कभी किसी कवि ने कहा कि ”मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना” किंतु आज के समय में या कहें की जब से मजहबी दीवारें एक मनुष्य की दूसरे मनुष्य के बीच खड़ी हुई हैं तब से लेकर अभी तक का इतिहास इस बात को कई बार दोहरा चुका है कि यह कहना शायद दुनिया का सबसे बड़ा झूठ है । क्‍योंकि यही मजहब पूरी दुनिया में दंगा फसाद और लड़ाई झगड़े कराने का सबसे बड़ा कारण बन कर बार-बार सभी के सामने आता रहा है। असम में जिस तरह से मदरसों को लेकर वहां के कुछ  इस्लामिक स्कॉलर पुलिस के पास गए और जोर देकर कहा कि कुछ लोग मदरसे से पढ़ाई करने के बाद आतंकवाद के रास्ते पर जा रहे हैं, यदि उन्हें नहीं रोका गया तो  भविष्य की स्थितियां बहुत ही भयावह होंगी।  उसके बाद हम देखते हैं कि कैसे कट्टरवाद एवं मजहबी संकुचित मानसिकता से बाहर निकालने के लिए राज्‍य शासन, पुलिस प्रशासन एवं स्‍वयं मुख्‍यमंत्री डॉ. हिमंत बिश्व शर्मा सक्रिय नजर आए हैं।

मदरसों पर सख्‍त एक्‍शन ले रही असम की हेमंत विश्व शर्मा सरकार

असम की सरकार पिछले कुछ महीनों से मदरसों पर अपने एक्शन को लेकर लगातार चर्चा में है। मुख्यमंत्री हेमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व में सूबे की सरकार ने मदरसों पर कई कार्रवाइयां की हैं, जिनमें आतंकियों से रिश्ता निकलने पर मदरसा ढहाया जाना भी शामिल है। इस बीच असम के पुलिस महानिदेशक ज्योति महंत ने राज्य सरकार की ओर से जो कहा गया, उसे सभी को गंभीरता से लेना होगा। उन्‍होंने कहा,  ‘कट्टरपंथ’ के खतरे को कम करने के लिए छोटे मदरसों को बड़े मदरसों में शामिल करने का फैसला ले लिया गया है। राज्य पुलिस ने आतंकवादी संगठन-अंसारुल बांग्ला टीम (एबीटी) और अलकायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (एक्यूआईएस) के नौ मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है और पिछले साल 53 संदिग्ध आतंकवादियों को गिरफ्तार किया था।

अब तक 99% आतंकवादियों का मदरसा जुड़ाव आया है  सामने

कहने वाले कह सकते हैं कि ऐसा कुछ भी नहीं है, मदरसों में तो शांति, सद्भाव और प्रेम की शिक्षा दी जाती है किंतु पूरी सच्‍चाई इसके उलट है । भारत में ही नहीं दुनिया भर में जितने भी आतंकवादी सामने आ रहे हैं, उनमें 99% से भी अधिक आतंकवादी कभी न कभी इन्हीं मदरसों से शिक्षा प्राप्त कर निकले हैं ।  ”न्यू मीडिया” के आने के बाद तमाम सारे डेटा इस संबंध में आपको वेब माध्यम में देखने को मिल जाएंगे ।  जिन्‍हें यह बात स्‍वीकार्य नहीं, उनके लिए अवश्‍य ही कुछ पुराने घटनाक्रम याद कराए जा सकते हैं। अलकायदा इंडियन सब कांटिनेंट (एक्यूआईएस) और जमाअत उल मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) मदरसों के जरिए यूपी में अपनी जड़े जमाने की कोशिश करते पकड़े गए।

कई मदरसों में दी जा रही आतंकवाद की शिक्षा

यूपी एटीएस ने बीते दिनों नेपाल सीमा से ही मुदस्सिर, कामिल और अलीनूर को गिरफ्तार किया था। मुदस्सिर ने ही बांग्लादेशी आतंकी अब्दुल्लाह ताल्हा व अलीनूर को शरण दी थी। तत्‍कालीन एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने उत्‍तर प्रदेश की इस घटना पर बताया भी था कि गिरफ्तार आतंकियों से पूछताछ में जो तथ्य सामने आए, उससे साफ है कि कई मदरसों में आतंकवाद की शिक्षा दी जा रही है। अन्‍य प्रकरण में असम सरकार ने तीन निजी मदरसों पर बुलडोजर चलाया । बंगाईगांव के मदरसे का अल-कायदा से लिंक होने की वजह से इसे ध्वस्त किया गया। यहां मोरीगाँव में सक्रिय एक आतंकी मॉड्यूल  ध्‍वस्‍त‍ किया गया। यह मॉड्यूल एक मदरसे से संचालित हो रहा था और राज्य में बड़े हमले की योजना बना रहा था। मोइराबारी में 2018 से जामी-उल-हुदा मदरसा चलानेवाले मुफ्ती मुस्तफा से कई आपत्तिजनक सामग्री मिली जिसके आधार पर अन्‍य 8 मौलवियों को हिरासत में लिया, पता चला कि उसे बांग्लादेश से अंसरुल्ला और कई अन्य देशों से फंडिंग हो रही थी।

जहां मुस्‍लिम जनसंख्‍या अधिक वहीं, आतंकी गतिविधियां मिल रहीं ज्‍यादा

वेस्ट बंगाल की एसटीएफ ने फैजल अहमद उर्फ शाहिद मजूमदार और बेंगलुरु से गिरफ्तार उसका साथी हसनथ शेख निवासी मालदा को पकड़ा इनके आतंकी संगठन अलकायदा के संपर्क थे। यह अन्‍य युवाओं में मजहब के सहारे दूसरे धर्मों के प्रति नफरत भरने और अलकायदा से जोड़ने का काम पश्चिम बंगाल से लेकर पश्चिमी यूपी तक में स्लीपर सेल तैयार करते हुए कर रहे थे।  सरसावा का रहने वाला किफायत उल्लाह उर्फ जाफर अहमद उर्फ अताउरर्हमान जम्मू-कश्मीर गया और फिर आतंकी संगठन ”हूजी” का चीफ बन गया । ऐसे ही जैश-ए-मुहम्मद और तहरीक-ए-तालिबान का आतंकी मुहम्मद नदीम को कोतवाली गंगोह क्षेत्र के गांव कुंडाकला से पकड़ा गया था ।

कुछ आतंकवादियों ने तो भारतीय नागरिकता तक प्राप्‍त कर ली है

देवबंद से जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शाहनवाज तेली निवासी कुलगाम (जम्मू-कश्मीर) और आकिब अहमद मलिक निवासी पुलवामा की गिरफ्तारी हुई।  इसी प्रकार से दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम ने सहारनपुर से हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी एजाज शेख को पकड़ा। पाकिस्तानी जासूस शाहिद उर्फ इकबाल भट्टी को पटियाला पुलिस ने हकीकतनगर से गिरफ्तार किया, जो देवराज सहगल के नाम से यहां आठ वर्षों से रह रहा था। गजब तो यह है कि इसने भारतीय नागरिकता भी प्राप्त कर ली थी। ऐसे ही आतंकी गतिविधियों के चलते मुफ्ती इसरार को पकड़ा गया।

हिन्‍दुओं के पवित्र माघ मेले को भी नहीं छोड़ा मजहबी नफरत फैलाने से

दूर क्‍यों जाएं हाल ही में प्रयागराज में हिंदू धर्म की धार्मिक पुस्तकों की गलत व्याख्या वाली किताबों को बेचने का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस संबंध में तीन लोगों को हिरासत में लिया, पूछताछ में पता चला कि इनमें से दो समीर और मोनिश स्टॉल लगा कर माघ मेले में आपत्तिजनक और अप्रमाणित पुस्तकों को बेच रहे थे और मास्टरमाइंड महमूद हसन गाजी गाजियाबाद में बहदानियत संस्था का अध्यक्ष है और मदरसे का शिक्षक है। एक अन्‍य प्रकरण में जामिया मारिया निसवा मदरसा पूर्वी चंपारण बिहार से कुरान शरीफ और हदीस की तालीम देने वाले मौलवी मुफ्ती असगर अली को एनआईए ने गिरफ्तार किया। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका के आतंकी संगठन जमात उल मुजाहिदीन से जुड़े होने के साथ हिंदुस्तानी मुस्लिम बच्चों-नौजवानों का ऑनलाइन ब्रेनवॉश करता था।

सभी का एक ही उद्देश्‍य गजवा-ए-हिंद का सपना साकार करना

यूपी एटीएस ने आतंकी संगठन अलकायदा और उसके सहयोगी बांग्लादेशी संगठन जमात-उल-मुजाहिद्दीन बांग्लादेश (ऐएमबी) के 8 आतंकियों को गिरफ्तार किया है। दोनों संगठन गजवा-ए-हिंद के उद्देश्य को पूरा करने के लिए अपने संगठन में आतंकी भर्ती करते थे। इन्‍हें हरिद्वार, मेरठ और नेपाल बार्डर से गिरफ्तार किया गया है। । सहारनपुर के लुकमान, मो. अलीम और मो. मुख्तार, हरिद्वार के अलीनूर व मुद्दस्सिर, देवबंद से कामिल, शामली से कारी सहजाद और झारखंड के नवाजिश को गिरफ्तार किया गया है। ये लोग भारत में अवैध घुसपैठ कर सीमावर्ती राज्यों पश्चिम बंगाल और असम में कट्टरपंथी विचारधारा वाले व्यक्तियों को जोड़ रहे थे। ये सभी आतंकी वहां के मदरसों के जरिए नेटवर्क बना रहे थे। पता चला कि गिरफ्तार आतंकी यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में कट्टरपंथी विचारधारा वालों के सहयोग से जकात के नाम पर टेरर फंड जुटाने में लगे हैं।

देश के हर राज्‍य में अब तक मदरसा-आतंकवाद-दीनी तालीम का कनेक्‍शन मिला

दक्षिण कश्मीर के शोपियाँ जिले के सीबीएससी संबद्ध मदरसे के तीन उलेमाओं को पीएसए में गिरफ्तारी हुई। इन पर 13 आतंकियों को तैयार करने का आरोप है। इस मदरसे का नाम सिराज-उल-उलूम है।  इसे कश्मीर के बड़े मदरसों में गिना जाता है। मध्यप्रदेश के खंडवा और झारखण्‍ड से अभी कुछ दिन पूर्व ही कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया। खण्‍डवा के पकड़े गए इस युवक का संबंध आतंकी संगठन आईएस से होना सामने आया। केरल, तमिलनाडू, तेलंगाना, कर्नाटक, दिल्‍ली, पंजाब, देश का कौन सा ऐसा राज्‍य शेष है जहां से आतंकवादी नहीं पकड़े जा रहे और उनका कोई न कोई संबंध मदरसों से होना नहीं पाया गया है?  देखा जाए तो संपूर्ण भारत के ऐसे तमाम प्रकरण आज गिनाए जा सकते हैं । जिनमें कहीं न कहीं आतंकवाद को प्रश्रय देने, दूसरे धर्म के लोगों के प्रति जहर भरने, उन्‍हें उकसाने के लिए मसरसों में पढ़ रहे और पढ़ा रहे लोग दोषी पाए गए हैं।

इस विषय में कार्य करना है असम में डॉ. हिमंत बिश्व शर्मा सरकार की बड़ी सफलता

वास्‍तव में इन परिस्‍थ‍ितियों में आवश्‍यक है कि कैसे भारत में आतंकवाद के रास्‍ते पर चलने के पूर्व भी बच्‍चों और लोगों को भटकाव से बचाया जा सके। इस संदर्भ में यह असम में डॉ. हिमंत बिश्व शर्मा सरकार की बड़ी निर्भीकता और सफलता मानी जा सकती है कि उन्होंने बहुत ही स्पष्टता के साथ और प्रखरता के साथ इस विषय पर कार्य करना आरंभ किया है और यह सुनिश्चित कर दिया है कि राज्य का कोई भी व्यक्ति किसी भी सूरत में आतंकवाद के रास्ते पर नहीं चलेगा ।

असम और यूपी सरकार से अन्‍य राज्‍य भी लेंगे प्रेरणा

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि शिक्षा न केवल शारीरिक, मानसिक विकास का माध्यम है बल्कि भविष्य को निर्धारण करने के लिए भी जीवन में बहुत कुछ तय कर देती है । ऐसे में एक बाल मन में यदि नफरत और नकारात्मक बातें डाली जाती हैं तो वह उन्हें बड़े होने के बाद भी सच मान बैठता है और एक कल्पना लोक में जीते हुए आगे बढ़ता है, इस स्‍थि‍ति में सबसे पहले जरूरी है कि उसकी मानसिकता को बदला जाए कोशिश की जाए कि वह किसी भी स्‍तर पर नकारात्मकता की ओर न बढ़े। वास्‍तव में आज असम की सरकार मदरसों को लेकर इसी दिशा में आगे बढ़ रही है, जिससे कि एक राज्‍य संप्रभु राष्‍ट्र भारत के लिए सुयोग्‍य और श्रेष्‍ठ नागरिक तैयार कर पाए। उत्‍तर प्रदेश भी इन दिनों योगी आदित्‍यनाथ के नेतृत्‍व में इसी प्रकार के प्रयास करता दिख रहा है। उम्‍मीद की जानी चाहि‍ए कि आगे इन से प्रेरणा लेकर अन्य राज्य भी इस दिशा में आगे आएंगे।  (एएमएपी)