ओशो।
अच्छे कपड़े पहनना सिर्फ शरीर ढकने की जरूरत नहीं है। यह अपने प्रति सम्मान का पहला संकेत है। जब तुम अच्छे कपड़े पहनते हो तो असल में तुम दुनिया से पहले खुद को संदेश देते हो कि मैं महत्वपूर्ण हूं। मनुष्य का मन बड़ा विचित्र है। जो हम बाहर पहनते हैं। वही धीरे-धीरे भीतर की भावना बन जाता है। अगर तुम रोज खुद को अस्त व्यस्त देखोगे तो मन भी वैसा ही ढीला पड़ जाएगा। लेकिन जैसे ही तुम सलीके से तैयार होते हो, भीतर एक अलग ऊर्जा उठती है… आत्मविश्वास की, सजगता की और जागरूकता की।
कपड़े केवल फैशन नहीं है। वे तुम्हारी मानसिक अवस्था का विस्तार है। जब तुम अच्छे कपड़े पहनते हो, तुम अपने व्यक्तित्व को व्यवस्थित करते हो और याद रखो व्यवस्थित व्यक्ति को दुनिया भी गंभीरता से लेती है। लोग तुम्हें पहले देखते हैं, फिर सुनते हैं। इसलिए तुम्हारी प्रस्तुति तुम्हारी पहली भाषा (संगीत) बन जाती है। अच्छे कपड़े पहनना अहंकार नहीं है। यह आत्मसम्मान है। अंतर समझो। अहंकार दूसरों को छोटा दिखाने के लिए सजता है। आत्मसम्मान खुद को बेहतर महसूस कराने के लिए। जब तुम अपने पहनावे पर ध्यान देते हो, तुम अपने मन को अनुशासन सिखाते हो। तुम कहते हो मैं लापरवाह नहीं हूं। यही अनुशासन जीवन के बाकी हिस्सों में भी फैलता है।
जो व्यक्ति छोटी चीजों में सजग होता है, वह बड़ी जिम्मेदारियों में भी भरोसेमंद बनता है। कपड़े तुम्हें बदलते नहीं। लेकिन तुम्हारी ऊर्जा को दिशा देते हैं। तुमने देखा होगा जब किसी खास अवसर पर तुम अच्छे कपड़े पहनते हो तो तुम्हारा चलना, बोलना, बैठना सब बदल जाता है। यह जादू नहीं है। यह मन की प्रतिक्रिया है। मन को संकेत मिलता है। आज मैं तैयार हूं। और जब मन तैयार होता है, अवसर खुद खिंच कर आते हैं। दुनिया दिखावे पर चलती है, यह कड़वा सच है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि दिखावा बनो। इसका मतलब है कि अपनी प्रस्तुति को सम्मान दो। तुम मंदिर जाते हो तो साफ कपड़े पहनते हो। क्यों? क्योंकि वह स्थान पवित्र है। उसी तरह तुम्हारा जीवन भी पवित्र है। हर दिन को सम्मान दो। अच्छे कपड़े पहनना खुद से कहना है मैं आज को हल्के में नहीं लूंगा। यह छोटी आदत तुम्हारे भीतर आत्म मूल्य पैदा करती है। धीरे-धीरे तुम खुद को अलग नजर से देखने लगते हो। और जब तुम्हारी नजर बदलती है, दुनिया की नजर भी बदल जाती है।

लोग उस व्यक्ति पर भरोसा करते हैं जो खुद को संभाल सकता है। पहनावा बताता है कि तुम खुद के प्रति कितने जागरूक हो। यह दिखाता है कि तुम अपनी उपस्थिति को महत्व देते हो और जो अपनी उपस्थिति को महत्व देता है, वही अपने जीवन को भी महत्व देता है। अच्छे कपड़े पहनना किसी को प्रभावित करने से ज्यादा खुद को प्रेरित करने का तरीका है। यह रोज खुद से मिलने का एक संस्कार है। मैं महत्वपूर्ण हूं। मेरा दिन महत्वपूर्ण है। जब यह भावना गहरी होती है, आत्मविश्वास स्वाभाविक हो जाता है। तुम्हें अलग से साहस जुटाने की जरूरत नहीं पड़ती। तुम्हारा व्यक्तित्व ही बोलने लगता है।
याद रखो दुनिया तुम्हें उसी नजर से देखती है। जिस नजर से तुम खुद को देखते हो, अच्छे कपड़े उस नजर को चमका देते हैं। वे तुम्हें याद दिलाते हैं कि तुम सामान्य नहीं हो। तुम सजग हो। और सजग व्यक्ति ही जीवन में आगे बढ़ता है। इसलिए अच्छे कपड़े पहनना कोई विलासिता नहीं बल्कि आत्मसम्मान की दैनिक साधना है। यह खुद को महत्व देने की कला है। और जो खुद को महत्व देता है दुनिया उसे अनदेखा नहीं कर सकती। जब तुम अच्छे कपड़े पहनते हो तो केवल शरीर नहीं सजता। तुम्हारी सोच भी संवरने लगती है।
मन और बाहरी रूप के बीच एक गहरा संबंध है। जितना तुम खुद को व्यवस्थित करते हो उतना ही भीतर स्पष्टता आती है। अस्त व्यस्त पहनावा अक्सर मन की उलझन को बढ़ाता है। जबकि सलीका मन को स्थिर करता है। यह कोई सतही बात नहीं है। यह आत्म जागरूकता की शुरुआत है। तुम अपने दिन की शुरुआत कैसे करते हो? वही तय करता है कि दिन तुम्हें कैसे जवाब देगा। जब तुम तैयार होकर निकलते हो, तुम अपने भीतर एक संदेश स्थापित करते हो। मैं आज सजग रहूंगा। यह सजगता तुम्हारे निर्णयों में झलकती है। तुम्हारी बातचीत में महसूस होती है और तुम्हारी उपस्थिति में दिखाई देती है।
लोग उस व्यक्ति की ओर स्वाभाविक रूप से आकर्षित होते हैं जो खुद के साथ संतुलित दिखता है। अच्छे कपड़े तुम्हें यह संतुलन याद दिलाते हैं। वे तुम्हें अपने शरीर के प्रति कृतज्ञ बनाते हैं। यह वही शरीर है जो तुम्हें जीवन का अनुभव करने देता है। जब तुम इसे सम्मान देते हो। तुम जीवन को सम्मान देते हो। धीरे-धीरे यह आदत तुम्हारी पहचान बन जाती है। तुम सिर्फ अच्छे दिखने के लिए नहीं सजते। तुम खुद के साथ सामंजस्य बनाने के लिए सजते हो। यही सामंजस्य आत्मविश्वास की जड़ है। आत्मविश्वास चिल्लाता नहीं वह शांत चमकता है। और यह चमक तब आती है जब तुम भीतर और बाहर दोनों में सजग होते हो।
अच्छे कपड़े पहनना तुम्हें वर्तमान में लाता है। तुम जल्दबाजी से निकलने के बजाय खुद को तैयार करने का समय देते हो। यह समय खुद से मिलने का समय है। इस छोटे से अनुष्ठान में तुम अपने दिन को दिशा देते हो। तुम कहते हो मैं तैयार हूं। मैं उपस्थित हूं। यही उपस्थिति तुम्हें भीड़ से अलग करती है। लोग अक्सर सोचते हैं कि व्यक्तित्व केवल शब्दों से बनता है। लेकिन सच्चाई यह है कि व्यक्तित्व तुम्हारी ऊर्जा से बनता है। और पहनावा उस ऊर्जा का पहला संकेत है।
जब तुम सजते हो तुम अपनी ऊर्जा को व्यवस्थित करते हो। तुम्हारा चलना स्थिर हो जाता है। तुम्हारी नजर स्पष्ट हो जाती है। यह सब बिना कोशिश के होता है क्योंकि मन बाहरी संकेतों से प्रभावित होता है। अच्छे कपड़े तुम्हें याद दिलाते हैं कि तुम अपने जीवन के प्रति जिम्मेदार हो। जिम्मेदारी बोझ नहीं जागरूकता है। और जागरूक व्यक्ति ही जीवन को पूरी तरह जी पाता है। यह सजना किसी और के लिए नहीं। यह तुम्हारी आत्म यात्रा का हिस्सा है।
जब तुम खुद को महत्व देते हो, तुम अपने सपनों को भी महत्व देने लगते हो। तुम लापरवाही छोड़ते हो। क्योंकि तुम जानते हो कि तुम्हारा हर दिन मूल्यवान है। अच्छे कपड़े पहनना इस मूल्य को रोज जीने का तरीका है। यह तुम्हें अनुशासन, आत्मसम्मान और आत्मविश्वास की याद दिलाता है। और जब यह तीनों मिलते हैं, व्यक्तित्व स्वाभाविक रूप से प्रभावशाली हो जाता है। तब तुम्हें अलग से साबित करने की जरूरत नहीं पड़ती। तुम्हारी उपस्थिति ही पर्याप्त होती है। यही अच्छे पहनावे का असली लाभ है। यह तुम्हें तुम्हारे बेहतर रूप के करीब ले जाता है।



