हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल का सफल परीक्षण।
इस परीक्षण ने भारत को अमेरिका, रूस, चीन के चुनिंदा क्लब में शामिल कर दिया है जिन्होंने पहले ही इस तकनीक का प्रदर्शन किया है। इस परीक्षण का मतलब है कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) अगले पांच वर्षों में स्क्रैमजेट इंजन के साथ एक हाइपरसोनिक मिसाइल विकसित करने की क्षमता हासिल करेगा, जिसमें दो किलोमीटर प्रति सेकंड से अधिक की यात्रा करने की क्षमता होगी। यह स्वदेशी तकनीक ध्वनि की गति से छह गुना गति से यात्रा करने वाली मिसाइलों के विकास की ओर मार्ग प्रशस्त करेगी। एचएसटीडीवी का परीक्षण करने में ओडिशा तट पर कलाम द्वीप से आज सुबह 11.03 बजे अग्नि मिसाइल बूस्टर का इस्तेमाल किया गया।

एक रक्षा सूत्र ने कहा कि इस तकनीक से क्रूज मिसाइलें अब हाइपरसोनिक गति से यात्रा कर सकती हैं। स्क्रैमजेट इंजन एक बड़ी सफलता है। इस तकनीक में हवा सुपरसोनिक गति से इंजन के अंदर जाती है और हाइपरसोनिक गति से बाहर आती है। इसमें वाहन एक निश्चित ऊंचाई तक पहुंचता है और फिर परिभ्रमण करने के बाद पुन: प्रवेश के दौरान उच्च तापमान 1,000-2,000 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता है। सूत्र ने बताया कि एंटी-सैटेलाइट टेस्ट के बाद यह हाल की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
स्क्रैमजेट के ईंधन इंजेक्शन और ऑटो इग्निशन जैसी महत्वपूर्ण घटनाओं ने तकनीकी परिपक्वता का प्रदर्शन किया। स्क्रैमजेट इंजन ने उच्च गतिशील दबाव और बहुत उच्च तापमान पर काम किया। इस मिशन के साथ डीआरडीओ ने अत्यधिक जटिल तकनीक के लिए क्षमताओं का प्रदर्शन किया है जो उद्योग के साथ साझेदारी में अगली पीढ़ी के हाइपरसोनिक वाहनों के लिए बिल्डिंग ब्लॉक के रूप में काम करेगा। परीक्षण के दौरान स्क्रैमजेट इंजन सहित लॉन्च और क्रूज वाहनों के मापदंडों की निगरानी कई ट्रैकिंग राडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम और टेलीमेट्री स्टेशनों से की गई। हाइपरसोनिक वाहन के क्रूज चरण के दौरान प्रदर्शन की निगरानी के लिए बंगाल की खाड़ी में एक जहाज भी तैनात किया गया था। (एएमएपी)



