केंद्र सरकार 2023 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत खाद्य सब्सिडी के रूप में 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करेगी। इसी के तहत केंद्र ने नई एकीकृत खाद्य सुरक्षा योजना को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना नाम दिया है। इससे पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अंत्योदय अन्न योजना और प्राथमिक घरेलू लाभार्थियों को मुफ्त खाद्यान्न प्रदान करने के लिए नई एकीकृत खाद्य सुरक्षा योजना को स्वीकृति दी थी।नई योजना का कार्यान्वयन इस वर्ष एक जनवरी से शुरू हो गया है। इससे 80 करोड़ से अधिक गरीब लोग लाभान्वित हुए हैं। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत सभी प्राथमिक घरेलू और अंत्योदय अन्न योजना के लाभार्थियों को वर्ष 2023 के लिए मुफ्त खाद्यान उपलब्ध कराया जाएगा। पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 5 किलो मुफ्त चावल या गेंहू, 1 किलो चना 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को दिया जाता है।  ये राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत सब्सिडी पर मिलने वाले राशन के अतिरिक्त है।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना

कोविड-19 महामारी की चुनौतियों से निपटने हेतु भारत सरकार द्वारा ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ को मार्च 2020 में मंजूरी प्रदान की गई थी। दरअसल इस योजना को ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज’ के एक हिस्से के रूप में लांच किया गया था।

‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ के अंतर्गत प्रत्येक व्यक्ति को ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम’ के तहत प्रदान किये जाने वाले 5 किलो अनुदानित अनाज के अतिरिक्त निशुल्क अनाज प्रदान किया जाता है। अतिरिक्त निशुल्क अनाज की यह मात्रा 5 किलोग्राम है।

‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013’

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए), 2013 का उद्देश्य एक गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए लोगों को वहनीय मूल्यों पर अच्छी गुणवत्ता के खाद्यान्न की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध कराते हुए उन्हें मानव जीवन-चक्र दृष्टिकोण में खाद्य और पौषणिक सुरक्षा प्रदान करना है। पात्र व्यक्ति को चावल/ गेहूं/मोटे अनाज क्रमश: 3/ 2/1 रूपए प्रति किलोग्राम के वहनीय मूल्यों पर 5 किलोग्राम खाद्यान्न प्रति व्यक्ति प्रति माह प्रदान किया जाता है। मौजूदा अंत्योदय अन्न योजना परिवार, जिनमें निर्धनतम व्यक्ति शामिल हैं उनको 35 किलोग्राम खाद्यान्न प्रति परिवार प्रति माह प्रदान किया जाता है।(एएमएपी)