वरुणा से सिद्धारमैया के राजनीतिक जीवन की शुरुआत
सिद्धारमैया ने वरुणा से चुनाव लड़ने का फैसला इसलिए किया क्योंकि वहीं से उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। अब जब उन्होंने चुनावी राजनीति छोड़ने का फैसला किया है तो आखिरी बार अपने गृह निर्वाचन क्षेत्र से किस्मत आजमाना चाहते हैं। ध्यान रहे कि सिद्धारमैया आमतौर पर 2 सीटों से चुनाव लड़ते आए हैं। कोलार से लड़ने को लेकर तो उन्होंने कई महीने पहले से ही जमीन तैयार करनी शुरू कर दी थी। फरवरी में कर्नाटक कांग्रेस को उन्होंने एक आवेदन सौंपा था। इसमें पूर्व सीएम ने बदामी, वरुणा और कोलार के तौर पर तीन निर्वाचन क्षेत्रों का जिक्र किया, जहां से उन्होंने लड़ने की इच्छा जताई।
बदामी और कोलार को लेकर बना सस्पेंस
कांग्रेस कैंडिडेट्स की जो पहली लिस्ट जारी हुई है, उसमें बदामी और कोलार शामिल नहीं हैं। जैसा कि सिद्धारमैया पिछली बार की तरह 2 सीटों से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं, ऐसे में पार्टी के गेम प्लान को लेकर वह असमंजस की स्थिति में पड़ चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक, ऐसी संभावना है कि सिद्धारमैया को कोलार सीट से कांग्रेस आलाकमान टिकट न दे। दरअसल, स्थानीय रिपोर्ट्स के हवाले से बताया जा रहा है कि उनके वहां से जीतने की संभावना बहुत कम है।
सिद्धारमैया के खिलाफ नहीं लड़ेंगे येदियुरप्पा के बेटे
ऐसी भी अटकलें थीं कि कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्पा के बेटे विजयेंद्र उस सीट से चुनाव लड़ेंगे, जहां से सिद्धारमैया खड़े होंगे। हालांकि, येदियुरप्पा ने इससे साफ इनकार किया और कहा कि वह शिकारीपुरा से चुनाव लड़ेंगे। येदियुरप्पा ने कहा, ‘वरुणा से विजयेंद्र को मैदान में उतारने का दबाव पहले से ही है, लेकिन मैंने बहुत पहले कहा है कि वरुणा का दबाव है, लेकिन उन्हें शिकारीपुरा से चुनाव लड़ना चाहिए। इसलिए विजयेंद्र के वरुणा से चुनाव लड़ने का कोई सवाल ही नहीं उठता।’ मालूम हो कि कर्नाटक में 10 मई को विधानसभा चुनाव होने हैं।(एएमएपी)