संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद आतंकवाद को लेकर इन दिनों गंभीर नजर आ रही है। दरअसल यह अनायास ही नहीं हो गया है। इसके लिए मोदी सरकार विशेषकर विदेश विभाग एवं विदेश मंत्री के लगातार के किए गए वह प्रयास हैं जिन्‍होंने पूरी दुनिया के सामने तथ्‍यों के साथ स्‍पष्‍ट कर दिया है कि पाकिस्‍तान एक ऐसा देश है जोकि आतंकवाद को प्रश्रय देता है। आतंकवाद पूरी दुनिया की शांति के लिए खतरनाक है और इसे हर हाल में समाप्‍त होना ही चा‍हि‍ए । फिलहाल भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के इस कदम का जिसमें कि उसने पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा के नंबर दो सरगना अब्दुल रहमान मक्की पर प्रतिबंध लगाया है उसका स्वागत किया है।

मक्की ने लश्कर के लिए पैसा जुटाने के साथ साथ बड़ी जिम्मेदारियों को भी संभाला

अब्दुल रहमान मक्की कोई छोटा आतंकी नहीं है इसे भारत में सात बड़े आतंकवादी हमलों का षडयंत्रकारी माना गया है।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची का कहना है कि  हम अब्दुल रहमान मक्की पर प्रतिबंध लगाये जाने के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के निर्णय का स्वागत करते हैं। रहमान मक्की लश्कर- ए- तैय्यबा के सरगना हाफिज सईद का निकट रिश्तेदार है। मक्की ने लश्कर के लिए पैसा जुटाने के साथ साथ बड़ी जिम्मेदारियों को संभाला है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का यह आतंक के ढांचे को ध्वस्त करने की दिशा में प्रभावशाली कदम

उनका कहना है कि क्षेत्र में आतंकवादी संगठनों की ओर से खतरे तथा धमकी बढ रही हैं और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा इस तरह के प्रतिबंध लगाया जाना इन खतरों पर अंकुश लगाने तथा आतंकवाद के ढांचे को ध्वस्त करने की दिशा में प्रभावशाली कदम है। भारत आतंकवाद के प्रति जीरो टालरेंस के रूख को लेकर वचनबद्ध है और वह अंतर्राष्ट्रीय समुदाय पर आतंकवाद के खिलाफ विश्वसनीय , प्रमाणित तथा स्थायी कार्रवाई के लिए दबाव बनाता रहेगा।

लाल किले से लेकर मुंबई हमलों तक खून से सने हैं आतंकवादी मक्‍की के हाथ

किसी को यह नहीं भूलना चाहिए कि वर्ष 2000 में लालकिले पर हमले, जनवरी 2008 के रामपुर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के कैंप पर हमले, नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमले, फरवरी 2018 के श्रीनगर में करणनगर में फिदायीन हमले, उसी वर्ष मई में बारामूला के खानपुरा में हमले के पीछे इसी आतंकी मक्‍की हाथ था।  इतना ही नहीं जून में श्रीनगर में अखबार राईजिंग कश्मीर के प्रधान संपादक शुजात बुखारी की हत्या तथा अगस्त में बांदीपुरा के गुरेज में नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की कोशिश के दौरान के सेना के साथ मुठभेड़ में एक मेजर सहित पांच सैनिकों की मौत के मामले में मक्की को जिम्मेदार माना जाता है।

पाकिस्‍तान की जेलों में आतंकी करते हैं मजे

सुरक्षा परिषद के अल कायदा एवं आईएसआईएल दाइश से जुड़े व्यक्तियों, समूहों, कंपनियों एवं संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाने वाले प्रस्ताव 1267 (1999), 1989 (2011), 2253 (2015) और 2368 (2017) के पैरा 2 एवं 4 के तहत मक्की पर प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि मक्की को पाकिस्तान सरकार ने मई 2019 में लाहौर में उसके घर में नज़रबंद कर दिया था। वर्ष 2020 में पाकिस्तान की एक अदालत ने उसे आतंकवाद के वित्तपोषण का दोषी मानते हुए कारावास की सजा सुनाई थी। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स अब तक यही बताती रही हैं कि पाकिस्‍तान में आतंकवादियों और जिहादियों को सिर्फ नाम के लिए जेलों मे बंद रखा जाता है। यहां तो उन्‍हें वह सुविधाएं भी आसानी से नसीब रहती हैं, जिनके लिए उन्‍हें बाहर बहुत प्रयास करने की जरूरत होती है। पाकिस्‍तान का यह रूप भी कई बार सामने आ चुका है कि कैसे उसने विदेशी फडिंग पाने के लिए दिखावे का आतंकवाद विरोधी होने का नाटक किया है। (एएमएपी)