महंगे दामों वाली सब्जियां किसानों की बढ़ा रही क्रय शक्ति।
गुच्छी जंगली मशरूम है। इसकी किस्म हिमालय की तलहटी में तैयार की गई। चमत्कारी औषधीय गुणों के कारण देश के हर हिस्से में इसकी मांग बढ़ चुकी है। पहले यह मशरूम प्राकृतिक रूप से उगता था, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इसे नई तकनीक ईजाद कर किसानों को इसके लिए प्रशिक्षित कर दिया है। इसकी कीमत लाखों में है और किसान नई तकनीक के दम पर इसकी खेती कर अच्छा-खासा मुनाफा कमाने लगे हैं।
जुकीनी कद्दू वर्गीय सब्जी है। इसका आकार खीरा या तोरई की तरह है। इसका उपयोग वजन घटाने में कारगर साबित हुआ है। बड़े नगरों- महानगरों में जिम जाने व फिटनेस की चिंता रखने वालों की यह पहली पसंद बन चुकी है। बाजार में 150 से 200 रुपए प्रति किलो के भाव से ये बिक रहा है और इसकी डिमांड दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।बोकचाय फाइव स्टार होटल की डिमांड बन चुकी है। यह पत्तेदार सब्जी है और इसे उगाना बहुत आसान है। इसके एक तने की कीमत 115 रुपए के लगभग किसानों को मिल रही है। इसकी खेती भी किसानों के लिए वरदान साबित होने लगी।
शतावरी जो एक औषधीय गुणों से भरपूर पौधा है, इसे दूसरे देशों से आयात किया जाता रहा है। यह यहां 1200 से 1500 प्रति किलो की कीमत पर बिकने लगा है। इसकी उपज फिलहाल गंगा के मैदानी और बिहार के पठारी इलाकों में अधिक है लेकिन अब इसकी उपज उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में भी ली जाने लगी है।
दुनिया की सबसे महंगी सब्जी
औरंगाबाद के किसान ने ऐसी सब्जी की खेती शुरू की है, अंतरराष्ट्रीय बाजार में जिसकी कीमत 82 हजार रुपए प्रतिकिलो है। इस सब्जी का नाम है- हॉप शूट्स। ये सेहत के लिए काफी लाभदायक बताया गया है। जर्मनी में इस सब्जी की खेती की शुरुआत हुई थी और अब बिहार के अधिकतर किसान इसकी खेती करने लगे हैं।(एएमएपी)



