इसरो (Indian Space Research Organization) ने कहना होगा कि कामयाबी की नई उड़ान भरी है । इसरो का नया रॉकेट लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी)  तीन सैटेलाइट लेकर सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ।
एसएसएलवी को सफलतापूर्वक लॉन्च कर इसरो ने दुनिया के सामने नया लॉन्च व्हीकल पेश किया है। दरअसल, लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएसएलवी की यह दूसरी उड़ान है। इसे हल्के वजन वाले सैटेलाइट को लो अर्थ ऑर्बिट (कम ऊंचाई वाली कक्षा) में स्थापित करने के लिए बनाया गया है। इससे PSLV (Polar Satellite Launch Vehicle) का लोड कम होगा। एसएसएलवी की मदद से कम खर्च में हल्के उपग्रहों को अंतरिक्ष में पहुंचाना संभव हुआ है। इससे इसरो को स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च मार्केट में बढ़त मिलेगी।

एसएसएलवी की ये है ताकत

एसएसएलवी छोटे, सूक्ष्म या नैनोउपग्रहों (10 से 500 किलोग्राम भार तक के) को 500 किलोमीटर की कक्षा में प्रक्षेपित करने में सक्षम है। यह कम लागत में अंतरिक्ष के लिए पहुंच, कम प्रतिवर्तन काल, कई उपग्रहों को समायोजित करने की सुविधा प्रदान करने के साथ न्यूनतम प्रक्षेपण अवसंरचना की मांग करता है।इसरो एसएसएलवी के माध्‍यम से अपनी दूसरी विकासात्मक उड़ान के तहत एसएसएलवी-डी2 यान ने ईओएस-07, जानुस-1 और आजादीसैट-2 उपग्रहों को 37 डिग्री के झुकाव के साथ उनकी लक्षित 450 किलोमीटर की गोलाकार कक्षा में स्थापित किया। इसने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पहले प्रक्षेपण स्थल से भारतीय समयानुसार 09:18 बजे उड़ान भरी और अपनी 15 मिनट की उड़ान के बाद इसने तीनों उपग्रहों को उनकी कक्षा में स्थापित कर दिया।

साथ में तीन उपग्रहों को भी किया गया प्रक्षेपित

एसएसएलवी-डी2 ने जिन तीन उपग्रहों को प्रक्षेपित किया, उनमें ईओएस-07 इसरो द्वारा तैयार किया गया 153.6 किलोग्राम का पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है। वहीं, जानुस-1, अमेरिकी कंपनी अंतारिस का 10.2 किलोग्राम वजन का एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शन उपग्रह है। आजादीसैट-2, एक 8.8 किलोग्राम वजन का उपग्रह है, जिसे स्पेस किड्ज इंडिया ने पूरे भारत में 750 छात्राओं द्वारा विकसित विभिन्न वैज्ञानिक पेलोड को एकीकृत करके तैयार किया है।

एसएसएलवी ‘मांग पर प्रक्षेपण’ आधार पर पृथ्वी की निचली कक्षाओं में 500 किलोग्राम तक के छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए इसरो द्वारा विकसित नया लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान है। इसे क्रमशः तीन ठोस चरणों 87 टन, 7.7 टन और 4.5 टन के साथ संरूपित किया गया है। एसएसएलवी एक 34 मीटर लंबा, 2 मीटर व्यास वाला यान है, जिसका उत्थापन द्रव्यमान 120 टन है। लक्षित कक्षा में उपग्रह का प्रवेश एक तरल प्रणोदन-आधारित वेग ट्रिमिंग मॉड्यूल (वीटीएम) के जरिए कराया जाता है।

SSLV का पहला लॉन्च हो गया था फेल

इसरो ने SSLV को 7 अगस्त 2022 में पहली बार लॉन्च किया था। तब रॉकेट उपग्रह को कक्षा में तैनात करने में असफल हो गया था। यह भी कहा गया कि  एसएसएलवी-डी1 अपनी पहली विकासात्मक उड़ान में उपग्रहों को स्थापित करने से थोड़ा सा चूक गया था। एसएसएलवी-डी2 ने एसएसएलवी-डी1 उड़ान की कमियों का विश्लेषण करने वाली विशेषज्ञ समिति द्वारा की गई सिफारिशों को लागू किया।  जिसके बाद अब SSLV का दूसरा प्रक्षेपण सफल रहा।

इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने बोले –

लॉन्च के बाद इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने कहा कि हमारे पास एक नया लॉन्च वाहन है। एसएसएलवी ने अपने दूसरे प्रयास में तीनों उपग्रहों को बहुत सटीक रूप से कक्षा में स्थापित किया है। एसएसएलवी की पहली उड़ान में गति में कमी के कारण हम चूक गए थे। इसके बाद समस्या का विश्लेषण किया गया और सुधार किया गया। रॉकेट के सिस्टम को बहुत तेज गति के योग्य बनाया गया है। इसके साथ आज कहा जाएगा कि सफल प्रक्षेपण के साथ भारत को एक नया प्रक्षेपण यान मिला है, जिसका उद्देश्य उद्योग के माध्यम से मांग के आधार पर प्रक्षेपित छोटे उपग्रहों का व्यावसायीकरण करना था। इसरो अंतरिक्ष में लघु उपग्रहों को प्रक्षेपित करने की बढ़ती वैश्विक जरूरत को पूरा करने के लिए तैयार है।(एएमएपी)