस गए थे। जिसके बाद दोनों के बीच कई समझौते हुए। एक दूसरे के कट्टर दुश्मन माने जाने वाले ईरान और सऊदी अरब की ऐतिहासिक डील में भी चीन ने अहम भूमिका निभाई। इस डील को लेकर जारी हुए स्टेटमेंट में चीन का नाम लिया गया है।

चीन को लेकर भूटान का बदला रुख

हाल ही में भूटान के पीएम लोटे छृंग ने एक इंटरव्यू दिया था, जिसकी खूब चर्चा हुई। अपने इस इंटरव्यू में भूटान के पीएम ने चीन को क्लीन चिट दे दी थी। पहले तमाम रिपोर्ट्स में बताया गया था कि चीन ने भूटान में कई गांवों का निर्माण किया है और वहां वो अपनी ताकत बढ़ा रहा है। हालांकि भूटान के पीएम ने इससे इनकार कर दिया, उन्होंने कहा कि चीन ने भूटान की सीमा में कोई निर्माण नहीं किया है। इसके बाद तमाम एक्सपर्ट्स ने कहा कि भूटान के पीएम ने चीन के दबाव में आकर ऐसा बयान दिया। अब ये भी भारत के लिए चिंता का बड़ा विषय बन सकता है। (एएमएपी)