आपका अख़बार ब्यूरो
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच वैश्विक राजनीति में नया मोड़ देखने को मिल रहा है। हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि युद्ध अमेरिका की शुरुआती रणनीति के अनुसार आगे नहीं बढ़ रहा। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नई कूटनीतिक चाल चलते हुए चीन को अपने पक्ष में लाने की कोशिश की है, ताकि ईरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ जाए।

इस पूरे संघर्ष के केंद्र में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज है, जो दुनिया का सबसे अहम तेल समुद्री मार्ग माना जाता है। ईरान पहले ही अमेरिका को चेतावनी दे चुका है कि यदि हालात बिगड़े तो इस रास्ते पर तेल की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। जैसे-जैसे तनाव बढ़ रहा है, अमेरिका की चिंता भी बढ़ती जा रही है।

रिपोर्टों के अनुसार इस इलाके में तनाव के कारण समुद्री गतिविधियां लगभग ठप हो गई हैं और कई देशों के जहाज यहां फंसे हुए हैं। इनमें भारत से जुड़े जहाज भी शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि इस स्थिति पर आधिकारिक तौर पर अधिकतर देश सार्वजनिक बयान देने से बच रहे हैं, जबकि ईरान का दावा है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज उसके नियंत्रण में है।

इसी पृष्ठभूमि में डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ईरान को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने लिखा कि यदि ईरान की ओर से हॉर्मुज में तेल की आवाजाही रोकने की कोशिश की जाती है, तो अमेरिका अब तक हुए हमलों से भी 20 गुना अधिक ताकत से जवाब देगा। ट्रंप के अनुसार अमेरिका ईरान के उन ठिकानों को भी निशाना बनाएगा जिन्हें नष्ट करना आसान है, और ऐसी स्थिति पैदा कर देगा कि ईरान के लिए एक देश के रूप में दोबारा खड़ा होना मुश्किल हो जाएगा।

अपने संदेश में ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका की यह कार्रवाई चीन और उन सभी देशों के लिए “एक तरह का उपहार” होगी, जो हॉर्मुज मार्ग का बड़े पैमाने पर उपयोग करते हैं। उनका इशारा साफ था कि अगर चीन इस रणनीति का समर्थन करता है, तो उसे ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से फायदा हो सकता है।

With Trump visit coming up, China hedges its bets on helping Iran | CBC News

दरअसल, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। इस समुद्री मार्ग से प्रतिदिन दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और बड़ी मात्रा में एलएनजी सप्लाई गुजरती है। खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख तेल उत्पादक देश- सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर और ईरान इसी रास्ते से अपने तेल का निर्यात करते हैं।

इस मार्ग से चीन को सबसे अधिक लाभ मिलता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार हॉर्मुज से गुजरने वाले तेल का लगभग 37.7 प्रतिशत हिस्सा चीन को जाता है और चीन रोजाना करीब 5.4 मिलियन बैरल तेल इसी रास्ते से आयात करता है।

सिर्फ चीन ही नहीं, बल्कि भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और अन्य एशियाई देशों की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा भी इसी समुद्री मार्ग से पूरा होता है। अनुमान है कि एशिया जाने वाले कुल तेल का 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा हॉर्मुज के रास्ते ही गुजरता है, जिसमें करीब 40 प्रतिशत हिस्सा चीन के लिए होता है।

यही वजह है कि अमेरिका इस मुद्दे पर चीन को अपने पक्ष में लाने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है। यदि चीन इस रणनीति का समर्थन करता है, तो ईरान के लिए कूटनीतिक और आर्थिक दबाव कई गुना बढ़ सकता है। हालांकि फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या चीन ट्रंप के इस ‘ऑफर’ को स्वीकार करेगा या ईरान के साथ अपने संबंधों को प्राथमिकता देगा।