वायु सेना ने एके-103 के साथ अमेरिकी सिग सॉयर असॉल्ट राइफल से भी लैस।

इन गरुड़ कमांडो ने कश्मीर घाटी में आतंकवाद विरोधी अभियानों और हवाई अड्डे की सुरक्षा में अपनी ताकत साबित की है। इसके बाद गरुड़ स्पेशल फोर्स को ‘स्पेशल ऑपरेशन’ के लिए एलएसी पर लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक तैनात किया गया है।अधिकारियों ने बताया कि कमांडो को ‘स्पेशल ऑपरेशन’ के लिए इजराइली टेवर राइफलें और उनके विभिन्न संस्करण भी दिए गए हैं।गरुड़ कमांडो को नेगेव एलएमजी के इस्तेमाल का काफी अनुभव है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर में हाजिन ऑपरेशन के दौरान इसी लाइट मशीन गन से पांच आतंकवादियों को मार गिराया था। इसी ऑपरेशन में शामिल कॉर्पोरल ज्योति प्रकाश निराला को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था।
कठिन ट्रेनिंग के बाद बनते हैं गरुड़ कमांडो
भारत के सबसे खूंखार कमांडो में गरुड़ कमांडो का नाम लिया जाता है। खतरनाक हथियारों से लैस भारतीय वायु सेना के ये कमांडो दुश्मन को खत्म करने के लिए जाने जाते हैं। गरुड़ कमांडोज की ट्रेनिंग नेवी के मार्कोस और आर्मी के पैरा कमांडोज की तर्ज पर ही होती है। गरुड़ कमांडो को लगभग ढाई साल की कड़ी ट्रेनिंग के बाद तैयार किया जाता है। ट्रेनिंग के दौरान इन्हें उफनती नदियों और आग से गुजरना, बिना सहारे पहाड़ पर चढ़ना पड़ता है। इनकी ट्रेनिंग ऐसी होती है कि ये बिना कुछ खाए कई हफ्ते तक संघर्ष कर सकते हैं। इन्हें एयरबोर्न ऑपरेशन, एयरफील्ड सीजर और काउंटर टेररिज्म के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। खतरनाक हथियारों से लैस वायु सेना के खूंखार गरुड़ कमांडो दुश्मन को खत्म करके ही सांस लेते हैं। (एएमएपी)



