#pradepsinghप्रदीप सिंह।
आपको मालूम है कि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। वह एक्सटेंशन पर हैं। 2024 के चुनाव के बाद ही उनकी जगह नया अध्यक्ष बनना था। लेकिन टाल दिया गया, हालांकि नड्डा मंत्री भी बन गए हैं, राज्यसभा में सदन के नेता भी बन गए हैं। अब नए अध्यक्ष को लेकर चर्चा लंबे समय से चल रही है।नए भाजपा अध्यक्ष को लेकर दो तरह की खबरें हैं। एक- कि इस मुद्दे पर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और संघ में मतैक्य नहीं है। संघ चाहता है कि उसकी मर्जी से अध्यक्ष चुना जाए। हालांकि उन्होंने नाम दिया हो ऐसी कोई जानकारी नहीं लेकिन भाजपा का शीर्ष नेतृत्व चाहता है कि ऐसा कोई व्यक्ति अध्यक्ष न बने जो एक पैरेलल पावर सेंटर यानी समानांतर शक्ति केंद्र बनने की कोशिश करे। तो मामला ये है कि कहां पर जाकर ये दोनों तट मिलते हैं। हालांकि नदी के दो किनारे कभी मिलते नहीं हैं। लेकिन राजनीति में कुछ भी संभव है क्योंकि यह संभावनाओं का खेल है। राजनीति में ऐसा हो सकता है। 30 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नागपुर गए थे। संघ के मुख्यालय भी गए। वहां संघ के प्रमुख मोहन भागवत जी से उनकी मुलाकात भी हुई। कहा जा रहा था कि उसमें इसकी चर्चा होगी। मुझे मालूम नहीं कि इसकी चर्चा हुई कि नहीं, हालांकि इसकी संभावना कम है। इस मामले में जो भी बात होनी है उसके पहले से जो नीचे के लोग हैं वे बात कर चुके होंगे, उसकी पृष्ठभूमि तैयार हो चुकी होगी।

जो खबरें आ रही हैं 30 मार्च के बाद से, वह यह, कि किसी एक नाम पर समझौता हो गया है। एक ऐसा नाम जिस पर दोनों पक्षों का विरोध नहीं है। समर्थन हो या नहीं हो। तो नाम लगभग तय हो चुका है और उसकी घोषणा 4 अप्रैल को खत्म हो रहे संसद सत्र के बाद किसी भी दिन हो सकती है। बीजेपी की नेशनल काउंसिल यानी राष्ट्रीय परिषद की बैठक 18 से 20 अप्रैल तक बंगलूरू में होनेवाली है। जो भी अध्यक्ष मनोनीत होगा उसमें उसके नाम का रेटिफिकेशन होगा। इसलिए नए भाजपा अध्यक्ष के नाम की घोषणा उससे पहले होनी है। उम्मीद है कि हफ्तेभर में उसके नाम की घोषणा हो जाएगी।

जिसके नाम की घोषणा होगी, जो मुझे जानकारी है, अभी नाम आपके सामने नहीं रख रहा हूं। हाँ, अभी तक चर्चा में जितने नाम थे, उनमें से कोई अध्यक्ष नहीं बन रहा है। ये जो चर्चाएं थी कि ये बन रहे हैं- इसलिए कि ये उनके करीब हैं… ये बन रहे हैं- इसलिए कि उनको मंजूर हैं… या दक्षिण का होगा कि उत्तर का होगा… महिला होगी या पुरुष होगा… पिछड़ा होगा कि अगड़ा होगा… ये सब कोई कंसीडरेशन नहीं है। इसको लेकर भी कोई कंसीडरेशन नहीं है कि इसी वर्ग से बनाया जाना है।

उस हिसाब से अध्यक्ष का चयन नहीं हो रहा है। कौन संगठन का अनुभव रखता है, कौन संगठन को चला सकता है और कौन पैरेलल पावर सेंटर बनने की कोशिश नहीं कर सकता… और सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण बात, ऐसा व्यक्ति जो सरकार और संघ दोनों के बीच में संतुलन कायम रख सके। ऐसा एक ही व्यक्ति है। आप भी जानते हैं। आपके ध्यान में आ जाए तो अच्छी बात है। नहीं आएगा तो घोषणा के बाद पता चल ही जाएगा। लेकिन इतना जानकर चलिए कि पिछले छह महीने से जिन नामों की चर्चा हो रही है, जिन मुद्दों के आधार पर चयन की चर्चा हो रही है, उनमें से कोई नहीं होने जा रहा है। यह नाम ऐसा है कि जब उसकी घोषणा होगी तब आपको लगेगा कि- अरे, हमने इसके बारे में सोचा कैसे नहीं। क्योंकि, उनके बारे में आप बहुत अच्छी तरह से जानते हैं। संगठन में उनके काम को जानते हैं। वह सरकार में भी रहे हैं। अब यह नहीं बताऊंगा कि अभी सरकार में है या नहीं… नहीं तो मामला खुल जाएगा।

तो बात इतनी नजदीक की है- फैसले की घड़ी इतनी नजदीक है कि इस समय किसी का नाम लेना शायद ठीक नहीं हो क्योंकि गलत भी हो सकता है। मैं अपने बचाव में कह रहा हूं कि किसी का नाम लूं और वो गलत साबित हो जाए। लेकिन जहां तक मुझे जानकारी है, मुझे जितने संकेत मिले हैं, उसके अनुसार उस व्यक्ति का यानी भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का नाम तय हो चुका है। उसकी संघ में भी अच्छी पकड़ और पैठ है और सरकार में भी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी अच्छे संबंध हैं और संघ प्रमुख व संघ के दूसरे बड़े पदाधिकारियों से भी अच्छे संबंध हैं। एक तरह से आप कह सकते हैं कि वह निरापद व्यक्ति हैं जो किसी का फायदा कर सकें या नहीं, पर किसी का नुकसान नहीं करते हैं। अभी तक की उनकी राजनीति इसी तरह की रही है। अब बदल जाए तो कोई आश्चर्य नहीं। हालांकि इसकी संभावना से आप इंकार नहीं कर सकते। बहुत सी चीजें होती हैं- वह सामान्य जीवन में भी होती हैं, और राजनीति में तो और ज्यादा होती हैं। जो बात आपके मन में चुभ जाए फिर वो आपको चैन से नहीं रहने देती है तो उसका प्रतिकार करने की आप कोशिश करते हैं। यह राजनीति में बड़ी सामान्य सी बात है। लेकिन जो अध्यक्ष बनने जा रहे हैं वह ऐसी आक्रामक राजनीति करने वाले व्यक्ति नहीं हैं।

इसलिए वह ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे कि भारतीय जनता पार्टी के अंदर एक तरह का द्वंद, झगड़ा या संघर्ष शुरू हो जाए। वो जो कुछ करेंगे बहुत चुपचाप करेंगे। इस तरह से करेंगे कि अगर किसी के विरुद्ध भी कुछ कर रहे हैं तो वह ज्यादा बोल ना पाए। उनका कद ऐसा है कि जो बोल सकते हैं उनके लिए भी बोलना मुश्किल है। मुझे नहीं लगता कि प्रधानमंत्री के अलावा और कोई उनसे बोल सकता है- मतलब ऐतराज जता सकता है या विरोध कर सकता है। अपनी राय जरूर दे सकता है।

भारतीय जनता पार्टी में एक नया बदलाव, परिवर्तन होने जा रहा है। याद रखिए यह कोई चौंकाने वाला नाम नहीं होगा। चौंकाने वाला इस दृष्टि से कि वह कोई ऐसा नाम नहीं होगा जिसके बारे में आप जानते ना हों, जिसके बारे में आपने सुना ना हो, जिसे आने काम करते हुए न देखा हो। यह मान कर चलिए कि नया अध्यक्ष चुने जाने के बाद मंत्रिमंडल में भी फेरबदल होना लगभग तय है। तो इंतजार कीजिए, बस कुछ ही दिन की बात है। हफ्तेभर में पता चल जाएगा कि भाजपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा।

(लेखक राजनीतिक विश्लेषक और ‘आपका अख़बार’ के संपादक हैं)