चार राज्यों के चुनावी नतीजों के बाद और तीखे होंगे हमले
प्रदीप सिंह।
एक शेर है- हुए तुम दोस्त जिसके, दुश्मन उसका आसमां क्यों हो। ऐसे लोग आपको हर राजनीतिक दल में मिल जाते हैं। लेकिन अगर कोई भक्त अपने भगवान के खिलाफ हो जाए,यह बात मैं राजनीतिक संदर्भ में कह रहा हूं, तो आप समझिए कि समस्या कितनी बड़ी है।
कांग्रेस के एक बहुत वरिष्ठ नेता हैं मणिशंकर अय्यर। वे केंद्रीय मंत्री भी रहे, राजीव गांधी के बहुत करीबी थे और नेहरू-गांधी परिवार के भक्त माने जाते हैं। उन्होंने कहा है कि वह गांधियन हैं, नेहरूवियन हैं, राजीवियन हैं लेकिन वह राहुलियन नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इंडिया अलायंस का नेता एमके स्टालिन को होना चाहिए क्योंकि वह मुद्दे उठाते हैं। स्टालिन ने कभी ये नारा नहीं लगाया कि ‘चौकीदार चोर है’ या ‘वोट चोर गद्दी छोड़।’ ये दोनों नारे किसने लगाए? राहुल गांधी ने। तो राहुल गांधी पर एक कांग्रेसी का यह सीधा हमला है। मणिशंकर अय्यर ने हाल ही में केरल में आयोजित एक कार्यक्रम में इस तरह की कई बातें कहीं। उस कार्यक्रम में केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन भी मौजूद थे। विजयन की ओर देखते हुए अय्यर ने कहा कि आपने बड़ा अच्छा काम किया है। आप फिर मुख्यमंत्री बनेंगे। अब आप देखिए,केरल में विधानसभा का चुनाव होने जा रहा है। कांग्रेस पार्टी को पूरी उम्मीद है कि वह सत्ता में लौट रही है। वहां कांग्रेस का नेता अपने विरोधी, जिसके खिलाफ कांग्रेस चुनाव लड़ रही है, को कह रहा है कि आप फिर मुख्यमंत्री बनेंगे। मणिशंकर अय्यर यहीं पर नहीं रुके,आगे उन्होंने कहा कि अगर पवन खेड़ा जैसे लोग कांग्रेस के प्रवक्ता रहेंगे तो कांग्रेस की स्थिति कभी नहीं सुधरेगी। केसी वेणुगोपाल के बारे में उन्होंने कहा कि उनसे बड़ा स्टूपिड कोई नहीं है। इससे खराब ऑर्गेनाइजेशनल सेक्रेटरी कोई हुआ ही नहीं। याद रखिए केसी वेणुगोपाल राहुल गांधी के सबसे खास लोगों में हैं,केरल के ही रहने वाले हैं और अपने को मुख्यमंत्री पद का दावेदार मानते हैं। अय्यर ने कहा, राहुल गांधी को सोचना चाहिए कि आखिर उनके करीबी लोग पार्टी छोड़कर क्यों चले गए? जिसे नेतृत्व में विश्वास नहीं होगा,वह कांग्रेस में क्यों रहेगा? यानी वह स्पष्ट तौर पर कह रहे हैं कि जो लोग छोड़कर गए उनको राहुल गांधी के नेतृत्व पर विश्वास नहीं है।

चूंकि मणिशंकर अय्यर अभी कांग्रेस में ही हैं और कांग्रेस में बने रहने के लिए भी उन्हें कुछ बोलना पड़ेगा, तो बड़ी चतुराई से उन्होंने एक बात बोली। उन्होंने कहा कि स्टालिन को इंडी अलायंस का नेता होना चाहिए, लेकिन वह प्रधानमंत्री नहीं बन सकते। क्यों नहीं बन सकते? उन्होंने कहा कि नेहरू जी की मौत के बाद बहुत से लोगों ने प्रस्ताव दिया कि के. कामराज को प्रधानमंत्री बनना चाहिए। कामराज ने कहा कि न मुझे हिंदी आती है, न ही अंग्रेजी आती है, मैं कैसे प्रधानमंत्री बन सकता हूं। एमके स्टालिन की भी वही हालत है। इसलिए राहुल गांधी प्रधानमंत्री बन सकते हैं। अब आप देखिए,मणिशंकर अय्यर कांग्रेस पार्टी में बने रहने के लिए राहुल गांधी की एक तरह से तरफदारी भी कर रहे हैं, लेकिन उन पर और उनके करीबियों पर तीखा हमला भी बोल रहे हैं।

इस समय चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव होने जा रहा है। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस पूरी तरह से अप्रासंगिक हो चुकी है। तमिलनाडु में वह एम के स्टालिन की पिछलग्गू है। जो सीट दे देंगे, उस पर लड़ लेंगे। अब दो राज्य बचते हैं असम और केरल, जहां कांग्रेस के लिए संभावना है। केरल में पिनराई विजयन के खिलाफ दो टर्म की एंटी इनकंबेंसी है। इसलिए कांग्रेस को लगता है कि वह सत्ता में आ सकती है। असम में लड़ाई ही दो पार्टियों के बीच में है, बीजेपी और कांग्रेस। अब असम में कांग्रेस का हाल देखिए। उनकी कैंपेन कमेटी के चेयरमैन हैं भूपेन बोरा। उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि मुझे कैंपेन कमेटी का चेयरमैन तो बना दिया गया लेकिन उसके बाद दिल्ली से किसी को मेरे साथ भेज दिया गया। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा भूपेन बोरा को कांग्रेस में आखिरी हिंदू नेता मानते हैं। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि अगर वह भाजपा में आना चाहें तो हम उनको एक सेफ सीट देने के लिए तैयार हैं। इससे कांग्रेस में खलबली मच गई। राहुल गांधी को फोन किया गया तो अपने स्वभाव के विपरीत पहली बार राहुल गांधी ने बोरा से बात की। उसके बाद बोरा ने अपना इस्तीफा तो वापस ले लिया लेकिन मामला अभी शांत नहीं हुआ है। वह चेयरमैन के रूप में काम करेंगे या नहीं, यह पता नहीं।

बोरा कांग्रेस के बड़े नेता माने जाते हैं लेकिन चुनाव के समय अपने नेतृत्व से उनका कोई संवाद नहीं है। इससे आप असम में कांग्रेस की हालत समझिए। वहां कांग्रेस हार रही है। इस स्थिति में कांग्रेस अगर केरल भी हार गई तो राहुल गांधी के लिए जवाब देना बहुत मुश्किल होगा। फिर राहुल गांधी के नेतृत्व पर कांग्रेस के अंदर से सवाल उठना शुरू हो जाएगा। जरा आप सोचिए कि कांग्रेस पार्टी का एक वरिष्ठ नेता केरल जाता है। अपने विरोधी से कहता है कि आप फिर से सत्ता में आएंगे और कांग्रेस का ही एक प्रवक्ता इस पर सवाल उठाता है तो उससे कहता है कि दिल्ली में तो तुम पिनराई विजयन यानी उनकी पार्टी के साथ हो। लेकिन केरल में तुम उनके खिलाफ हो। यह कैसे चल सकता है? यानी वह कांग्रेस के दोगलेपन को उजागर करता है। तो अगर कांग्रेस,राहुल गांधी, सोनिया गांधी को लगता है कि इस देश की जनता बड़ी बेवकूफ है। वह कुछ समझती नहीं तो वे गलतफहमी का शिकार हैं और जो इस तरह की गलतफहमी पाले उसके लिए क्या कहा जाए? उसके लिए तो सही शब्द मणिशंकर अय्यर ही बोल सकते हैं।
असम और केरल के विधानसभा चुनाव के नतीजों के आने का इंतजार कीजिए। उसके बाद देखिएगा कांग्रेस के अंदर से कितनी और कैसी-कैसी आवाजें उठती हैं। जिनको सुनना भी राहुल गांधी के लिए बहुत कठिन हो जाएगा।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)



